Pawan Khera Bail: ‘क्या मैं अपराधी हूं?’, सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, बेल के लिए असम जाना होगा,पूरा मामला

Pawan Khera Bail: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका लगा है। शुक्रवार (17 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक और करारा झटका देते हुए उनकी 'ट्रांजिट अग्रिम जमानत' (Transit Anticipatory Bail) की अवधि बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब खेड़ा को बेल के लिए असम के गुवाहाटी का रुख करना ही होगा।

पवन खेड़ा चाहते थे कि उन्हें मंगलवार तक राहत दी जाए ताकि वे असम की अदालत में अपनी याचिका दाखिल कर सकें, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि अब उन्हें सीधे असम की सक्षम अदालत का रुख करना होगा। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने यह स्पष्ट कर दिया कि ट्रांजिट बेल बढ़ाने का कोई आधार नहीं बनता और स्थानीय अदालत ही इस मामले में फैसला करेगी।

Pawan Khera Bail

कोर्ट में क्या हुआ? सिंघवी की दलीलें और जज का कड़ा रुख

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच के सामने पवन खेड़ा की ओर से दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। सिंघवी ने दलील दी कि तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत आज खत्म हो रही है और असम में अदालतें फिलहाल बंद हैं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि खेड़ा को सोमवार को असम पहुंचने का समय दिया जाए और जमानत को मंगलवार तक बढ़ा दिया जाए।

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बहस के दौरान माहौल उस वक्त गरमा गया जब सिंघवी ने अपनी दलील को भावनात्मक मोड़ देते हुए कहा, "एक व्यक्ति सिर्फ अग्रिम जमानत मांग रहा है और प्रशासन उनके पीछे ऐसे पड़ा है जैसे वो कोई अपराधी हो। गुवाहाटी में ई-फाइलिंग की सुविधा भी नहीं है। क्या पवन खेड़ा कोई बड़ा अपराधी या आतंकवादी हैं, जिन्हें मंगलवार तक की सुरक्षा नहीं मिल सकती?" हालांकि, बेंच ने इन दलीलों को दरकिनार करते हुए स्पष्ट किया कि खेड़ा को अब असम की संबंधित अदालत में ही अपनी अर्जी लगानी चाहिए।

असम से शुरू हुआ पूरा विवाद: क्या है मामला?

यह पूरा कानूनी बखेड़ा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर (FIR) से जुड़ा है। पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा का दावा था कि रिनिकी भुइयां के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में ऐसी बेनामी संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है।

इन आरोपों से भड़कीं रिनिकी भुइयां ने खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद असम पुलिस ने सक्रियता दिखाई और पूछताछ के लिए खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर भी दस्तक दी थी।

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सुप्रीम कोर्ट की नसीहत और आगे का रास्ता

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गुवाहाटी भेजने के साथ ही यह भी साफ कर दिया कि निचली अदालत इस केस के गुणों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर स्वतंत्र फैसला लेगी। कोर्ट ने कहा कि वह पहले की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना अपना निर्णय ले।

इससे पहले बुधवार को भी सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को झटका दिया था जब तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा उन्हें दी गई राहत पर रोक लगा दी गई थी। अब स्थिति यह है कि पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल की मियाद खत्म हो चुकी है और उन्हें किसी भी बड़ी कार्रवाई से बचने के लिए तुरंत असम हाईकोर्ट या संबंधित निचली अदालत में सरेंडर या अग्रिम जमानत की अर्जी लगानी होगी।

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