Rajasthan Election Results 2018: अधिकतर मंत्रियों की हार ने भाजपा का किला ढहाया
नई दिल्ली। राजस्थान विधानसभा चुनाव में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है उसके बाद पार्टी के भीतर कई सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बात का मंथन हो रहा है कि आखिर क्यों पार्टी को प्रदेश में हार का सामना करना पड़ा है। चुनाव नतीजों की तस्वीर साफ होने के बाद जो दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है वह यह कि प्रदेश सरकार के कई मौजूदा मंत्री अपनी सीट हार गए जोकि पार्टी के लिए हार की सबसे बड़ी वजह साबित हुई है। राजे सरकार में अधिकतर मंत्री या तो अपनी सीट से हार चुके हैं या फिर वह अपनी सीट से पीछे चल रहे हैं। यही नहीं कुछ ऐसे भी पार्टी के नेता हैं जिन्हें टिकट नहीं दिया गया था और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, लेकिन इसके बाद भी वह चुनाव हार गए हैं।

दिग्गज मंत्री भी हारे
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस के नेता मानवेंद्र सिंह को हरा दिया है जोकि चुनाव से ठीक पहले भाजपा से दल बदलकर कांग्रेस के खेमे में गए थे। हालांकि राजे के मंत्री गुलाब चंद कटारिया आगे चल रहे हैं और चुनाव जीत सकते हैं, लेकिन पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ पीछे चल रहे हैं। प्रदेश के कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी हार के करीब खड़े हैं। खेल मंत्री गजेंद्र सिंह खिवसार भी अपना चुनाव हार चुके हैं। पीडब्ल्यूडी मंत्री युनुस खान भी कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट के खिलाफ अपना चुनाव हार चुके हैं।

कई मंत्रियों की छुट्टी
यही नहीं सुरेंद्र गोयल और राजपाल सिंह जैसे मंत्रियों को भी राजस्थान चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की करीबी किरन माहेश्वरी किसी तरह से चुनाव जीतने में सफल रही हैं, वहा भाजपा की पूर्व महासचिव हैं और प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षामंत्री थीं। इसके अलावा कुछ अन्य मंत्री हेम सिंह भडाना, अजय किलक, बाबूलाल भैरवा और अल्पसंख्यक मंत्री अरुण चतुर्वेदी और आमरा राम अपना चुनाव हार गए हैं। श्री चंट कृपलानी पीछे चल रहे हैं, जबकि जसवंत सिंह ने चुनाव ही नहीं लड़ा।

इन्हें भी मिली हार
फॉरेस्ट मिनिस्टर राजुकमार रिनवा भी चुनाव हार गए हैं, जबकि सुरेंद्र टिटी, ओटराम देवसी, धन सिंह रावत, बंशीधर खांडेला, सुशीला कटारा, कमसा मेघवाल, कालीचरण शरफ भी अपनी सीट पर चुनाव हार गए हैं। वहीं सुरेंद्र गोयल, हेम सिंह भडाना, राजुकुमार रिनवा को पार्टी ने टिकट नहीं दिया था। नंद लाल मीणा और जसवंत सिंह मीणा ने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया था। सुशीला कटारा और धन सिंह रावत को भी पार्टी ने टिकट नहीं दिया था, लेकिन दोनों चुनाव हार चुके हैं।
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