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Rahul Gandhi के महाराष्ट्र चुनाव में धांधली से लेकर ECI नियुक्ति के दावों का यहां देखें पूरा फैक्ट चेक

Rahul Gandhi Claims Fact ChecK: राहुल गांधी ने मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने पर एक पोस्ट लिख निशाना साधा है। उन्होंने सरकार पर कोई जवाबदेही नहीं लेने का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने सिर्फ प्रचार किया है। कुछ दिन पहले ही उन्होंने कई अखबारों में लेख लिखकर महाराष्ट्र चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे। इससे पहले उन्होंने चुनाव आयोग की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए थे। महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि चुनाव में मिली हार की बौखलाहट इस तरह से निकाल रहे हैं। लोकसभा में नेता विपक्ष के आरोपों का हमने फैक्ट चेक किया है। आप भी देखें कि उनके दावों में कितना दम है।

1) Rahul Gandhi ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर उठाए सवाल

राहुल गांधी का दावा है कि चुनाव आयोग की मनमाने ढंग से भर्ती करने के लिए सरकार ने इसमें से CJI को हटाया है। उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण फैसला बताया है। अब सच्चाई की बात करें, तो नए कानून (2023) के मुताबिक इसमें प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विपक्ष के नेता को समिति में रखा गया है। CJI की जगह कैबिनेट मंत्री को लाया गया है। साथ ही इसमें विपक्ष के नेता को भी शामिल किया गया है, ताकि नियुक्ति की प्रक्रिया पारदर्शी बन सके।

Rahul gandhi

अगर चुनाव आयोगों की नियुक्ति में धांधली की बात कहें, तो अब तक 26 में से 25 आयुक्तों की नियुक्ति में कांग्रेस सरकार का हस्तक्षेप था। इस तरह से 60 साल में हुए चुनावों को भी निष्पक्ष नहीं मानने का तर्क दिया जा सकता है।

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2) महाराष्ट्र चुनाव में वोटर लिस्ट में धांधली का आरोप

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष ने महाराष्ट्र चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र में 41 लाख नए मतदाता अचानक जुड़ गए और इसमें फर्जी नाम शामिल किए गए हैं। आंकड़ों में देखें क्या है स्थिति

तथ्य: इनमें से 26 लाख युवा (18+) मतदाता हैं, जो हर चुनाव के बाद स्वाभाविक तौर पर जुड़ते हैं। अगर इससे पहले के मतदाताओं में हुई वृद्धि का आंकड़ा देखें, तो यह ज्यादा था। चुनाववार यह आंकड़ा इस तरह से था...

2004-09 में 1 करोड़

2009-14 में 75 लाख

2014-19 में 63 लाख

इस आधार पर कह सकते हैं कि 2024 में हुई वृद्धि अस्वाभाविक नहीं है, बल्कि जनसंख्या नियंत्रण के उपायों की वजह से से यह संख्या पहले की तुलना में कम हुई है।

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3) मतदान के आंकड़ों में 5 बजे के बाद हुई वृद्धि

कांग्रेस सांसद ने अपने लेख में आरोप लगाया है कि मतदान प्रतिशत 5 बजे के बाद अचानक से बढ़ा और यह संकेत है कि चुनाव में धांधली हुई है। उन्होंने दावा किया कि मतदान 5 बजे के बाद अचानक 7.8% बढ़ा है। ये संदिग्ध आंकड़े हैं।

तथ्य: मतदान के नियम के मुताबिक 5 बजे तक जो लाइन में लग जाते हैं उन्हें वोट डालने दिया जाता है। यह ECI की नियमावली के अनुसार है। मतदान के फाइनल आंकड़े वोटिंग का समय खत्म होने के बाद ही आते हैं और उसके आधार पर ही फाइनल वोटिंग प्रतिशत का ऐलान किया जाता है।

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4) 12,000 बूथों पर BJP के पक्ष में की गई वोटिंग

राहुल गांधी ने दावा किया है कि 12,000 बूथों पर बीजेपी के पक्ष में वोटिंग की गई जिसकी वजह से एनडीए को जीत मिली है। हालांकि, उनका यह दावा सत्य के करीब नहीं लगता है, क्योंकि वोटिंग टर्नआउट का फायदा कुछ जगहों पर विपक्ष को भी मिला है। राहुल ने कमठी का उदाहरण दिया कि यहां बूथों को प्रभावित किया गया था। हालांकि, यहां से BJP नेता बावनकुले पहले भी 3 बार जीते हैं। उनकी जीत में इलाके में पकड़ और लोकप्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा, महिलाओं के मतदान में 6% बढ़त दिखी जिसका श्रेय 'लाडकी बहिन योजना' को दिया जा रहा है।

कई ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां टर्नआउट बढ़ा, लेकिन विपक्ष जीता:

मधा: NCP (SP) जीती

वानी: शिवसेना (UBT) जीती

श्रीरामपुर: कांग्रेस जीती

इन आंकड़ों और तथ्यों को देखकर कहा जा सकता है कि वोटिंग प्रतिशत बढ़ने से सिर्फ बीजेपी को फायदा हुआ है, इस दावे में बहुत दम नहीं है। महिलाओं ने चुनाव में अहम भूमिका निभाई और जीत की एक वजह बनी हैं।

5) ECI ने डेटा छिपाया, वोटर रोल और सीसीटीवी देने से किया इनकार

राहुल गांधी के इस दावे पर चुनाव आयोग ने भी स्पष्टीकरण दे दिया है। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया है कि ECI ने फोटो वाले वोटर रोल और CCTV डेटा देने से इनकार किया है। यह उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, तथ्य यह है कि हर उम्मीदवार को चुनावी रिकॉर्ड (जैसे वोटर लिस्ट, CCTV रिकॉर्ड्स) के एक्सेस की अनुमति होती है। हालांकि, आम जनता के लिए चुनाव आयोग निजता की सुरक्षा को ध्यान में रखकर फोटो सहित लिस्ट जारी नहीं करता है। दिसंबर 2024 में इसे ध्यान में रखकर केवल चुनिंदा दस्तावेजों को ही सार्वजनिक करने का ऐलान किया गया था।

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