आप 2 लाख वोट से जीत जाएं लेकिन..........पीएम मोदी ने BJP सांसदों को ऐसे चेताया

नई दिल्ली- संसद की बैठकों और बहस से नदारद रहने वाले बीजेपी सांसदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों-इशारों में सख्त चेतावनी दी है। पीएम मोदी ने पार्टी सांसदों को साफ आगाह किया है कि संसद और संसदीय समितियों में उनकी हाजिरी पर नजर रखी जा रही है। प्रधानमंत्री ने ये भावना मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी की संसदीय दल की बैठक में जाहिर की।

सदन से गायब रहने वाले सांसदों को चेतावनी

सदन से गायब रहने वाले सांसदों को चेतावनी

मंगलवार को हुई बीजेपी पार्लियामेंट्री पार्टी की मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी सांसदों को संसद से गायब रहने पर कई दिलचस्प, लेकिन बेहद संजीदा उदाहरणों के माध्यम से आगे ऐसा नहीं करने की हिदायत दी। दरअसल, बजट सत्र के पहले ही कुछ दिनों में जिस तरह से बीजेपी सांसद सदन से गायब हुए हैं, उसने पीएम मोदी को काफी नाखुश किया है। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री ने पार्टी सांसदों से पूछा कि, "अगर अमित शाह आपकी रैली में आए हों और आखिरी समय में वो वहां नहीं दिख रहे हों, तो आप कैसा महसूस करेंगे।" पीएम मोदी ने ये सवाल सांसदों की ओर घूमकर अपने अंदाज में कई बार दोहराया। जाहिर है कि प्रधानमंत्री का ये सवाल सुनकर कई सांसद सकते में आ गए होंगे।

आप 2 लाख वोट से जीत जाएं और.......

आप 2 लाख वोट से जीत जाएं और.......

इससे कुछ देर पहले ही संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी सांसदों से समय के पाबंद होने की गुजारिश की थी और कहा था कि जब कानून मंत्री ने ट्रिपल तलाक बिल सदन में पेश किया तो बहुत सारे भाजपा सांसद गायब थे। इनकी बातों से प्रधानमंत्री मोदी की नाराजगी की वजह जाहिर होती है। अपनी स्पीच के दौरान प्रधानमंत्री ने पार्टी के सांसदों से एक और सवाल पूछकर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। पीएम मोदी ने सांसदों से पूछा, "आपको कैसा लगेगा कि आप 2 लाख वोटों से तो जीत जाएं और आपको पता चले कि आपके सबसे अच्छे मित्र ने आपको वोट ही नहीं दिया था?" इसपर कुछ सांसदों ने सहमति जताई कि उन्हें बहुत बुरा लगेगा। तब प्रधानमंत्री ने फिर कहा, "जब संसद में उपस्थित सांसदों की संख्या देखता हूं, तो मुझे भी ऐसा ही लगता है।"

अटेंडेंस पर क्यों है पीएम का जोर

अटेंडेंस पर क्यों है पीएम का जोर

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री को लगता है कि अगर सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में ही पार्टी सांसद इतने ढीले पड़ जाएंगे, तो उन्हें आगे लाइन पर लाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इसलिए वे अपने सांसदों को संसदीय कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए अभी से बार-बार याद दिला रहे हैं। खासकर जो सांसद पहली बार लोकसभा पहुंचे हैं, उनको लेकर चिंता ज्यादा है कि कहीं अभी से उनकी आदत न बिगड़ जाए। 17वीं लोकसभा के 542 सांसदों में से 268 पहली बार चुने गए हैं। वैसे 16वीं लोकसभा में भी ऐसे कई मौके आए थे, जब सदन से गायब रहने वाले पार्टी सांसदों की मोदी ने जमकर क्लास लगाई थी। तब ऐसे भी मौके आए थे, जब बीजेपी के पास बहुमत होने के बावजूद सदन की कार्यवाही कोरम की कमी के चलते टालनी पड़ गई थी। एक बार प्रधानमंत्री ने भाजपा सांसदों से यहां तक कहा था कि टिकट देने में भी सदन में सांसदों के अटेंडेंस का ख्याल रखा जाएगा। मंगलवार को उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद के लिए सांसदों के चुनाव में उन्होंने इस पारामीटर का भी ध्यान रखा है। यानी एक तरह से उन्होंने भविष्य में होने वाले किसी संभावित विस्तार के लिए भी सांसदों को एक टास्क दे दिया है।

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