राहुल गांधी ने नहीं किया गरीब के घर भोजन, जानिये क्‍यों?

Rahul Gandhi
[अजय मोहन] कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी बुंदेलखंड के हमीरपुर के राठ इलाके में रैली करने गये। तमाम मुद्दे उठाये, लोगों से मिले, लेकिन इस बार बुंदेलखंड के गरीब के घर जाकर भोजन नहीं किया। आखिर क्‍यों?

इस सवाल का जवाब पढ़ने के बाद आपके मन में भी उन किसानों के लिये ददर्द जाग उठेगा, जो बुंदेलखंड में रह रहे हैं। इसका कारण सिर्फ एक है- वो है चांदी का चम्मच लेकर पैदा होने वाले राहुल गांधी को इस समय गरीब किसानों के घर में सिर्फ जंगली चावल ही खाने को मिलता और वह उनकी हलक से नीचे नहीं उतरता।

जी हां तमाम वादे कर सपने दिखाने वाले राहुल गांधी जिस बुंदेलखंड को लेकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक चुके हैं, उस बुंदेलखंड का यह हाल है कि लगातार छठे वर्ष यहां ठीक से बारिश नहीं हुई। यानी फिर से धान की फसल नहीं हुई। अगली फसल डेढ़ महीने बाद आयेगी, लिहाजा गरीब किसान के पास सिर्फ जंगली चावल ही खाने को है। इस जंगजी चावल को पसही का धान भी कहते हैं। कई लोग इसे सीता भोग भी कहते हैं। यह वो धान है, जिसे बरसात के वक्त ट्रेन से सफर करते वक्त आपने भी देखा होगा। रेल पटरी के किनाने बने गड्ढों, तालाबों, रेल पटरी के किनारे यह धान बारिश के दौरान उग आता है।

राहुल को चटनी रोटी की जगह मिलेंगे 28 रुपए

बुंदेलखंड में पिछले छह साल से कम बारिश की वजह से अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान गरीब किसान रेल पटरी के किनारे लगे इस धान को काट लाते हैं और उसमें से चावल निकाल कर जमा कर लेते हैं और उसी के भरोसे यह तीन महीने जैसे-तैसे काट लेते हैं। बांदा के निवासी व वरिष्ठ पत्रकार राम लाल जयन ने बातचीत में बताया कि हर साल भीषण गर्मी के बाद किसानों के घर खाली हो जाते हैं। खाने के नाम पर सिर्फ यही बचता है। यह जंगली धान कोई खरीदता भी नहीं है। रामलाल जयन ने बताया कि यह आलम सिर्फ उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड का ही है।

अब सोचिये क्या कांग्रेस के शहजादे इस धान को भोजन के रूप में स्वीकार करेंगे। शायद नहीं, और अगर कर भी लिया तो शायद वो बीमार पड़ जायें, क्योंकि हो सकता है हाईजीनिक फूड के आदि राहुल गांधी को पसही का धान सूट नहीं करे।

राहुल को 28 रुपए कैश

राहुल गांधी बुंदेलखंड के हमीरपुर के राठ और देवरिया के सलेमपुर में रैलियां करने जा रहे हैं। पहली रैली रथ में है, जहां पर उनके स्वागत में बांदा के नहरी गांव के ग्राम प्रधान लाला राम प्रजापति पहुंचने वाले हैं। लाला राम वो हैं, जिनके पिता भागवत प्रजापति की मौत भूख की वजह से हुई थी। अपने पिता की मौत का गुस्सा और महंगाई को सस्ताई बताने वाली कांग्रेस पार्टी के खिलाफ खुन्नस ही लाला राम को राहुल गांधी के पास खींच कर लायेगी।

सुरक्षा कारणों से प्रजापति को राहुल गांधी तक नहीं जाने दिया गया। वह असल में राहुल गांधी को 28 रुपए कैश उपहार स्वरूप देने वाले थे। लाला राम ने बातचीत में कहा कि वो ऐसा सिर्फ इसलिये करना चाहते हैं, ताकि राहुल गांधी 28 रुपए में भरपेट भोजन करके यहां से जायें, उन्‍हें इस बार चटनी रोटी न खानी पड़े। गौरतलब है कि योजना आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार जो व्यक्ति 28 रुपए प्रति दिन कमाता है, वह गरीब नहीं माना जाता है। इसी बात का गुस्सा गरीब किसानों में भरा हुआ है।

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