लोकसभा चुनाव 2019: बदायूं लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की बदायूं लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के धमेन्द्र यादव सांसद हैं। वह समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भतीजे हैं। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराकर उन्होंने ये सीट जीती थी।

बदायूं लोकसभा सीट में 5 विधानसभा सीटें
यूपी की बदायूं लोकसभा सीट के अंतर्गत 5 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनके नाम गुन्नौर, बिसौली,सहसवान, बिल्सी और बदायूं हैं। इसमें से बिसौली विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। बदायूं लोकसभा सीट से पहले सांसद कांग्रेस के बदन सिंह थे। 1962 और 1967 के चुनावों में यहां भारतीय जन संघ का बोलबाला रहा। 1971 में हार के बाद 1977 में फिर से जनसंघ को यहां से जीत नसीब हुई। वहीं 1980 और 1984 दोनों ही चुनावों में यहां कांग्रेस विजयी हुई। 1989 में यहां से जनता दल ने बाजी मारी तो वहीं 1991 में यहां भाजपा का खाता खुला और स्वामी चिन्मयानन्द यहां से सांसद चुने गए। साल 1996 से इस सीट पर समाजवादी पार्टी का ही कब्जा रहा है। सलीम इकबाल शेरवानी 1996 से लगातार 4 बार इस सीट से जीते और उनके बाद मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेन्द्र यादव यहां के एमपी की कुर्सी पर विराजमान हैं।
धर्मेंद्र यादव
पिछले 5 सालों के दौरान धर्मेंद्र यादव की लोकसभा में उपस्थिति 82 प्रतिशत रही. इस दौरान उन्होंने सदन में 61 डिबेट में हिस्सा लिया और 989 प्रश्न पूछे।
बदायूं लोकसभा सीट एक परिचय- प्रमुख बातें
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बदायूं एक मशहूर ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है
बदायूं जिले की जनसंख्या 3,681,896 है, जिसमें से 1,967,759 पुरुष और 1,714,137 महिलाएं हैं
देश की 250 सबसे पिछड़े इलाकों में से एक है
साक्षरता दर 51.29% मात्र है,
साल 2014 में 1769145 लोगों ने वोट दिया
55 प्रतिशत पुरुष और 44 प्रतिशत महिलाओं ने की भागेदारी
बंदायू में 77 प्रतिशत हिंदू और 21 प्रतिशत मुस्लिम आबादी
सपा बसपा गठबंधन के बाद इस सीट पर चुनाव दिलचल्प होने के आसार हैं।












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