'गुजरात मॉडल की अलग पहचान, UN अवॉर्ड भी जीता', SWAGAT के 20 साल पूरे होने पर बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने गुरुवार को गुजरात में SWAGAT पहल के 20 वर्ष पूरे होने पर कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया। पीएम ने इस मौके पर पीएम ने कहा कि 'स्वागत' के जरिए सैकड़ों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 'SWAGAT' पहल के 20 वर्ष पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया। पीएम ने 'स्वागत' पहल को लेकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की भरोसा है कि अपने 20 वर्षों में ये पहल अपने अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल हुई है। इसके साथ ही उन्होंने अपने संबोधन में गुजरात के विकास मॉडल का जिक्र किया। उन्होंने कि देश के राज्यों में ये सर्वेश्रेष्ठ विकास मॉडल है, जिसे संयुक्त राष्ट्र लोक सेवा पुरस्कार भी हासिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 'SWAGAT' पहल के 20 वर्ष पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की भरोसा है कि अपने 20 वर्षों में ये पहल अपने अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सफल हुई।
'स्वागत' (SWAGAT) पहल के 20 साल पूरे होने पर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि गुजरात के शासन के मॉडल ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। पीएमम ने इसे अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संगठन की ई-पारदर्शिता और ई-जवाबदेही का एक ज्वलंत उदाहरण भी माना। उन्होंने कहा कि 'मुझे इस बात का संतोष है कि हमने जिस उद्देश्य से 'स्वागत' को शुरू किया था वो पूरी तरह सफल रहा। इसके जरिए लोग ना सिर्फ अपनी समस्या का हल कर पा रहे हैं बल्कि अपने साथ-साथ सैकड़ों परिवारों की बात भी उठा रहे हैं।'
2003 में 'स्वागत' की शुरुआत
दरअलस, गुजरात में 2003 में वहां के मुख्यमंत्री रहने के दौरान नरेंद्र मोदी ने 'SWAGAT' की शुरुआत की थी। जिसके अब 20 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर पीएम ने कहा कि 'स्वागत' पिछले 20 वर्षों से गुजरात के करोड़ों नागरिकों की सेवा में समर्पित रहा है। पीएम ने कहा, "मुझे अभी-अभी पुराने अनुभवों को सुनने का, पुरानी यादें ताजा करने का मौका मिला। स्वागत' की सफलता में कितने ही लोगों का अनवरत श्रम लगा है, कितने ही लोगों की निष्ठा लगी है। मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद देता हूं।"
'मैं कुर्सी का गुलाम नहीं बनूंगा'
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'वर्ष 2003 में मैंने जब 'स्वागत' की शुरुआत की थी तब मुझे गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में ज्यादा समय नहीं हुआ था। कुर्सी मिलने के बाद मैंने मन में ही सोचा था कि मैं वैसा ही रहूंगा जैसा लोगों ने मुझे बनाया है। मैं कुर्सी का गुलाम नहीं बनूंगा और जनता-जनार्दन के बीच रहूंगा।' पीएम ने आगे कहा कि भारत में दशकों से ये मान्यता रही थी कि, कोई भी सरकार आए उसे बनी-बनाई लकीरों पर ही चलते रहना होता है। लेकिन, 'स्वागत' के माध्यम से गुजरात ने इस सोच को भी बदलने का काम किया है। हमने बताया कि governance सिर्फ नियम, कानून और लकीरों तक सीमित नहीं होती है।












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