PM Gati Shakti Yojana: चार साल में पीएम गति शक्ति ने बदली भारत की दिशा, कम लागत में तेज कनेक्टिविटी-बेहतर सेवा
PM Gati Shakti Yojana: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (NMP) के चार साल हो गए हैं। इस योजना ने चार साल में भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया है। कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्री पीयूष गोयल ने इस योजना की चार साल की उपलब्धियों को सराहते हुए कहा कि यह योजना भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार बन चुकी है।
पीएम गति शक्ति ने मंत्रालयों, राज्यों और विभिन्न सेक्टर्स को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़कर प्रोजेक्ट्स को तेज़ी, तालमेल और स्थिरता के साथ पूरा करने में मदद की है। इसके परिणामस्वरूप न केवल लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई है, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता और डिलीवरी भी बेहतर हुई है। चार साल में इस योजना ने भारत के विकास और आर्थिक मजबूती के रास्ते को नया आकार दिया है।

चार साल में दिखा असर
पीएम गति शक्ति योजना 13 अक्टूबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च की गई थी। मंत्री गोयल ने कहा कि इस योजना ने लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और सेवाओं की बेहतर डिलीवरी में मदद की है। उन्होंने X पर लिखा, "PM Modi की यह गेम-चेंजिंग पहल, जो 'Whole-of-Government' दृष्टिकोण के साथ भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग को बदल चुकी है, चार साल पूरे कर चुकी है।"
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कैसे काम करती है योजना?
यह योजना मंत्रालयों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सेक्टरों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ती है। इसका उद्देश्य प्रोजेक्ट्स की तेजी, तालमेल और स्थिरता सुनिश्चित करना है। इसका असर फास्ट प्रोजेक्ट कंप्लीशन, कम लॉजिस्टिक्स लागत और देशभर में सेवाओं की बेहतर डिलीवरी में दिखाई दे रहा है।
कनेक्टिविटी और आर्थिक वृद्धि
गोयल ने कहा कि "बिना बाधा की कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी को बढ़ाते हुए, पीएम गति शक्ति हमारे विकास की राह में एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी है।" वर्तमान में 58 मंत्रालय और विभाग, सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस योजना में शामिल हैं। सभी की डेटा लेयर्स को जियोस्पेशल प्लानिंग पोर्टल से जोड़ा गया है।
लॉजिस्टिक्स लागत में कमी
योजना की वजह से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी की नींव पड़ी और आर्थिक विकास में तेजी आई। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) के अनुसार, भारत में लॉजिस्टिक्स लागत अब जीडीपी के 7.8-8.9 प्रतिशत तक घट गई है, जबकि पहले यह 13-14 प्रतिशत थी।
हालांकि, 'Gati Se Pragati' रिपोर्ट के अनुसार, यह अभी भी विकसित देशों के 6-8 प्रतिशत के स्तर से थोड़ा अधिक है। विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत की रैंक 44वें से बढ़कर 38वें स्थान पर आ गई है। यह सकारात्मक संकेत है, लेकिन आगे और सुधार की आवश्यकता है।
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