दिवाली के पटाखों ने घोला दिल्ली की हवा में जहर, रहें सावधान

दिवाली पर पर्यावरण को बचाने की लाख अपील के बावजूद कोई फर्क नजर नहीं आया। लोगों ने जमकर पटाखे जलाए और हवा में घुले पटाखे के धुएं ने प्रदूषण को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया।

नई दिल्ली। दिवाली पर पर्यावरण को बचाने की लाख अपील के बावजूद कोई फर्क नजर नहीं आया। लोगों ने जमकर पटाखे जलाए और हवा में घुले पटाखे के धुएं ने प्रदूषण को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया।

pollution

पटाखों से हुए प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर दिल्ली-एनसीआर में देखने को मिला। दिवाली की अगली सुबह जब लोग सड़कों पर निकले तो मौसम में धुंध छाई हुई थी।

बताया जा रहा है कि दिल्ली में इस बार प्रदूषण की मात्रा पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा दर्ज की गई है।

डॉक्टरों ने लोगों को कुछ दिन मुंह पर मास्क पहनने की सलाह दी है।

हवा की गुणवत्ता और मौसम का आंकलन करने वाली सरकारी संस्था SAFAR के मुताबिक दिवाली पर आतिशबाजी के चलते दिल्ली में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का स्तर 507 तक पहुंच गया, जबकि पीएम 10 का स्तर 511 तक रहा। यह बेहद खतरनाक स्तर है।

सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से हो रही फायरिंग में देश के जवानों के शहीद होने के कारण इस बार माना जा रहा था कि लोग पटाखे कम जलाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

लोगों ने तमाम अपीलों को दरकिनार करते हुए जमकर आतिशबाजी की। SAFAR मुताबिक नोएडा में पीएम 2.5 का स्तर 450 रहा, जबकि पीएम 10 का स्तर 493 रहा।

क्या है पीएम 2.5 और पीएम 10

हवा की गुणवत्ता मापने के लिए पर्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 और पीएम 10 का प्रयोग किया जाता है। अगर हवा में पीएम का स्तर 400 से ज्यादा पाया जाता है तो मानव जीवन के लिए यह बेहद खतरनाक साबित होता है।

गौरतलब है कि दिवाली से एक हफ्ते पहले ही प्रदूषण मापने वाली संस्थाएं सीपीसीबी (CPCB) और सफर (SAFAR) ने हवा में प्रदूषण के स्तर को मापा तो यह 318 था। 300 से ऊपर की एयर क्वालिटी बेहद खराब मानी जाती है।

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