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Operation Jubaida: ऑर्मी और बीएसएफ ऑफिसर्स के नाम पर 3,000 से ज्‍यादा गन लाइसेंस, एटीएस ने अब लिखी आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को चिट्ठी

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नई दिल्‍ली। राजस्‍थान एटीएस की ओर से चलाए गए ऑपरेशन जुबैदा में इस बात की जानकारी मिली है कि कैसे 3,000 से ज्‍यादा बंदूकों के लाइसेंस हासिल करने के लिए सेना के जवानों और ऑफिसर्स के नामों का प्रयोग गया था। एटीएस ने अब कहा है कि सेना की ओर से इन नामों को सत्‍यापित किया जाएगा। एटीएस सूत्रों की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक एक गैंग जो गैर-कानूनी तरीके से हथियार खरीदता है, उसने ही इन नामों का प्रयोग किया होगा। सेना के ऑफिसर्स और जवानों के नाम पर एक नहीं हजारों बंदूकों के लिए लाइसेंस जारी हुए और इससे भी ज्‍यादा हैरानी की बात है कि उन ऑफिसर्स के नाम पर लाइसेंस जारी कर दिए जो जम्‍मू और कश्‍मीर में तैनात थे। 

आर्मी, एयरफोर्स, इंडियन नेवी को लिखी गई चिट्ठी

आर्मी, एयरफोर्स, इंडियन नेवी को लिखी गई चिट्ठी

एटीएस ने सेना, इंडियन एयरफोर्स और इंडियन नेवी के अलावा बीएसएफ, सीआरपीएफ, एनसीसी, आरपीएफ, एनडीआरएफ और कोस्‍ट गार्ड को चिट्ठी लिखी है। सेना की ओर से अब तक चिट्ठी के जवाब में उसके 375 कर्मियों के नामों की लिस्‍ट एटीएस को सौंप दी गई है। एटीएस अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि सेना की इस लिस्‍ट में टाइम पीरियड नहीं दिया गया है। एटीएस का कहना है कि लिस्‍ट को और विस्‍तृत होना चाहिए था और इसके लिए एक और रिक्‍वेस्‍ट सेना को भेजी गई है। एटीएस ऑफिसर का कहना है कि यह एक ऐसा केस है जो सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील है और इसलिए इसका सुलझना काफी जरूरी है।

नेवी और एयरफोर्स की प्रतिक्रिया

नेवी और एयरफोर्स की प्रतिक्रिया

वहीं नौसेना की ओर से एटीएस को जानकारी दी गई है कि 26 कर्मियों में से सिर्फ 14 केसेज ऐसे हैं जो वास्‍तविक हैं। अब एटीएस इस बात का पता लगा रही है कि जो लोग बच गए हैं उन्‍होंने खुद को कैसे नौसैनिक बताया और लाइसेंस हासिल कर लिए। वहीं इंडियन एयरफोर्स की ओर 39 में से 17 के नाम सही पाए गए हैं। वहीं 585 कर्मी जो बीएसएफ से जुड़े हैं उनमें से 471 के रिकॉर्ड्स मिले हैं और 336 के रिकॉर्ड्स सही पाए गए। एटीएस ऑफिसर्स का कहना है कि बहुत बड़ा रैकेट है जो इसमें शामिल है। ऐसा लगता है कि बहुत से ऑफिसर्स और जवानों के नाम ऐसे ही चुन लिए गए और फिर उनके नाम पर लाइसेंस हासिल कर लिया गया। एटीएस ने इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि जम्‍मू कश्‍मीर के कुछ ऑफिसर्स के नाम भी इस रैकेट से जुड़े हों।

मार्च में हुई दो लोगों की गिरफ्तारी

मार्च में हुई दो लोगों की गिरफ्तारी

मार्च 2018 में जम्‍मू कश्मीर पुलिस की ओर से फर्जी गन लाइसेंस गैंग का भांडा फोड़ा गया था। इसकी जांच के बाद ही 52 ऐसे लाइसेंस के बारे में पता लगा जो फर्जी थे। इस बात का भी पता लगा आर्मी की फर्जी स्‍टैंप का प्रयोग करके लाइसेंस हासिल किए जा रहे हैं। पुलिस ने इसके बाद छापेमारी की और दो व्‍यक्तियों को इस सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। इन दोनों की पहचान तरनजीत सिंह और सतिंदर सिंह के तौर पर हुई थी और ये दोनों जम्‍मू के रहने वाले थे। पुलिस को इनके पास से सेना और सिविल एडमिनिस्‍ट्रेशन की स्‍टैंप भी मिली थीं।

क्‍या था ऑपरेशन जुबैदा

क्‍या था ऑपरेशन जुबैदा

ऑपरेशन जुबैदा ने इस पूरे षडयंत्र की पोल खोली जब एटीएस ने 52 लोगों को गिरफ्तार किया था। एटीएस को पता चला था कि इन लोगों को जम्‍मू कश्‍मीर के अलग-अलग जिलों से लाइसेंस हासिल हुए थे। इस बात का पता भी लगा कि 3,367 बंदूकों के लिए जो लाइसेंस लिए गए वे सेना के जवानों के नाम पर थे। एटीएस को इस बात का भी पता चला कि डिप्‍टी कमिश्‍नर्स की ओर से लाइसेंस जारी किए गए थे। वहीं इस बात पर एटीएस को हैरानी हुई कि किसी भी तरह का कोई रिकॉर्ड लाइसेंस के लिए मेनटेन नहीं किया गया था।

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English summary
This case has all the makings of a huge racket. Under the scanner of the Rajasthan ATS are over 3,000 gun licences that were allegedly issued in the name of Army personnel.
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