संसद में भी उठी राज्यों के GST भुगतान की मांग, विपक्षी दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन

नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वजह से केंद्र सरकार ने मार्च में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था। जिससे अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई। इस दौरान सरकार को राजस्व का भी काफी नुकसान हुआ। जिस वजह से राज्यों का जीएसटी भुगतान केंद्र सरकार अभी तक नहीं कर पाई है। ऐसे में राज्यों के सामने बड़ी आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है। गुरुवार को संसद के मानसून सत्र में भी जीएसटी भुगतान का मुद्दा उठा।

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    जीएसटी भुगतान को लेकर सभी विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार के खिलाफ एक नजर आ रही हैं। गुरुवार को टीआरएस, टीएमसी, डीएमके, आरजेडी, आप, समाजवादी पार्टी और शिवसेना के सांसदों ने संसद भवन में गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया। साथ ही मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सांसदों ने जल्द से जल्द जीएसटी भुगतान की मांग की है, ताकी राज्यों को आर्थिक संकट से उबारा जा सके।

    केंद्र ने राज्यों को दिया है दो विकल्प
    केन्द्र के पहले विकल्प के मुताबिक राज्य 97,000 करोड़ रुपये का लोन सीधे आरबीआई से ले सकते हैं। एक अनुमान लगाया गया है कि जीएसटी के तहत करीब 3 लाख करोड़ रुपये का शार्ट फाल रेवेन्यू का होगा। जीएसटी रेवेन्यू में यह नुकसान अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के बीच का है। अगर राज्य इस विकल्प के तहत 97000 करोड़ रुपये आरबीआई से लेते हैं तो उनको इसके मूलधन सहित ब्याज के भुगतान का बोझ नहीं आएगा। यह लोन बाद में जीएसटी में सेस को बढ़ाकर पूरा कर लिया जाएगा। वहीं दूसरे विकल्प के तहत राज्यों को कहा गया है कि वो भरपाई का करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये का कर्ज सीधे बाजार से उठा लें, लेकिन इस दशा में केन्द्र इस लोन के मूलधन यानी 2.35 लाख करोड़ रुपये की भरपाई जीएसटी सेस से करेगी, बाकी का ब्याज राज्यों को अपनी जेब से भरना पड़ेगा।

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