पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर पर अपने स्टैंड से कैसे 'हीरो' बन गए ओवैसी, देशभक्ति देख आलोचक भी हुए मुरीद
AIMIM chief Asaduddin Owaisi: पहलगाम नरसंहार और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्षी नेता AIMIM चींफ असदुद्दीन ओवैसी का जो स्टैंड रहा, उसके बाद उनकी छवि एक 'देशभक्त' के रूप में उभरी है। इस मुश्किल घड़ी में जब कुछ विपक्षी नेता मोदी सरकार की आलोचना करने से बाज नहीं आ रहे, तभी ओवैसी ने ऐसे मुद्दें उठाए और ऐसे बयान दिए जिसके बाद आलोचक ना केवल हैरान हैं बल्कि ओवैसी के मुरीद हो गए हैं।
दरअसल, सिर पर मुसलमानी टोपी में हमेशा मुस्लिमों के हक की बात करते हुए मुसलमानों का झंडा बुलंद करने वाले ओवैसी पहलगाम हमले के बाद अलग ही अंदाज ने नजर आए। बिहार की एक रैली में सिर पर तिरंगे वाला साफा बांधे ओवैसी ने जब पाकिस्तान पर जुबानी हमला बोला तो जोश से भरकर लोग "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम" के नारे लगे। पहलगाम हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी तक ओवैसी के उन बयानों पर आइए नजर डालते हैं जिसने कट्टर मुस्लिम नेता AIMIM चींफ ओवैसी की छवि बदल डाली है।

बता दें AIMIM चींफ असदुद्दीन ओवैसी जो मोदी सरकार के मुखर अलोचक रहे हैं, पहलगाम हमले के बाद ये वो पहले विपक्षी नेता थे जिन्होंने सर्वदलीय बैठक में आतंकी हमलों को लेकर पाकिस्तान की जमकर आलोचना करते हुए पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर जमकर निशाना साधा। इस हमले के बाद शुक्रवार को जुमे की नवाज से पहले उन्होंने काली पट्टी बांध कर विरोध जताया और सभी भारतीयों से पाकिस्तान और उसके आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
ओवैसी ने आतंकवाद के खिलाफ जिहाद का किया ऐलान
पहलगाम हमले के बाद बिहार के ढाका (मोतिहारी) में सिर पर तिरंगा वाली पगड़ी पहन कर पहुंचे ओवैसी ने आंतंकवाद के खिलाफ ओवैसी का जिहाद कर ऐलान किया और पाकिस्तान पर जमकर बरसे थे। इसके बाद ओवैसी ने पाकिस्तान की दोहरी नीतियों की आलोचना की, खास तौर पर पिछले 75 सालों में धर्म के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने पाकिस्तान के मुसलमानों का हितैषी होने के दावे पर सवाल उठाया, जबकि वह अफगानिस्तान, ईरान और बलूचिस्तान जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बमबारी में लिप्त है।
जिन्ना के दो-राष्ट्र सिद्धांत को 230 मुसलमानों ने अस्वीकार कर दिया था
ओवैसी ने कहा भारत में 230 मिलियन से अधिक मुसलमानों ने मुहम्मद अली जिन्ना के दो-राष्ट्र सिद्धांत को अस्वीकार कर दिया था, और इसके बजाय एक लोकतांत्रिक भारत में रहने को प्राथमिकता दी थी। ओवैसी ने भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच मतभेद पैदा करने के पाकिस्तान के इरादों के बारे में चिंता जताते हुए विरोध भी जताया।
"तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है"
ओवैसी ने दोनों देशों का बीच सीजफायर का ऐलान होने के बाद लिखा था "जब तक पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करता रहेगा तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है। सीजफायर हो या ना हो हमें पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकियों का पीछा करना नहीं छोड़ना चाहिए। जब-जब बाहरी आक्रमण हुआ है मैं सरकार और सशस्त्र बलों के साथ खड़ा हूं और हमेशा उनका साथ देता रहूंगा।"
"दुश्मन तब फायदा उठाते हैं जब भारतीय आपस में लड़ते हैं"
ऑपरेशन सिंदूर के लिए सशस्त्र सेनाओं की बहादुरी की तारीफ करते हुए ओवैसी ने शहीद हुए सेना के जवान एम. मुरली नायक, एडीडीसी राज कुमार थापा की शहादत को सेल्यूट भी किया था। इसके साथ ही भारतीयों और विपक्षी नेताओं के लिए उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था "मुझे उम्मीद है कि भारतीय और राजनीतिक दल बीते दो सप्ताह से कुछ सबक लेंगे। भारत तब मजबूत होता है, जब भारतीय एकजुट होते हैं। हमारे दुश्मन तब फायदा उठाते हैं जब भारतीय आपस में लड़ते हैं।"
ओवैसी ने उठाए ये अहम सवाल
ओवेसी ने अपनी पोस्ट में लिखा था प्रधानमंत्री मोदी जी से मेरे कुछ बुनियादी सवाल हैं, जिनका जवाब देश की जनता की तरफ़ से सरकार को देना चाहिए! India-Pak Tension: पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर — 22 अप्रैल से अब तक, क्या-क्या हुआ, पढ़ें पूरी टाइमलाइन
ओवैसी ने शिमला समझौता याद दिलाया
- अगर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम (सीज़फायर) का फैसला लेना था, तो क्या ये घोषणा हमारे प्रधानमंत्री को नहीं करनी चाहिए थी? क्यों एक विदेशी राष्ट्रपति ने इसकी जानकारी दी? शिमला समझौते के बाद से भारत की नीति स्पष्ट रही है - हम तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को नकारते हैं। तो अब क्या बदला है? क्या कश्मीर अब भारत का आंतरिक मामला नहीं रहा?
- भारत ने तीसरे देश में बातचीत क्यों स्वीकार की? वहाँ क्या एजेंडा तय हुआ? क्या अमेरिका यह गारंटी देता है कि पाकिस्तान अब अपनी ज़मीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं करेगा?
- क्या इस सीज़फायर का मकसद सिर्फ ट्रंप को खुश करना था या पाकिस्तान को यह दिखा देना कि भारत अब हर आतंकी हरकत का माक़ूल जवाब देगा? क्या हमने यह लक्ष्य हासिल कर लिया है कि पाकिस्तान दोबारा कोई दुस्साहस करने की सोच भी न सके?
- क्या भारत सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में बना रहे, ताकि वह आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए वैश्विक दबाव में रहे?
- सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसने देश की सुरक्षा, संप्रभुता और कूटनीतिक सिद्धांतों से समझौता तो नहीं किया।"












Click it and Unblock the Notifications