सरकार बनाने के लिए राहुल गांधी का समर्थन चाहते थे केजरीवाल

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य ने आम आदमी पार्टी के भीतर अरविंद केजरीवाल की पोल खोल करके रख दी है। यही नहीं स्वराज और आंतरिक लोकतंत्र के नाम पर खड़ी इस पार्टी में अरविंद केजरीवाल की तानाशाही चेहरे को सबके सामने लाकर रख दिया है।

prashant bhushan

आपराधिक रास्तों को भी अपनाने को तैयार थे केजरीवाल

प्रशांत भूषण ने एक पत्र लिखकर पार्टी के भीतर की बवाल की परतें खोली। उन्होंने लिखा है कि चुनाव जीतने के लिए केजरीवाल आपराधिक रास्तों से लेकर हर तरह के अनैतिक रास्तो को अपनाने के लिए तैयार थे।

प्रशांत भूषण ने लिखा है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद केजरीवाल का मानना था कि पार्टी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी अगर दिल्ली में हमने सरकार नहीं बनायी। इसी वहज से केजरीवाल ने तुरंत कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनाने की कोशिश शुरु कर दी।

सिद्धांतो के साथ किया समझौता, पार्टी के तानाशा हैं केजरीवाल

प्रशांत भूषण ने लिखा है कि पृथ्वी रेड्डी, मयंक गांधी और अंजली दमानिया सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने केजरीवाल के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह पार्टी के मूलभूत सिद्धांतों से समझौता है और इसस पार्टी को बड़ा नुकसान होगा। प्रशांत भूषण ने लिखा है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी से लेकर राष्ट्रीय परिषद ने बहुमत के साथ केजरीवाल के इस फैसले का विरोध किया लेकिन केजरीवाल ने कहा कि वह पार्टी के संयोजक हैं और ऐसे में उनका फैसला अंतिम होगा।

राहुल गांधी से भी करना चाहते थे संपर्क

यही नहीं केजरीवाल ने गुप्त तरीके से दिल्ली के एलजी को एक पत्र लिखकर दिल्ली विधानसभा को भंग नहीं किये जाने की अपील की। यही नहीं केजरीवाल ने नंबर के माह में निखिल डे से फोन करके कहा कि आप राहुल गांधी को इस बात के लिए मनाने की कोशिश करिये कि वह दिल्ली में सरकार बनाने के लिए आप को समर्थन दें दे। लेकिन निखिल ने इस मुद्दे पर राहुल से बात करने से मना कर दिया।

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