Parliament Session: ट्रंप के टैरिफ वार पर आज संसद में हो सकता है हंगामा, कांग्रेस ने दिया स्थगन प्रस्ताव
Parliament Session: संसद के मानसून सत्र का आज 14वां दिन है, SIR मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा जारी है। वो इस मुद्दे पर सदन में चर्चा चाहता है लेकिन सरकार ने इसके लिए मना कर दिया है, जिसकी वजह से विपक्ष रोज नाराजगी दिखा रहा है तो वहीं आज एक बार फिर से अमेरिका के टैरिफ वार पर संसद के दोनों सदनों में हंगामा हो सकता है। आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है।
तो वहीं आज की कार्यवाही से पहले लोकसभा में कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाए जाने पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया है।

उनके बाद कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में 'नई दिल्ली के दक्षिण ज़िले के लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में हाल ही में हुई गिरफ़्तारियों' पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव दिया है। मालूम हो कि कई लोगों को कथित तौर पर सिर्फ़ बंगाली भाषा बोलने के कारण हिरासत में लिया गया था।
प्रधानमंत्री ट्रंप की छवि चमका रहे थे, देश हित मेंन नहीं किया काम
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, 'यह अमेरिका द्वारा शुद्ध और स्पष्ट ब्लैकमेल है। यह आश्चर्यजनक है कि हम इस स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां एक महाशक्ति हमें धमका सकती है, पिछले 11 वर्षों में, हमारी विदेश नीति, कूटनीति, प्रधानमंत्री की विदेश में की गई पहल, प्रवासी कार्यक्रम, सब कुछ प्रधानमंत्री और उनकी छवि को प्रोजेक्ट करने के लिए लक्षित था, न कि देश के हितों के लिए। यहां हम देश की कीमत पर 11 वर्षों के आत्म-प्रक्षेपण की कीमत चुका रहे हैं, हमें उम्मीद है कि हमारे हितों को कमजोर करने वाली कोई बातचीत नहीं होगी।'
अमेरिका का दोहरा मापदंड: शशि थरूर
तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीद पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'यूरेनियम, पैलेडियम जैसी कई चीजें हैं जो वे (अमेरिका) रूस से आयात कर रहे हैं। दुर्भाग्य से, इसमें एक तरह का दोहरा मापदंड शामिल है। उन्होंने चीन को 90 दिनों की मोहलत दी है, लेकिन चीन हमसे कहीं ज्यादा रूसी तेल आयात कर रहा है। तो जाहिर है कि यह उस देश की ओर से कोई दोस्ताना व्यवहार नहीं है जिसके बारे में हमने सोचा था कि वह हमारे प्रति अच्छा रुख रखता है, एक ऐसे प्रशासन की ओर से जिसके बारे में हमने सोचा था कि वह हमारे प्रति अच्छा रुख रखता है।'
'व्यापारिक साझेदारों पर भी ज़्यादा ध्यान देना होगा' (Parliament Session)
जाहिर है, हमें इसी के अनुसार काम करना होगा, और हमें इस अनुभव से सबक सीखना होगा। मुझे लगता है कि अब भारत के भीतर भी अमेरिकी निर्यात पर समान पारस्परिक टैरिफ लगाने का दबाव जरूर होगा। इसलिए मुझे लगता है कि इन परिस्थितियों में हमें अपने अन्य व्यापारिक साझेदारों पर भी ज़्यादा ध्यान देना होगा।'












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