भारत की गिरती अर्थव्यवस्था पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गिरती जीडीपी पर उठाए सवाल
देश इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और गिरती मुद्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को चिंताजनक बना दिया है। इन मुद्दों पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में गंभीर सवाल उठाए हैं और सरकार की आर्थिक नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीतियों के कारण देश की जीडीपी वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत तक गिर गई है। जो पिछले दो वर्षों में सबसे कम है।

आर्थिक असमानता पर राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने अपने विस्तृत बयान में देश की आर्थिक असमानता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का लाभ केवल चुनिंदा अरबपतियों तक सीमित रह गया है। जबकि किसान, मजदूर, और मध्यम तथा निम्न वर्ग की स्थिति बदतर होती जा रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या यह विकास केवल चंद लोगों तक सीमित रहेगा या इसे देश की आम जनता तक भी पहुंचाया जाएगा। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक आर्थिक प्रगति का लाभ सभी को समान रूप से नहीं मिलेगा। तब तक देश की विकास दर स्थिर नहीं हो सकती।
महंगाई और बेरोजगारी ने बनाया नया रिकॉर्ड
राहुल गांधी ने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के आंकड़ों को सरकार की नाकामी करार दिया। खुदरा मुद्रास्फीति 6.21 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। रुपया 84.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुका है। बेरोजगारी दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर है। गांधी ने कहा कि आलू, प्याज जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। जिससे आम जनता का जीवन कठिन हो गया है।
घटती मांग और आर्थिक ठहराव
राहुल गांधी ने बताया कि मजदूरों और छोटे व्यवसाय मालिकों की आय में ठहराव के कारण उपभोक्ता मांग में भारी गिरावट आई है। उन्होंने उदाहरण दिया कि 10 लाख रुपए से कम कीमत वाली कारों की बिक्री अब कुल कार बिक्री का 50 प्रतिशत से भी कम हो गई है। जो 2018-19 में 80 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा कि यह गिरावट केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर तक सीमित नहीं है। बल्कि यह आवास बाजार और FMCG क्षेत्र को भी प्रभावित कर रही है। जो अर्थव्यवस्था की व्यापक समस्याओं को उजागर करता है।
नोटबंदी और जीएसटी पर आलोचना
राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था में गिरावट के लिए नोटबंदी और जीएसटी के क्रियान्वयन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इन नीतियों ने विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी को घटाकर 13 प्रतिशत कर दिया है। जो पिछले 50 वर्षों में सबसे कम है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दशक में कर बोझ में बदलाव ने आम आदमी को और अधिक प्रभावित किया है। कॉर्पोरेट कर का योगदान 7 प्रतिशत घटा है। आयकर का योगदान 11 प्रतिशत बढ़ा है।
नए आर्थिक ढांचे की जरूरत पर जोर
राहुल गांधी ने इन समस्याओं के समाधान के लिए एक समावेशी आर्थिक ढांचे की वकालत की। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसा आर्थिक मॉडल चाहिए जो हर व्यक्ति को विकास का समान अवसर प्रदान करे। समाज के सभी वर्गों को आर्थिक प्रगति में योगदान देने और उसका लाभ उठाने का अवसर मिलना चाहिए।उन्होंने सरकार से मांग की कि आर्थिक नीतियों को इस तरह से लागू किया जाए कि वे सतत विकास को बढ़ावा दें और आर्थिक असमानता को खत्म करें।












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