IAF ने 1971 की जंग में पठानकोट एयरबेस से पाक पर किये थे हमले
पठानकोट। जिस एयरबेस पर आतंकवादियों ने तड़के हमला बोला, पठानकोट का वह एयरफोर्स स्टेशन हमेशा से पाकिस्तान को खटकता रहा है। इसका एक कारण 1971 की जंग की वो यादें भी हैं, जिनमें इसी एयरबेस से भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को छठी का दूध याद दिला दिया था। और तो और पठानकोट के इस स्टेशन के बारे में जानकर आपको गर्व महसूस होगा।
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5 दिसंबर 1971 को भारतीय वायुसेना ने सुबह 4 बजे इसी एयरफोर्स स्टेशन से ही उड़ान भरी थी। उस वक्त सरहद पर जंग छिड़ी हुई थी और पाकिस्तानी फौजें तेजी से आगे बढ़ रही थीं। सुबह तड़के जंग पर निकले चार विमानों ने पाकिस्तानी फौज पर बम गिराये और साथ ही साथ वाल्टन एयरफील्ड पर एक पाकिस्तानी रडार को नष्ट कर दिया।
उस दिन वायुसेना ने लाहौर सेक्टर तक पाकिस्तानी सेना को परेशान करके रख दिया था। एक मिशन पर स्क्वाडरन लीडर साहिन का विमान आसमान में क्षतिग्रस्त हो गया था, तो उन्होंने बहुत सूझ-बूझ के साथ पठानकोट में लैंडिंग की। पाकिस्तानी फौज ने भारत के कुछ लड़ाकू विमान उड़ा दिये, जिसके बाद इसी पठानकोट से वायुसेना के मात्र 13 पायलटों ने जंग में वापसी की और एक भी हानि के बगैर दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया। खास बात यह है कि उस वक्त इन 13 पायलटों के पास मात्र 11 विमान बचे थे।
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6 दिसंबर से भारतीय वायुसेना ने मिग 21 से हमले तेज कर दिये। जिनमें रिसालवाला का युद्ध सबसे विध्वंसक था। रिसालवाला के अलावा जफरवाल, ननकोट और पांच अन्य जगहों पर हमले किये गये।
14 दिसंबर को साकारगढ़ में दोनों सेनाओं के बीच संघर्ष तेज हुआ, जिसमें फलाइट लेफ्टनेंट परेरा शहीद हो हो गये। उसके ठीक दूसरे दिन 15 दिसंबर को एस-24 रॉकेट के साथ सुलेमानके पर हमले किये। उसके दूसरे ही दिन ढाका में पाकिस्तानी फौज ने हथियार डाल दिये, लेकिन तब तक भारत का एक विमान उड़ान भर चुका था। अपने मिशन में कामयाब होने के बाद जिस वक्त पठानकोट में विमान लैंडिंग कर रहा था, उस वक्त अचानक दुर्घटना ग्रस्त हो गया और फ्लाइट लेफ्टनेंट दनदास की मौत हो गई। और शाम को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने युद्धविराम का ऐलान कर दिया।












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