Punjab Driving License Scam: विजिलेंस ब्यूरो प्रमुख समेत 3 बड़े अफसर सस्पेंड, जानें कैसे हुआ धांधली का खुलासा?
Punjab Driving License Scam: पंजाब में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर जो घोटाला सामने आया है, उसने प्रशासनिक सिस्टम की पोल खोल दी है। सबसे हैरानी की बात तो ये है कि खुद भ्रष्टाचार रोकने वाली एजेंसी - विजिलेंस ब्यूरो - के मुखिया पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
राज्य सरकार ने विजिलेंस ब्यूरो के प्रमुख एसपीएस परमार और दो अन्य वरिष्ठ अफसरों स्वर्णदीप सिंह और हरप्रीत सिंह को सस्पेंड कर दिया है। कारण है - 'गंभीर कदाचार और ड्यूटी में लापरवाही'। यानी जिन लोगों को भ्रष्टाचार रोकना था, वो खुद या तो उसमें शामिल थे या फिर जान-बूझकर आंखें मूंदे बैठे थे।

कब और कैसे हुआ खुलासा?
ये कार्रवाई तब हुई जब पूरे पंजाब में विजिलेंस ब्यूरो ने RTA (क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण) ऑफिस और ड्राइविंग टेस्ट सेंटर्स पर अचानक छापेमारी की। छापों के दौरान पता चला कि बिना टेस्ट लिए, रिश्वत लेकर ड्राइविंग लाइसेंस बांटे जा रहे थे। कुछ केसों में तो प्रॉक्सी ड्राइवर तक रखे गए - मतलब कोई और टेस्ट दे रहा है, लाइसेंस किसी और को मिल रहा है।
16 FIR दर्ज, 24 लोग गिरफ्तार
अब तक 16 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 24 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इन लोगों में RTA के कर्मचारी, दलाल और एजेंट्स शामिल हैं जो पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहे थे। आरोप है कि इन एजेंट्स के जरिए टेस्ट में नंबर बढ़वाने से लेकर सीधा पास करवाने तक सब कुछ 'पेमेंट' के ज़रिए हो रहा था।
इस पूरे मामले की शुरुआत मुख्यमंत्री के एंटी-करप्शन हेल्पलाइन पर मिली कई शिकायतों से हुई थी। लोगों ने बताया कि बिना पैसे दिए लाइसेंस मिलना नामुमकिन था। इसके बाद ही ये बड़ी कार्रवाई शुरू की गई।
गौरतलब है कि एसपीएस परमार को इसी साल मार्च में ही विजिलेंस प्रमुख बनाया गया था, और महज़ एक महीने बाद ही उन पर खुद कार्रवाई हो गई। ये दर्शाता है कि सिस्टम के ऊपरी हिस्से में भी कितनी गड़बड़ियां चल रही थीं।












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