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CJI को हटाकर पोल चीफ क्यों चुनना चाहती है सरकार? संसद में राहुल गांधी के 3 तीखे सवाल, EC पर सीधे आरोप

Rahul Gandhi News: लोकसभा में चुनावी सुधारों पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार से सीधा सवाल पूछा कि आखिर चुनाव आयोग के मुखिया और अन्य चुनाव आयुक्तों के चयन से मुख्य न्यायाधीश (CJI) को बाहर क्यों किया गया? राहुल गांधी के सवाल सिर्फ प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने इसे लोकतंत्र और संस्थानों की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा।

चयन समिति से CJI को हटाने पर पहला सवाल

राहुल गांधी ने संसद में कहा कि वह खुद चयन समिति का हिस्सा हैं, लेकिन उनकी आवाज वहां बेअसर है। समिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सामने वह अल्पमत में हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब देश के मुख्य न्यायाधीश पर सबको भरोसा है, तो उन्हें इस प्रक्रिया से हटाने की जरूरत क्यों पड़ी। उनका कहना था कि CJI को हटाने के पीछे सरकार की मंशा क्या है, यह देश को साफ-साफ बताया जाना चाहिए।

Rahul Gandhi News

राहुल गांधी 2023 के उस कानून का जिक्र कर रहे थे, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से CJI को हटाकर उनकी जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया। इस समिति में अब प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और एक केंद्रीय मंत्री शामिल हैं।

🟡 दूसरा सवाल: चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा क्यों?

राहुल गांधी का दूसरा बड़ा सवाल चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी सुरक्षा को लेकर था। उन्होंने पूछा कि ऐसा कानून क्यों बनाया गया, जिसमें चुनाव आयोग के प्रमुख और चुनाव आयुक्तों को उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों के लिए किसी भी तरह की कार्रवाई से संरक्षण मिल जाता है।

उनका तर्क था कि अगर संस्थान पूरी तरह स्वतंत्र हैं, तो उन्हें इतनी अतिरिक्त सुरक्षा देने की जरूरत क्यों पड़ती है। राहुल गांधी ने इसे जवाबदेही खत्म करने की कोशिश बताया।

🟡 तीसरा सवाल: CCTV फुटेज नष्ट करने की इजाजत क्यों?

राहुल गांधी ने तीसरा और सबसे तीखा सवाल CCTV और चुनावी डेटा को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के सिर्फ 45 दिन बाद CCTV फुटेज नष्ट करने की अनुमति देने वाला कानून क्यों लाया गया। सरकार का तर्क डेटा सुरक्षा का है, लेकिन राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह डेटा का नहीं, बल्कि चुनाव चोरी का मामला है।

उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ पारदर्शी है, तो सबूत मिटाने की जरूरत क्यों है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि चुनाव प्रक्रिया पर संदेह बढ़ रहा है।

🟡 चुनावी कार्यक्रम और वोटर लिस्ट पर आरोप

राहुल गांधी ने आगे आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर नियंत्रण का असर चुनावी शेड्यूल पर भी दिखता है। उन्होंने कहा कि अब चुनाव अभियान इस तरह तय किए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों के हिसाब से सब फिट बैठ जाए। लंबी-लंबी चुनावी तारीखें उसी का नतीजा हैं।

उन्होंने वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने दावा किया कि हरियाणा में एक विदेशी महिला का नाम 22 बार वोटर लिस्ट में पाया गया। वहीं बिहार में वोटर लिस्ट शुद्धिकरण के बाद 1.2 लाख डुप्लीकेट फोटो सामने आए।

🟡 तीन मांगें, जिन पर सरकार को जवाब देना होगा

अपने भाषण के अंत में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के सामने तीन अहम मांगें रखीं। पहली, सभी राजनीतिक दलों को चुनाव से कम से कम एक महीने पहले मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट उपलब्ध कराई जाए। दूसरी, CCTV फुटेज नष्ट करने से जुड़ा कानून वापस लिया जाए। तीसरी, EVM की संरचना और सिस्टम को लेकर पूरी जानकारी और जांच की अनुमति दी जाए।

राहुल गांधी का कहना था कि उन्होंने संसद के भीतर और बाहर कई बार सवाल उठाए, लेकिन चुनाव आयोग ने अब तक किसी भी मुद्दे पर साफ जवाब नहीं दिया। उनके मुताबिक, जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होता रहेगा।

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