CAA के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर उबर में कर रहा था बात, ड्राइवर पुलिस स्टेशन लेकर पहुंच गया
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ कैब के भीतर बात करना एक कवि को भारी पड़ा है। दरअसल जयपुर के एक कवि बप्पादित्य सरकार का आरोप है कि उबर ड्राइवर उन्हे लेकर पुलिस स्टेशन पहुंच गया, जहां पर पुलिस ने उनसे दो घंटे तक पूछताछ की। जानकारी के अनुसार उबर ड्राइवर का दावा है कि बप्पादित्य गाड़ी में फोन पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर बात कर रहे थे, इस दौरान ड्राइवर ने उनकी बात को रिकॉर्ड किया और बप्पादित्य को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंच गया।

नहीं पाया गया संज्ञेय अपराध
इस खबर की पुष्टि करते हुए पुलिस का कहना है कि दोनों ही ड्राइवर और यात्री को पुलिस स्टेशन से जाने के लिए कहा गया क्योंकि उन्होंने किसी भी तरह का संज्ञेय अपराध नहीं किया था। वहीं उबर के प्रवक्ता का कहना है कि वह इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं। बता दें कि सरकार 3 फरवरी से काला घोड़ा उत्सव के लिए मुबई में हैं। उन्होंने बताया कि जूहू सिल्वर बीच से कुर्ला जाने के लिए उन्होंने बुधवार रात 11 बजे उबर कैब बुक की थी। कैब में बैठने के बाद मैंने जयपुर के अपने एक दोस्त को फोन किया और उससे बात करने लगा था।

अचानक पुलिस स्टेशन लेकर पहुंचा
सरकार ने बताया कि वह फोन पर अलग-अलग शहर में चल रहे प्रदर्शन को लेकर बात कर रहे थे, शाहीन बाग में जो कल हुआ था उसको लेकर मैं अपने दोस्त से बात कर रहा था कि आखिर कैसे लोग लाल सलाम को लेकर असहज हैं और कैसे हम जयपुर के प्रदर्शन को और प्रभावी बना सकते हैं। लेकिन 20 मिनट तक बात करने के बाद मैंने देखा कि कैब का ड्राइवर रोहित सिंह गाड़ी को सांताक्रूज पुलिस स्टेशन लेकर पहुंच गया है और उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं एटीएम से पैसे निकाल सकता हूं। लेकिन कुछ देर के बाद वह दो कॉस्टेबल के साथ वापस लौटा। तब मुझे एहसास हुआ कि कैब ड्राइवर मुझे पुलिस स्टेशन लेकर आया है।

ड्राइवर ने लगाए गंभीर आरोप
जानकारी के अनुसार कैब के ड्राइवर रोहित ने पुलिस को बताया कि उसने सरकार की फोन पर बातचीत को रिकॉर्ड किया है। रंजीत ने बताया कि ये देश जलाने की बात कर रहा है, बोल रहा है मैं कम्युनिस्ट हूं, हम देश को शाहीन बाग बनाएंगे, मेरे पास पूरी रिकॉर्डिंग है। सरकार ने बताया कि मैंने पुलिस से कहा कि वह इस ऑडियो को सुने और अगर मैंने 'हम देश जला देंगे' या इस तरह का कुछ भी कहा है जो देश के खिलाफ है तो मुझे गिरफ्तार किया जाए।

पुलिस ने पूछे अटपटे सवाल
सरकार ने बताया कि जब मैंने रंजीत से पूछा कि तुम मुझे पुलिस स्टेशन लेकर क्यों आए तो उसने बताया कि तुम देश बर्बाद करोगे और हम देखते रहेंगे, मैं कहीं और ले जा सकता था तुझे, शुक्र मनाओ पुलिस स्टेशन लाया हूं। सरकार ने कहा कि यह मेरे लिए डरावना पल था। अगले ढाई घंटे तक पुलिस ने मुझसे पूछताछ की। पुलिस ने मुझसे पूछा कि मैं क्या पढ़ता हूं, कैसी कविताएं लिखता हूं, कम्युनिज्म के बारे में मेरा क्या विचार है, सीएए और मुंबई बाग, शाहीन बाग के बारे में मैं क्या सोचता हूं। यही नहीं पुलिस ने मुझसे पूछा कि प्रदर्शन में शामिल होकर मैं पैसे कैसे कमाता हूं। बता दें कि सरकार पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से मास कम्युनिकेशन के छात्र हैं और वह कविताएं लिखते हैं, साथ ही फ्रीलांसर के तौर पर भी काम करते हैं।

पुलिस ने आरोपों से किया इनकार
वहीं मुंबई पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि सरकार से इस तरह का कोई भी सवाल पूछा गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि ड्राइवर और यात्री सांताक्रूज पुलिस स्टेशन आए थे, उनसे साधारण सवाल पूछे गए, जैसे कि वह कहां जा रहे थे, वगैरह। ड्राइवर के दावे की जांच के बाद किसी भी तरह का संज्ञेय अपराध नहीं पाया गया, लिहाजा दोनों को जाने के लिए कहा गया। जबकि सरकार का कहना है कि उन्हें रात को 1.30 बजे जाने दिया गया, जबकि रंजीत उनसे कुछ देर पहले चला गया था। यह घटना बताती है कि हम फांसीवादी राज्य में रह रहे हैं। पुलिस शांत थी लेकिन यह हतोत्साहित करने वाली घटना है। मैं अधिक से अधिक प्रदर्शन का हिस्सा बनना चाहता था क्योंकि सीएए गरीबों के खिलाफ कानून है।












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