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रेल बजट: ट्रेनों में लगाये जायेंगे अल्ट्रासोनिक गैजेट

रेल बजट
आज रेल बजट का पिटारा खुला, रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने रेलवे विभाग को नई ट्रेनों का तोहफा रेलवे विभाग को दिया। तमाम मूलभूत सुविधाओं को लेकर बात उठी। सुरक्षा को लेकर रेल मंत्री ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में दुर्घटनाओं से बचने के लिए अल्ट्रा सोनिक गैजेट लगाये जायेंगे। अगर हम सुरक्षा की बात करें तो रेल मंत्रालय को मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर गौर करना होगा। ताकि लोगों को मौत के मुंह में असमय जाने से बचाया जा सके।

हर साल 15,000 लोग होते हैं ट्रेन दुर्घटना का शिकार

एक रिपोर्ट के अनुसार इस देश में हर साल 15,000 लोग ट्रेनों दुर्घटना का शिकार होते हैं। रेल मार्ग के बीच आने वाले तमाम गांवों व कस्बों के किनारे बने मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर लोगों की सुरक्षा के लिए कोई फाटक नहीं लगाए जाते हैं। जिसके चलते रेलवे Track क्रास करते समय अचानक से आने वाली ट्रेन लोगों की जान लेकर चली जाती है। आंकड़ों की बात करें तो अकेले मुम्बई में ही 6,000 लोग रेल हादसों में मारे जाते हैं। लगभग 1,000 लोग डिब्बे से गिरकर या ट्रेन की टक्कर में मरते हैं।

यूपी में हजारो लोग मौत के मुंह में

यूपी की अगर बात करें तो बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, लखनऊ, जौनपुर, कानपुर, कपूरथला, जालंधर, आगरा, हाथरस, मेरठ, गजरौला, गाजियाबाद, पंतनगर, आवंला, बनारस, माउ, रेल मार्ग की मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर हजारों लोगों को ट्रेन अपनी चपेट में ले चुकी हैं। मुरादाबाद में रेलवे फाटक बनाने को लेकर लोग सड़कों भी आ चुके हैं। मगर नतीजा ढाक के दो पात की तरह है।

1100 रेलवे क्रासिंग मानव रहित

अकेले पूर्व मध्य रेलवे में अभी भी 1100 से ज्यादा ऐसे रेलवे क्रासिंग मानवरहित हैं। जहां दुर्घटना का हमेशा ही खतरा बना रहता है। इस संबंध में पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधनक मधुरेश कुमार ने कहा कि पूर्व मध्य रेलवे बिहार से झारखंड तक फैला है। इसमें 986 रेलवे क्रासिंग हैं। जो मानव सहित हैं। मगर 1127 ऐसे क्रासिंग हैं जो मानवरहित हैं।

पर्चे बांटकर कर लोगों को कर रहे हैं सावधान

रेलवे के अधिकारियों का अनुमान है कि पूर्व.मध्य रेलवे में प्रतिदिन 2 लाख से ज्यादा लोग रेलवे क्रासिंग से गुजरते हैं। क्रासिंग की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बजाय पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन पर्चे बंटवाकर और मोबाइल एसएमएस के माध्यम से लोगों को सावधान रहने की नसीहतें दे रहा है।

18,200 बिना फाटक वाले रेलवे क्रासिंग

पिछले सालों में रेल बजट के दौरान पटरी की टूट-फूट, मरम्मत कार्यों और क्रासिंग बनवाने के लिए करोड़ों रुपए निकलते हैं। मगर शहर से लेकर गांव के बीच आने वाली तमाम रेलवे क्रासिंग फाटक रहित हैं। देश में लगभग 18,200 बिना फाटक वाले रेलवे क्रासिंग है। जिन रास्तों और रेल मार्ग के आर-पार जाने वाली सड़क पर फाटक आदि नहीं होते हैं। इन जगहों पर भी गैजेट्स का इस्तेमाल मानव सुरक्षा के लिए किया जाएगा।

ऐसे काम करेंगे अल्ट्रा सोनिक गैजेट्स

रेल यात्रा को दुर्घटना मुक्त बनाने के लिए रेल मंत्री ने संसद में अल्ट्रासोनिक गैजेट्स के इस्तेमाल का उपाय सुझाया है। रेल दुर्घटनाओं को बचाने में एंटी कलीजन डिवाइस, डिजिटल अल्ट्रासोनिक फ्लाडिटेक्टिंग मशीन, अल्ट्रासोनिक रेल टेस्टिंग आदि गैजेट्स का यूज होगा। इनमें से एंटी कलीजन डिवाइन दो ट्रेनों के बीच आमने-सामने की ओर, पीछे से होनी वाली टक्टरों को रोक सकती है। अकूस्टिक बीयरिंग डिटेक्टर का इस्तेमाल से रेल के एक्सल बॉक्स और पहियों में खराबी का पता चलेगा। अल्ट्रासोनिक फ्लाडिकेटिंग मशीन से पटरियों की क्षति के बारे में जानकारी चलेगी। धुंआ और आग की सूचना देने वाले अर्ली वार्निंग सिस्टम लगेंगे।

रेल राज्यमंत्री ने कहा

हालांकि, 22 जून को ही रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने घोषणा की थी कि देश में कहीं भी अब मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग नहीं रहेगी। ऐसी सभी क्रॉसिंगों पर 24 घंटे ड्यूटी करने के लिए रिटायर्ड फौजियों की सेवाएं ली जाएंगी। कहा कि रेल मंत्रालय ने ये तय किया है कि पांच साल के अंदर सभी मानव रहित रेल क्रॉसिंगों पर फाटक लगाने की व्यवस्था की जाएगी।

अब देखना यह है कि रेल मंत्री सदानंद गौड़ा और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा की यह घोषणाएं कब तक धरातल पर दिखाई देंगी और लोग असमय मौत के मुंह में जाने से बचेंगे।बॉ

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