Parliament Session: महाकुंभ भगदड़ पर संसद में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट, स्पीकर बिरला ने लगाई सांसदों को फटकार

Parliament Session: बजट सत्र के दूसरे दिन संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों की नारेबाजी और हंगामे के कारण कार्यवाही बाधित हो गई। विपक्षी सांसदों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें महाकुंभ भगदड़ कांड प्रमुख था।

विपक्ष की लगातार नारेबाजी और हंगामें की वजह से सदन की कार्यवाही बाधित हुई। इस दौरान संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और दोनों सदनों की कार्यवाही में व्यवधान आया।

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स्पीकर ने लगाई विपक्ष को फटकार

लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने महाकुंभ भगदड़ कांड को लेकर सरकार की निंदा की। इसके अलावा, कई अन्य मुद्दों पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा। इस हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने विपक्षी सांसदों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, "भारत की जनता ने आपको सांसद इसलिए नहीं चुना कि आप टेबल तोड़ें, नारे लगाएं और सदन की कार्यवाही बाधित करें। आपको तो सदन में बहस और चर्चा के लिए चुना गया है।"

लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सांसदों से सवाल किया, "क्या भारत की जनता ने आपको सिर्फ नारेबाजी और हंगामा करने के लिए चुना है?" ओम बिड़ला का यह बयान सदन में विपक्षी सांसदों के लिए एक सीधी चुनौती था, जिनके विरोध के कारण कार्यवाही ठप हो गई थी।

महाकुंभ भगदड़ के मुद्दे पर विपक्ष का वॉकआउट

राज्यसभा में भी बजट सत्र के दूसरे दिन कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने महाकुंभ भगदड़ कांड पर सरकार के खिलाफ विरोध किया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने भगदड़ की घटना को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना की और सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया। इस विरोध के बाद, पूरा विपक्षी दल राज्यसभा से वॉकआउट कर गया।

विपक्षी दलों का आरोप था कि महाकुंभ मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक हुई, जिसके कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार ने पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध नहीं किए, जिसके कारण भगदड़ मच गई।

विपक्ष ने लगाए सरकार पर आरोप

समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, "...यह घटना प्रशासन के कुप्रबंधन के कारण हुई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि भगदड़ में हजारों लोग मारे गए... परिवारों को शव नहीं मिल रहे हैं, अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है... हमने यहां नोटिस दिए हैं लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया है..."

'मृतकों की सूची क्यों नहीं की गई जारी?'

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "...हमने एक घंटे के लिए सदन से वॉकआउट किया। हम फिर से वापस जाएंगे और इस मुद्दे को उठाएंगे। हमें फोन आ रहे हैं, लोग रो रहे हैं, वे अपने परिवारों से नहीं मिल पा रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि 30 मृतकों की सूची क्यों जारी नहीं की गई...हमारे नोटिस लगातार खारिज किए जा रहे हैं और इसका कारण भी पता नहीं है..."

'लोग जवाबदेही चाहते हैं'

आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, "चिंता की बात यह है कि पूरा देश उन लोगों के बारे में चिंतित है जिन्होंने अपनी जान गंवाई है...कुंभ उनसे पहले भी होता था और कुंभ उनके बाद भी होगा। कुंभ निरंतरता की चीज है लेकिन राजनीतिक दल नहीं है...लोग जवाबदेही चाहते हैं...इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।"

महाकुंभ भगदड़ में 30 की मौत

महाकुंभ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर दूसरे शाही स्नान के दौरान एक बड़ी भगदड़ मच गई। इस हादसे में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 60 लोग घायल हुए हैं। यह घटना उस समय हुई जब हजारों लोग स्नान करने के लिए जुटे थे।

विपक्षी नेताओं ने इस घटना के बाद सरकार से जवाब मांगा और कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि शाही स्नान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जाना चाहिए था।

सरकार ने बनाई 3 सदस्यीय जांच समिति

महाकुंभ भगदड़ की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है। इस आयोग का काम भगदड़ के कारणों और परिस्थितियों की जांच करना होगा। आयोग इस बात की जांच करेगा कि इस घटना के पीछे क्या कारण थे और किस तरह से यह हादसा हुआ।

इसके अलावा, आयोग को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिफारिशें देने का जिम्मा सौंपा गया है। सरकार ने आदेश दिया है कि इस जांच रिपोर्ट को एक महीने के भीतर प्रस्तुत किया जाए। इस कदम को लेकर सरकार ने उम्मीद जताई है कि इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।

बजट सत्र

बजट सत्र की शुरुआत शुक्रवार, 31 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त अभिभाषण से हुई। इसके बाद सत्र की कार्यवाही शुरू हुई, जिसमें सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया। इस बार के बजट सत्र का पहला भाग 13 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद 10 मार्च से दूसरा भाग शुरू होगा और सत्र 4 अप्रैल को समाप्त होगा।
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