लोकसभा चुनाव 2019: अस्का लोकसभा सीट के बारे में जानिए

ओडिशा की अस्का लोकसभा सीट बीजेडी की पहचान रही है। इस लोकसभा सीट से बीजू पटनायक भी सांसद रहे और उनकी राजनीतिक विरासत को सम्भालने वाले नवीन पटनायक भी। एक तरह से दो-दो मुख्यमंत्री की राजनीतिक जमीन रही है अस्का लोकसभा सीट। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक जिस हिंजली विधानसभा सीट से चुने गये हैं वह भी इसी लोकसभा सीट का हिस्सा है। इस सीट पर इस समय कोई भी सांसद नहीं है और ये खाली है। साल 2014 में बीजेडी के लडू किशोर स्वाईं को इस सीट पर जीत मिली थी। 7 फरवरी 2019 को उनका निधन हो गया और यह सीट खाली हो गई। 2014 के लोकसभा चुनाव में अस्का लोकसभा सीट पर बीजेडी को 3 लाख से अधिक के अंतर से जीत मिली। बीजेडी उम्मीदवार लडू किशोर स्वाईं को 5 लाख 41 हजार 473 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे श्रीलोकनाथ रथ को 2 लाख 29 हजार 476 वोट प्राप्त हुए। बीजेपी 67 हजार 361 वोट पाने में कामयाब रही। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां पर 63.62 प्रतिशत मतदान हुआ था।

profile of Aska lok sabha constituency
अस्का लोकसभा सीट का इतिहास
अस्का लोकसभा सीट ही पहले भंजनगर लोकसभा सीट कहलाती थी। भंजनगर लोकसभा सीट पर पहली बार 1962 में लोकसभा चुनाव हुए। जीत कांग्रेस को मिली। अगले चुनाव में भी 1967 में कांग्रेस उम्मीदवार ही जीते। मगर 1971 में सीपीआई उम्मीदवार डीके पांडा ने जीत हासिल की। 1977 में भंजनगर लोकसभा सीट अस्का नाम से जानी जाने लगी। तब से लेकर 1984 तक लगातार कांग्रेस जीतती रही। 1989 में जनता दल और फिर 1991 में एक बार फिर कांग्रेस ने चुनाव जीता। 1996 में बीजू पटनायक इस सीट से सांसद चुने गये। अगले ही साल 17 अप्रैल 1997 को उनका निधन हो गया। उसके बाद हुए उपचुनाव में नवीन पटनायक अस्का ले सांसद चुने गये। फिर उन्होंने जनता दल का नाम बीजू जनता दल करते हुए अलग पार्टी बना ली और फिर 1998 और 1999 में भी नवीन पटनायक यहां से सांसद चुने गये। जब 2000 में बीजेपी के साथ गठबंधन कर ओडिशा विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज की, तो उन्होंने राज्य की बागडोर सम्भाल ली। नवीन पटनायक के इस्तीफे के बाद से सन् 2000 के उपचुनाव में बीजेडी के कुमुदिनी पटनायक ने जीत दर्ज की। तब से लेकर अब तक बीजेपी का परचम यहां लगातार लहरा रहा है। 2004 के लोकसभा चुनाव में अस्का से हरिहर स्वाईं ने चुनाव जीता। 2009 में इस सीट से बीजेडी के नित्यानंद प्रधान और 2014 में लडू किशोर स्वाईं को जीत मिली।

लडू किशोर स्वाईं ने सदन की 287 बैठकों में हिस्सा लिया था। उन्होंने 56 सवाल सदन में पूछे। वहीं 15 डिबेट में हिस्सा लिया। संसद में उनकी उपस्थिति 89.41 प्रतिशत रही। सांसद निधि से इन्होंने अपने इलाके में 15 करोड़ 95 लाख की राशि खर्च की। सांसद निधि में 2 करोड़ 3 हज़ार की राशि शेष है।अस्का लोकसभा सीट की आबादी 18 लाख 88 हजार 187 है। यहां की 89.21 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण इलाके में रहती है, जबकि 10.79 प्रतिशत आबादी शहरी है। यहां पर अनुसूचित जाति का आंकड़ा कुल आबादी का 20.06 प्रतिशत है, जबकि आदिवासियों का आबादी में हिस्सा 2.98 प्रतिशत है। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान अस्का लोकसभा सीट पर 14 लाख 8 हजार 780 मतदाता थे। यहां पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 लाख 50 हजार 999 थी, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6 लाख 57 हजार 781 थी. अस्का लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं - पोलसारा, कविसूर्यनगर, खालीकोट, अस्का, सुरादा, सनाखेमुंडी और हिंजली। 2014 के विधानसभा चुनाव में इन सभी सीटों बीजू जनता दल ने जीत हासिल की थी। अस्का लोकसभा सीट बीजेडी का गढ़ है और इसमें सेंधमारी कर पाना अभी बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल काम है। हालांकि मुख्य मुकाबला इन्हीं दो दलों के बीच है। कांग्रेस की चुनौती यहां बहुत कमजोर मानी जा रही है।

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