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One Nation One Election Bill से पहले किन विधेयकों पर JPC कर चुकी है विचार, उनका क्या हुआ अंजाम?

One Nation One Election Bill in JPC: मंगलवार को लोकसभा में पेश हुआ एक देश एक चुनाव विधेयक संयुक्त संसदीय समिति (JPC)में भेजा जाना है। मुमकिन है कि यह समिति 90 दिन तक इस बिल पर विस्तृत चर्चा करने के बाद अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश करे, उसके बाद उसपर सदन में बहस हो सकती है और उसे पास किया जा सकता है।

लेकिन, केंद्र में सत्ताधारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इससे पहले भी कई विधेयक जेपीसी में भेजे जा चुके हैं। उनमें से कई विधेयक आज कानून का शक्ल भी अख्तियार कर चुके हैं। वैसे बीते वर्षों में जेपीसी में जाने वाले विधेयकों की संख्या में कमी देखी गई है। वन नेशन, वन इलेक्शन विधेयक जेपीसी में जाने वाला सबसे नया विधेयक है।

one nation one election bill in jpc

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार 17वीं लोकसभा (2019-2024) में मात्र 16% विधेयकों को ही विस्तृत छानबीन के लिए संसद की समितियों के पास भेजा गया। उससे पहले क लोकसभाओं की तुलना में यह काफी कम संख्या बताई गई है।

वक्फ (संशोधन)विधेयक,2024
वन नेशन वन इलेक्शन बिल से पहले इसी साल वक्फ (संशोधन)विधेयक,2024 लोकसभा में पेश किया गया है। इस विधेयक का मकसद वक्फ बोर्ड की खामियों को दुरुस्त करना,उसकी पारदर्शिता बढ़ाना और गैर-कानूनी तरीके से संपत्तियों पर दावों पर रोक लगाना है। इसपर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अगुवाई बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल कर रहे हैं। संभावना थी कि संसद के शीतकालीन सत्र में इसकी रिपोर्ट पेश हो जाएगी। लेकिन, यह अगले सत्र के लिए टल गया है।

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इसकी दिल्ली में 27 बैठकें हो चुकी हैं। यह समिति देश के कई हिस्सों में जाकर मौके पर भी छानबीन कर चुकी है। विपक्षी सदस्यों की ओर से वक्फ विधेयक के भारी विरोध की वजह से यह विधेयक विवादों में रहा है।

वन संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023
लोकसभा में वन संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023, मार्च 2023 में पेश किया गया था। इसका लक्ष्य वन संरक्षण अधिनियम,1980 में जरूरी सुधार करना था। इस बिल को प्रोफेसर राजेंद्र अग्रवाल की अगुवाई में जेपीसी में भेजा गया। समिति की 9 बैठकें हुईं और इसने 20 जुलाई, 2023 को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दी। उसी साल दोनों सदनों से पास होने के बाद 1 दिसंबर से वन संरक्षण (संशोधित) अधिनियम, 2023 लागू हो गया।

जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2023
जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2023 को भी 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति में भेजा गया था। पीपी चौधरी की अगुवाई वाली इस जेपीसी की 10 बैठकें हुईं और इसने मार्च, 2023 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इस बिल में कृषि, पर्यावरण, मीडिया और प्रकाशन से जुड़े भिन्न सेक्टर में 42 कानूनों में बदलाव पर फोकस था। जेपीसी रिपोर्ट मिलने के बाद यह विधेयक लोकसभा से 27 जून, 2023 को और राज्यसभा से 2 अगस्त, 2023 को पास हो गया।

जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2021
16 दिसंबर, 2021 को जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2021 लोकसभा में पेश किया गया था। इसमें घरेलू कंपनियों के लिए अनुपालन आवश्यकताओं को सरल बनाने की व्यवस्था थी और अधिनियम के तहत सभी अपराधों को अपराध से मुक्त करने का प्रस्ताव था। 20 दिसंबर, 2021 को यह विधेयक संजय अग्रवाल की अगुवाई वाली जेपीसी को सुपूर्द किया गया। 15 बैठकों के बाद जेपीसी ने अगस्त,2022 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी। यह विधेयक लोकसभा से जुलाई,2023 और राजयसभा से अगस्त, 2023 से पास हुआ।

पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019
2919 में पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 पर विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित की गई। इस समिति में दो साल तक चर्चा होती रही। पीपी चौधरी की अगुवाई वाली समिति की 78 से ज्यादा बैठकें हुईं। 16 दिसंबर, 2021 को इसकी रिपोर्ट लोकसभा को सौंप दी गई।

नागरिकता (संशोधन) विधेयक,2016
नागरिकता (संशोधन) विधेयक,2016 को 2016 में ही लोकसभा में पेश किया गया, जिसको लेकर विपक्ष को शुरू से ही बहुत ज्यादा आपत्ति थी। इस विधेयक को नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के लिए लाया गया था। विधेयक का इरादा पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दिलाने का था।

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इस विधेयक को भी पहले राजेंद्र अग्रवाल की अगुवाई वाली जेपीसी को सौंपा गया। इस समिति ने 7 जनवरी, 2019 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। उसी साल दिसंबर में संसद से इस विधेयक को मंजूरी मिल गई। इस विधेयक के पास होने के बाद कांग्रेस समेत अन्य राजनीतिक दलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसके बाद राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क गई।

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