BJP manifesto: मोदी सरकार के चुनावी वायदे: वो 10 बड़े वादे जो हुए पूरे... या फिर रह गए अधूरे!

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने रविवार को अपना घोषणा-पत्र जारी कर दिया। इस संकल्प पत्र के केंद्र में गरीब, किसान, महिला और युवा वर्ग को रखा गया है। बीजेपी ने अपनी घोषणा पत्र का शीर्षक रखा है- भाजपा का संकल्प, मोदी की गारंटी।

इसे लॉन्च करते हुए PM मोदी ने कहा, 'पूरे देश को BJP के घोषणापत्र का इंतजार रहता है। इसकी बड़ी वजह ये है कि BJP ने हर गारंटी को पूरा किया है।' भाजपा का यह घोषणा पत्र केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली 27 सदस्यों की कमेटी ने तैयार किया है।

10 big promises of Modi government

आज हम मोदी सरकार के पिछले चुनावों में किए गए 10 बड़े वादों की चर्चा करेंगे। हम जानने की कोशिश करेंगे कि ये या वादे पूरे हो पाए या फिर अधूरे ही रह गए...

1. राम मंदिर- सफल

मोदी सरकार ने संविधान के दायरे में राम मंदिर निर्माण कराया है। इसके साथ ही बीजेपी सरकार ने अपने इस हिंदुत्ववादी एजेंडे के तहत यह वादा पूरा कर लिया है। लोकसभा चुनाव 2019 के कुछ ही महीने के बाद 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के पक्ष में फैसला सुनाया था।

इसके बाद 5 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में मंदिर बनाने के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की घोषणा की थी। इसके ठीक 6 महीने बाद 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में पीएम मोदी की मौजूदगी में राम मंदिर की आधारशिला रखी गई थी। इस साल 22 जनवरी 2024 को मंदिर में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न हुआ।

2. नागरिक संशोधन कानूनः सफल

मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन एक्ट यानी सीएए के नियमों का नोटिफिकेशन पिछले महीने जारी कर दिया। इसी के साथ यह कानून देश में लागू हो गया है। इसके तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर- मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

3. समान नागरिक संहिताः अधूरा

समान नागरिक संहिता लागू करने का BJP का वादा अभी अधूरा है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां यह विधेयक पारित होने के बाद समान नागरिक संहिता लागू हो गई है। हालांकि देश स्तर पर अभी ये लागू नहीं हो पाया है। समान नागरिक संहिता के तहत महिलाओं को पैतृक संपत्तियों, गोद लेने और तलाक़ में समान अधिकार दिया गया है।

4. धारा 370 का निर्मूलनः सफल

मोदी सरकार ने अपना ये वादा पूरा किया है। लोकसभा चुनाव के कुछ ही महीने के बाद 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A के प्रभाव को खत्म कर दिया गया। इसके तहत राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटकर दोनों को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले को वैध माना है।

5. चरणबद्ध तरीके से NRC लागूः अधूरा

मोदी सरकार का ये वादा अधूरा रह गया है। 20 नवंबर 2019 को गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि NRC की प्रक्रिया पूरे देश में लागू की जाएगी। हालांकि सिर्फ असम में ये अब तक लागू है। इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागू किया गया था। बीजेपी ने 2024 के संकल्प पत्र में एनआरसी का जिक्र नहीं किया है।

6. सभी घरों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्थाः लगभग पूरा

नल जल योजना के तहत लाखों गांवों में करोड़ों घरों तक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जा चुकी है और यह योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। योजना का लक्ष्य 2024 के आखिर तक देश के सभी गांवों में नल से जल पहुंचाना है। इस लक्ष्य प्राप्ति के लिए पिछले वर्ष 2023 में हर सेकंड नल जल का एक कनेक्शन दिया गया।

7. एकसाथ लोकसभा और विधानसभा चुनावः अधूरा

बीजेपी का 'एक देश-एक चुनाव' पुराना चुनावी मुद्दा रहा है। बाजपेयी से लेकर आडवाणी और अब पीएम मोदी भी इसमें दिलचस्पी दिखा चुके हैं। हालांकि अब तक बीजेपी का ये वादा पूरा नहीं हो पाया है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर अगला लोकसभा चुनाव बीजेपी जीत जाती है तो वो 2029 में इसे लागू कराने पर जोर देगी।

8. स्वच्छ गंगा का लक्ष्यः अधूरा

बीजेपी सरकार का गंगा को साफ करने का वादा बहुत पुराना है जो कि अभी भी अधूरा है। साल 2014 में BJP की सरकार बनते ही 'नमामि गंगे योजना' की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य गंगा को स्वच्छ बनाना था। मीडिया को RTI के तहत मिली जानकारी के मुताबिक 2022 तक सरकार इस योजना के लिए जारी हुए 20,000 करोड़ रुपए का सिर्फ 27% ही खर्च कर पाई। समय-समय पर गंगा की सफाई के लिए 'अर्ध गंगा मॉडल जैसी अन्य योजनाएं भी आईं, लेकिन अभी गंगा को पूरी तरह साफ नहीं किया जा सका है।

9. भ्रष्टाचार मुक्त भारतः अधूरा

BJP का भ्रष्टाचार मुक्त भारत के प्रयास का वादा अभी भी अधूरा है। हालांकि केंद्र सरकार लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठा रही है। ED और CBI जैसी जांच एजेंसियों की कार्रवाई बढ़ी है।

10. महिलाओं के लिए आरक्षणः सफल

ये बिल पिछले साल 22 सितंबर को दोनों सदनों में पास हो गया। इसके बाद 28 सितंबर को इस पर राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिल गई। हालांकि इस बिल का लागू होना नई जनगणना और परिसीमन पर निर्भर करता है। भारत में जनगणना आखिरी बार 2011 में हुई थी। केंद्र ने अभी तक कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना पूरी नहीं की है।

अब ऐसा माना जा रहा है कि ये लोकसभा चुनाव के बाद हो सकती है। वहीं, भारत में 2026 में परिसीमन की कवायद होगी। परिसीमन में लोकसभा और राज्य चुनावों के लिए देश भर में सीटों की संख्या के साथ-साथ क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का आवंटन शामिल है। परिसीमन भी जनगणना के आधार पर हो पाएगा।

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