भारत-पाकिस्तान के बीच बंटी थी ये चीजें, क्या हुआ था उस विवादित 'बग्गी' का, जिसपर दोनों देशों ने ठोका था दावा?
How India-Pakistan devided money: 15 अगस्त 1947 का दिन था, जब भारत को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली थी। इस दिन सभी भारतवासियों ने चैन की सांस ली थी। मगर आजादी के साथ ही भारत दो टुकड़ों में भी बंट गया। एक भारत और दूसरा पाकिस्तान।
सिर्फ दो देश ही नहीं बंटे बल्कि...
आज यानी 14 अगस्त के दिन पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। भारत जब दो हिस्सों में बंटा तो इसकी जिम्मेदारी थी ब्रिटिश वकील सर सिरिल रैडक्लिफ के सिर पर। उन्होंने ही साल 1847 के 14 अगस्त को भारत को एक अलग देश घोषित कर दिया था। दोनों देश भौगोलिक आधार पर तो अलग हो गए, मगर सेना और पैसे के बंटवारे की बात जब आई, तो मुश्किल आन खड़ी हो गई।

पाकिस्तान को मिले करोड़ों रुपये
रिपोर्ट के अनुसार, तब भारत के पास तकरीबन 400 करोड़ रुपये थे। इसमें से पाकिस्तान के हिस्से 75 करोड़ रुपये आए। विभाजन परिषद ने तब दोनों देशों को 31 मार्च साल 1948 को मौजूदा सिक्कों और मुद्रा को जारी रखने और पाकिस्तान में 1 अप्रैल 30 सितंबर, 1948 के बीच नए सिक्कों और नोट जारी करने का फैसला सुनाया गया।
भारत में क्योंं चलता था पाकिस्तानी पैसा?
मगर इस बीच पुरानी मुद्रा के चलन की बात भी कही गई थी। यही वजह थी कि बंटवारा तो हो गया था मगर इसके 5 साल बाद भी कोलकाता में पाकिस्तानी मुद्रा का चलना था।
दोनों देशों के विभाजन के दौरान जमीन, धन और सेना के अलावा जानवरों का बंटवारा तक किया गया था। इसमें एक हाथी को लेकर भी खूब विवाद हुआ था, जिसके बाद पश्चिम बंगाल को एक कार मिली और पूर्व बंगाल (जो तब पाकिस्तान था) को जॉयमोनी हाथी मिला था।
क्या है बग्गी का मामला?
अब बात आती है उस बग्गी की, जिस पर आजाद मुल्क भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपना दावा ठोक रहे थे। मगर क्या आप जानते हैं कि इस बग्गी का फैसला टॉस करके लिया गया। जी हां! ये टॉस भारत ने जीता, और इस बग्गी को अपने नाम कर लिया।












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