सेना का हौंसला बढ़ाने को पठानकोट के घायल जवान ने भेजा संदेश

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बेंगलुरू। पीओके में सर्जीकल स्ट्राइक के जरिए आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने वाले जांबाजों को बेहद खास संदेश भेजा गया है। पठानकोट आतंकी हमले के घायल जवान श्रीरामूलू ने ये संदेश भेजा है।

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सर्जिकल स्ट्राइक के जांबाजों को घायल जवान ने भेजा संदेश

"जब मैंने सुना कि उरी में हुए आतंकी हमले में 17 जवान (ये आंकड़ा बढ़कर 19 हो गया है) शहीद हुए हैं, मुझे लगा कि मैं अपने बिस्तर से उठकर दौड़ने लग जाऊं। आज मैं बहुत खुश हूं कि भारत ने पाकिस्तान को उन्हीं के अंदाज में जवाब देना शुरू कर दिया है।"

पहली बार नहीं 2013 में भी सेना ने की थी सर्जिकल स्ट्राइक!

"मैंने सुना कि भारतीय जवानों ने एलओसी के उस पार मौजूद आतंकी कैम्प को ध्वस्त कर दिया। मैं इस कार्रवाई से बहुत खुश हूं, लेकिन मुझे दुख इस बात का है कि मैं वहां नहीं था।"

बैंगलोर मिरर में छपी खबर के मुताबिक ये बातें 36 वर्षीय कनागला श्रीरामूलू ने कहा है। वो भारतीय सेना के जवान हैं जो जनवरी में पठानकोट में हुए आतंकी हमले में घायल हो गए थे।

जनवरी में हुआ था पठानकोट हमला

श्रीरामूलू के भाई संगम नायडू ने बताया कि जब उन्होंने टीवी चैनल्स पर उरी हमले की वीडियो फुटेज और तस्वीरें देखी तो हिल गए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बदमाश देश है।

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कनागला, भारतीय सेना के उन 150 जवानों की टीम का हिस्सा थे जिन पर पठानकोट हमले में शामिल आतंकियों को निशाना बनाकर उन्हें पठानकोट एयरबेस से बाहर निकालने का दारोमदार था। कार्रवाई के दौरान ग्रेनेड धमाके में गंभीर रुप से घायल हो गए थे।

रामूलू बम निरोधक जानकार थे, जो ग्रेनेड धमाके में घायल हो गए। उनके सिर और दिमाग में ग्रेनेड में शामिल विस्फोटकों के करीब 50 टुकड़े घुस गए। इससे उनके शरीर का दायां हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया।

माता-पिता से मिलने गांव पहुंचे हैं घायल जवान श्रीरामूलू

श्रीरामूलू के भाई कनागला संगम नायडू ने बताया कि वह खुद से न तो खा सकते हैं और न ही टहल सकते हैं। उनकी दाहिनी आंख खराब हो गई है और वह शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस से पीड़ित हैं।

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श्रीरामूलू के भाई कनागला संगम नायडू ने कहा कि वो बिना सहायक के एक मिनट भी नहीं रह सकते हैं। दिल्ली आरआर अस्पतला में उनका इलाज चल रहा है।

रामूलू को अस्पताल से एक हफ्ते की छुट्टी दी गई है जिससे वह अपने बुजुर्ग माता-पिता से मिल सकें। इससे पहले परिवार ने उनके माता-पिता को इलाज के दौरान बेटे को देखने के लिए दिल्ली नहीं लाए थे।

रामूलू अपने गांव वोन अग्रहरम पहुंच चुके हैं। ये गांव हैदराबाद से 800 किमी. दूर श्रीकाकुलम जिले के वंगारा ब्लॉक है। बता दें कि रामूलू 10 दिनों तक कोमा में रहे और 9 महीने से अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

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English summary
Pathankot braveheart message for Surgical strikes across LoC heroes.
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