One nation, one election: मोदी 3.0 में लागू होगा 'एक राष्ट्र, एक चुनाव', जाति जनगणा पर भी बड़ा फैसला
One nation, one election update: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल में ही 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को लागू करने की योजना बना रही है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी को विश्वास है कि, सभी दल केंद्र सरकार के इस फैसले की समर्थन करेंगे।
सूत्रों के जरिए सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, इसे इसी कार्यकाल में लागू किया जाएगा। पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस की अपनी स्पीच में प्रधानमंत्री मोदी ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के अपने संकल्प को एक बार फिर दोहराया था। उन्होंने कहा था कि बार-बार चुनाव देश की प्रगति में बाधा पैदा कर रहे हैं।

रविवार को एक केंद्र सरकार के एक सीनियर ब्यूरोक्रेटने कहा कि भाजपा के अल्पमत में होने के बावजूद एनडीए सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल में "एक राष्ट्र, एक चुनाव" को लागू करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि "60 साल बाद लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुनी गई सरकार के तहत स्थाई नीति (नीति स्थिरता) को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।
सीनियर अधिकारी का कहना था कि, ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां एनडीए सरकार ने 10 साल पहले शुरू किए गए काम को जारी रखने के लिए नीतिगत फैसले न लिए हों, फिर चाहे वह डिफेंस सेक्टर से जुड़े हो, अंतरिक्ष से हो, विदेश और गृह मामले से हो, शिक्षा हो, डिजिटल इंडिया हो और भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना हो, बुनियादी ढांचे के निर्माण पर सालाना 11 लाख करोड़ रुपये खर्च करना हो।
बता दें कि, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। यह 18,626 पन्नों की है। पैनल का गठन 2 सितंबर 2023 को किया गया था। जिसे अब मोदी सरकार लागू करने की योजना बना रही है। अगर मोदी सरकार वन नेशन वन इलेक्शन लागू करती है तो सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 तक बढ़ाया सकता है। जिसके बाद 2029 में पूरे देश में एक साथ चुनाव होंगे।
इसके अलावा लंबे समय से रुकी हुई देशव्यापी जनगणना कराने के लिए प्रशासनिक शुरू हो गया है। हालांकि, जनगणना की प्रक्रिया में जाति का कॉलम शामिल किया जाएगा या नहीं, इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। यह प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में दशकीय जनगणना नहीं कराई गई थी। जिसके बाद तीन साल की देरी के बाद अब जनगणना की प्रक्रिया फिर से शुरू हुई है।












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