प्रियंका गांधी चुनावों में भीड़ जुटाएंगी लेकिन कांग्रेस को जीता नहीं पाएंगी-टीआरएस

नई दिल्ली: तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने प्रियंका गांधी वाड्रा के राजनाति में आने को लेकर बड़ा बयान दिया। टीआरएस ने गुरुवार को कहा कि प्रियंका गांधी आगामी चुनाव में कांग्रेस के लिए भीड़ जुटाएंगी लेकिन उसे वोट दिलाकर जीता नहीं पाएंगी। आज के चुनावी दौर में करिश्मे का प्रभाव नहीं होता है। टीआरएस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आबिद रसूल खान ने कहा, "वे दिन अब चले गये है जब लोग सुपर-करिश्मे के साथ आते थे और मतदाताओं को आकर्षित करते थे। क्योंकि आज के मतदाता पढ़े लिखे हैं, विशेषतौर पर युवा मतदाता जो चुनाव में प्रभाव डालते हैं"। खान के आगे कहा कि लोग उस पार्टी का साथ देते हैं जो अपने वादे पूरे करते हैं।

'टीआरएस की जीत की वजह सुशासन'

'टीआरएस की जीत की वजह सुशासन'

उन्होंने दावा कि टीआरएस ने तेलंगाना में हाल के विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनाव में जीत इसलिए हासिल की क्योंकि उन्होंने सुशासन दिया और अपने जनता से किए वादे पूरे किए। उन्होंने कहा कि इसमें कोई 'करिश्मा' नहीं था। प्रियकां गांधी ने बुधवार को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार संभाला था।

'भीड़ जुटाएंगी पर वोट नहीं'

'भीड़ जुटाएंगी पर वोट नहीं'

खान ने आगे कहा कि किसी फिल्म स्टार या सेलिब्रिटी के प्रवेश की तरह ही प्रियंका गांधी की एंट्री केवल भीड़ जुटाने के लिए है लेकिन वे इसे वोटों में नहीं बदल पाएंगे क्योंकि मतदाताओं ने फैसला कर लिया है कि वो ऐसी पार्टियों को चाहते हैं, जो अपने वादे पूरे कर सके। कुछ विश्लेषकों द्वारा उनके करिश्मे की तुलना उनकी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से करने पर उन्होंने कहा कि इसमें अंतर है। खान ने कहा कि इंदिरा गांधी के दिनों के दौरान करिश्मा महत्वपूर्ण इसलिए था क्योंकि तब बहुत से मतदाता निरक्षर थे और अब ऐसा नहीं है। सोशल मीडिया और दूसरे मीडिया साधनों का शुक्रिया अदा करते हुए उन्होंने कहा कि अब लोग करिश्मा ही नहीं बल्कि अपने अधिकारों की भी मांग कर रहे हैं।

'राहुल गांधी ने नहीं किया प्रदर्शन'

'राहुल गांधी ने नहीं किया प्रदर्शन'

आबिद रसूल खान ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि प्रियंका गांधी व्यक्तिगत रूप से वह तब तक कोई प्रभाव नहीं डालेगी जब तक कि कांग्रेस खुद को नहीं देखती। जो कुछ भी गलत हो रहा है, उन सभी समस्याओं को उनके नेतृत्व में सही तरीके से सेट करें और पार्टी का आधार तैयार करें। अगर वो पांच सालों तक कड़ी मेहनत करती, निश्चित रुप से इसका फायदा होता। लेकिन चुनावों से थोड़े समय पहले ये असर नहीं करेगा। कांग्रेस के भीतर कुछ लोगों की ये धारणा है कि वो अपने भाई और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को पीछे छोड़ देंगी, इस पर उन्होंन कहा कि कोई भी जो परफोमेंस नहीं करेगा वो पीछे छूट जाएगा। राहुल गांधी पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेता के तौर पर उन्होंने प्रदर्शन नहीं किया है और वो अभी स्वीकार्य नहीं हैं। वो निर्णय लेते हुए नहीं दिखते हैं। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में जीत नहीं मिलती अगर कोई तीसरा विकल्प होता।

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