Parliament Special Session: 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश, महिला आरक्षण और परिसीमन पर जमकर हुआ हंगामा

Parliament Special Session: संसद के विशेष सत्र 2026 में केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक-संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक-पेश किए जाने के साथ ही देश की राजनीति में गहरा विवाद खड़ा हो गया है।

इन विधेयकों का उद्देश्य 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचा तैयार करना बताया गया है। सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा मान रहा है।

Parliament Special Session

लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया

लोकसभा में 16 अप्रैल 2026 को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को पेश करने के प्रस्‍ताव के लिए बहुमत से मंजूरी मिली। जिसमें 251 सांसदों ने समर्थन और 185 ने विरोध में मतदान किया। इस विधेयक के तहत लोकसभा की वर्तमान सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रस्ताव है, जिसमें 815 सदस्य राज्यों से और 35 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाएंगे। साथ ही, कुल 273 सीटें यानी लगभग एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है, जिसे सरकार ऐतिहासिक सुधार बता रही है।

परिसीमन विधेयक का विपक्ष ने जमकर किया विरोध

परिसीमन विधेयक पर सदन में सबसे तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि बिना 2021 की जनगणना के परिसीमन करना न्यायसंगत नहीं होगा और इससे कुछ राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार का दावा है कि यह प्रक्रिया संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है और किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा।

केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक

केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक को सरकार ने परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े व्यापक सुधार पैकेज का हिस्सा बताया है। इसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेशों की चुनावी और प्रशासनिक व्यवस्था को नए संवैधानिक बदलावों के अनुरूप बनाना है, ताकि तीनों विधेयकों को एक साथ लागू करने में कानूनी समन्वय स्थापित हो सके।

प्रियंका गांधी ने "राजनीतिक चालाकी" बताया

विपक्षी दलों ने इन विधेयकों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर राजनीतिक मंशा को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे "राजनीतिक चालाकी" बताया, जबकि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है।

आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया ने परिसीमन को सीटों के राजनीतिक पुनर्वितरण से जोड़ते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। वहीं डीएमके ने तीनों विधेयकों को "सैंडविच बिल" करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया।

PM Modi बोले महिला सशक्तिकरण के लिए ये ऐतिहासिक क्षण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन विधेयकों को "ऐतिहासिक कदम" बताते हुए कहा कि यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नई दिशा देने वाला निर्णय है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए यह एक निर्णायक क्षण है और इससे राजनीतिक भागीदारी का स्वरूप बदलेगा। उन्‍होंने समझाया इसका उद्देश्‍य महिला सशक्तिकरण को वास्तविक प्रतिनिधित्व देना। परिसीमन और आरक्षण को एक साथ लागू करना आवश्यक है। पीमएम मोदी ने कहा राजनीतिक विरोध "भ्रम" पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी दल साथ आएं तो यह निर्णय इतिहास में याद रखा जाएगा। PM Modi Speech Highlights: महिला आरक्षण बिल पर पीएम मोदी बोले- क्रेडिट नहीं, देशहित सबसे ऊपर, पढ़ें हाइलाइट्स

अमित शाह बोले- किसी राज्‍य के साथ अन्‍याय नहीं होगा

गृह मंत्री अमित शाह और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक ढांचे के भीतर होगी और किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन को लेकर "भ्रामक जानकारी" फैलाई जा रही है और सरकार इस पर स्पष्ट जवाब देगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जातिगत जनगणना कराने का निर्णय लिया गया है।

कानून मंत्री ने दिया ये आश्‍वासन

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण 2023 के प्रावधानों के तहत लागू होगा। जनगणना और परिसीमन के बाद ही सीटों का नया ढांचा प्रभावी होगा। किसी राज्य के प्रतिनिधित्व को नुकसान नहीं होगा।

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लोकसभा में 18 घंटे होगी चर्चा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इन तीनों विधेयकों पर 15 से 18 घंटे तक विस्तृत चर्चा होगी और मतदान 17 अप्रैल 2026 को शाम 4 बजे निर्धारित किया गया है। यह विशेष सत्र न केवल महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि परिसीमन और राजनीतिक संतुलन को लेकर देश में एक बड़ी बहस को भी जन्म दे रहा है, जिसका अंतिम निर्णय आगामी मतदान से तय होगा। Om Birla Rahul Gandhi Mic Joke: 'आपका ही माइक बंद होता है' संसद में ओम बिड़ला ने ली राहुल गांधी की चुटकी

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