खानदानी गरीबों को बीमारी का खतरा कम! Study ने बढ़ाई अमीरों की चिंता
ऐसा माना जाता है कि जो लोग गरीब होते हैं वो आर्थिक रूप से और मानसिक रूप से कई समस्याओं का सामना करते हैं। गरीबों को कई तरह की बीमारियों से जूझना पड़ता है। वहीं अमीर लोग जिनके पास काफी पैसा होता है वह बेहतर जीवन व्यतीत करते हैं।
कुछ वर्ष पहले इरफान खान की एक फिल्म आई थी हिंदी मीडियम, जिसमे एक्टर दीपक डोबरियाल और इरफान के बीच यह प्रतिस्पर्धा होती है कि कौन ज्यादा गरीब है।

फिल्म में एक डॉयलॉग काफी हिट हुआ था, हम खानदानी गरीब हैं। हालांकि यह डॉयलॉग गरीबी पर तंज है, लेकिन हाल ही में जो अध्ययन सामने आया है वह, खानदानी गरीबों के लिए अच्छी खबर लेकर आया है।
अमीरों को कैंसर का खतरा
ताजा अध्ययन के अनुसार अमीर लोगों में कैंसर होने की संभावना अधिक है। ऐसे लोग जो सामाजिक और आर्थिक स्तर पर बेहतर होते हैं, उन्हें किसी ना किसी तरीके का कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। वहीं जो खानदानी गरीब यानि आनुवंशिक रूप से गरीब हैं उन्हें कई तरह के कैंसर और बीमारियों का खतरा कम होता है।
फिनलैंड यूनिवर्सिटी की स्टडी
फिनलैंड में यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसेंकी ने एक स्टडी की है जिसमे यह दावा किया गया है। इस स्टडी में सामाजिक-आर्थिक श्रेणी के अलग-अलग लोगों में बीमारी का आंकलन किया गया है।
रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अमीर लोगों में कैंसर का खतरा आनुवंशिक रूप से गरीबों में अधिक होता है। अध्ययन के अनुसार अमीर लोगों में स्तन, प्रोस्टेट और अन्य प्रकार के कैंसर का खतरा ज्यादा होता है।
कई बीमारियों के प्रति संवेदनशील
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो कम संपन्न लोग आनुवंशिक रूप से मधुमेह, गठिया, अवसाद, शराब पीने की वजह से फेफड़ों में कैंसर जैसी बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
बता दें कि उच्च आय वाले देशों में आम लोगों में पाई जाने वाली 19 बीमारियों को लेकर अपने आप में यह पहला अध्ययन है। यह अध्ययन फिनलैंड के 2.80 लाख लोगों पर किया गया, जिनकी आयु 35 वर्ष से 80 वर्ष के बीच थी।
पॉलीजेनिक जोखिम स्कोर अहम
अध्ययन में कहा गया है कि पॉलीजेनिक जोखिम स्कोर को स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल से जोड़ा जाए तो कई रोगों का पता लगने में मदद मिलती है। यूनिवर्सिटी में मॉलीक्युलर मेडिसिन में कार्यरत डॉक्टर हेगेनबीक ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि अध्ययन के शुरुआती नतीजे पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर को पता लगाने में मदद कर सकते हैं।
बता दें कि पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर का इस्तेमाल आनुवंशिकी के आधार पर बीमारी के जोखिम को मापने में किया जाता है। इस स्कोर का इस्तेमाल कुछ बीमारियों की स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल में भी किया जाता है।
बीमारियों का पता करने में सहूलियत
अपने आप में यह पहला अध्ययन है जिसके जरिए 19 बीमारियों के बीच कॉमन लिंक तलाशने की कोशिश की गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए आनुवंशिक आंकड़ों का विश्लेषण अहम होता है।
इसके आधार पर बीमारी की स्क्रीनिंग करने में मदद मिलती है। साथ ही जानलेवा बीमारियों से लोगों को बचाने में सहूलियत होती है। हालांकि इसको लेकर अभी और शोध करने की जरूरत है।
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