Om Birla Rahul Gandhi Mic Joke: 'आपका ही माइक बंद होता है' संसद में ओम बिड़ला ने ली राहुल गांधी की चुटकी

Om Birla Rahul Gandhi Mic Joke: संसद के विशेष सत्र के पहले दिन जहां एक ओर महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर भारी गहमागहमी रही, वहीं दूसरी ओर सदन के भीतर हंसी-मजाक और चुटीले अंदाज के कुछ ऐसे पल भी आए जिन्होंने माहौल को थोड़ा हल्का कर दिया।

लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर एक ऐसी टिप्पणी की, जिसके बाद पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा।

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यह वाकया तब हुआ जब लोकसभा में कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल महिला आरक्षण और परिसीमन बिल के खिलाफ सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे थे।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

चर्चा के दौरान जब के.सी. वेणुगोपाल बोल रहे थे, तभी विपक्षी बेंचों की ओर से किसी ने शोर मचाया कि वेणुगोपाल का माइक काम नहीं कर रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी तुरंत हस्तक्षेप किया और अपनी मेज पर लगे माइक्रोफोन की ओर इशारा करते हुए कहा-'No Mic' (माइक नहीं चल रहा है)।

राहुल गांधी के यह कहते ही स्पीकर ओम बिड़ला ने मुस्कुराते हुए तुरंत जवाब देते हुए कहा कि-माइक चालू है, चालू है... केवल आपका ही बंद होता है, इनका (वेणुगोपाल) नहीं। स्पीकर की इस टिप्पणी पर सदन में मौजूद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जमकर मेज थपथपाई और हंसी के फुहारे छूट पड़े।

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पुराने विवाद की यादें हुईं ताजा

ओम बिड़ला का यह बयान राहुल गांधी के उन पुराने आरोपों की ओर इशारा था, जिनमें उन्होंने कई बार दावा किया है कि जब भी विपक्ष के नेता संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलते हैं, तो उनका माइक बंद (Mute) कर दिया जाता है।

गौरतलब है कि 2023 में अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान भी राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि संसद में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है और उनका माइक अक्सर बंद कर दिया जाता है। 2024 में भी इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने सदन के भीतर भारी हंगामा किया था। आज स्पीकर ने उसी 'माइक' वाले आरोप को चुटकुले में बदलकर राहुल गांधी की चुटकी ली।

संसद में तीन प्रमुख बिल पेश

हंसी मजाक के इन पलों के बीच सदन की कार्यवाही काफी तनावपूर्ण रही। सरकार ने इस विशेष सत्र में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए:

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026: महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने के लिए।

परिसीमन विधेयक, 2026: लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव।

केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026।

विपक्ष का कड़ा विरोध और परिसीमन का डर

सत्र की शुरुआत ही हंगामेदार रही। जहां संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को घेरा, वहीं अखिलेश यादव और के.सी. वेणुगोपाल ने परिसीमन के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई। खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों (तमिलनाडु और तेलंगाना) के सांसदों ने यह डर व्यक्त किया कि यदि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ और लोकसभा की सीटें 850 की गईं, तो दक्षिण भारत का राजनीतिक वजन कम हो जाएगा।

विपक्षी नेताओं ने इसे संघीय ढांचे पर मौलिक हमला करार दिया है। संसद के गलियारों में आज का दिन शोर-शराबे और तीखी बहसों के साथ-साथ स्पीकर की इस 'हाजिरजवाबी' के लिए भी याद किया जाएगा। अब देखना यह है कि क्या 18 अप्रैल तक चलने वाले इस विशेष सत्र में सरकार इन विवादास्पद बिलों को पारित करा पाती है या विपक्ष का कड़ा प्रतिरोध जारी रहेगा।

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