PM Modi Cyprus Visit 2025: 20 सालों बाद भारतीय प्रधानमंत्री की साइप्रस यात्रा, क्या हैं इसके रणनीतिक मायने?
PM Modi Cyprus Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जून 2025 को साइप्रस की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे, जो उनकी तीन देशों की विदेश यात्रा का पहला चरण है। इस यात्रा के बाद प्रधानमंत्री कनाडा में G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और फिर क्रोएशिया का दौरा करेंगे। गौरतलब है कि यह पिछले दो दशकों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की साइप्रस की पहली यात्रा है।
साइप्रस पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का भारतीय समुदाय ने गर्मजोशी से स्वागत किया। लिमासोल स्थित एक होटल में उन्होंने प्रवासी भारतीयों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित किया।

प्रधानमंत्री मोदी साइप्रस की राजधानी निकोसिया में राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। साथ ही, लिमासोल में स्थानीय व अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेताओं को भी संबोधित करेंगे।
नई दिल्ली से रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने अपनी यात्रा को लेकर कहा, "साइप्रस एक करीबी मित्र है और भूमध्यसागर क्षेत्र तथा यूरोपीय संघ में भारत का एक अहम साझेदार। यह यात्रा हमारे ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत बनाने, व्यापार, निवेश, सुरक्षा, तकनीक और लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ाने का एक सशक्त अवसर है।"
क्या है इस यात्रा के रणनीतिक मायने? What is its strategic significance?
यह यात्रा उस वक्त हो रही है जब तुर्की ने पाकिस्तान के साथ अपने सामरिक और राजनीतिक संबंधों को और गहरा किया है। तुर्की ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया है। इसके अलावा, हाल ही में भारत पर हुए ड्रोन हमलों में जिन ड्रोन का इस्तेमाल हुआ, वे तुर्की मूल के पाए गए - जिससे भारत में गहरा असंतोष उत्पन्न हुआ।
ऐसे में पीएम मोदी की साइप्रस यात्रा को तुर्की को परोक्ष रूप से कूटनीतिक संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है। तुर्की और साइप्रस के बीच वर्षों पुराना टकराव रहा है - 1974 में तुर्की द्वारा साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर कब्ज़े के बाद से दोनों देशों के संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। आज तक उत्तरी साइप्रस को केवल तुर्की ही एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देता है।
साइप्रस भारत का 'भरोसेमंद' मित्र
साइप्रस लंबे समय से भारत का एक भरोसेमंद सहयोगी रहा है। उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है और भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते में भी भारत के पक्ष में मतदान किया था।
इसके अलावा, साइप्रस अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत के साथ खड़ा रहा है। जिससे भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में मदद मिली है।
IMEC में साइप्रस की अहम भूमिका
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) एक बहुपक्षीय बुनियादी ढांचा परियोजना है, जो भारत को यूरोप से जोड़ने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है। इस कॉरिडोर में साइप्रस की भौगोलिक स्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। यह परियोजना भारत और यूरोप के बीच व्यापार और संपर्क को भूमध्यसागर के रास्ते गति देने वाली है।
इसके अलावा, साल 2026 में साइप्रस यूरोपीय संघ की परिषद की अध्यक्षता करेगा, जो भारत के लिए यूरोप के साथ अपने व्यापार और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगा।
पीएम मोदी की G7 यात्रा
साइप्रस यात्रा के बाद पीएम मोदी कनाडा के कनानास्किस जाएंगे, जहां वह प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के निमंत्रण पर G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, उभरती अर्थव्यवस्थाओं और आतंकवाद जैसे विषयों पर चर्चा होगी। G7 के बाद प्रधानमंत्री क्रोएशिया की यात्रा करेंगे, जहां वह राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच और प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच से मुलाकात कर द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करेंगे।
भारत की वैश्विक भूमिका का सशक्त संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस यात्रा प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों रूपों में बेहद महत्वपूर्ण है। यह केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का माध्यम नहीं है बल्कि भारत की विदेश नीति में एक स्पष्ट संदेश भी है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए अब अधिक स्पष्ट, सक्रिय और प्रभावशाली कूटनीति अपनाएगा।
साइप्रस जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देशों के साथ मजबूत रिश्ते बनाकर भारत न केवल तुर्की-पाकिस्तान धुरी का संतुलन बना रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को भी मज़बूती से स्थापित कर रहा है।












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