One Nation One Election: बिल की प्रक्रिया कहां तक पहुंची, विंटर सेशन में 'एक देश एक चुनाव' पर आएगा अपडेट?

One Nation One Election: संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर भी चर्चा तेज है। केंद्र सरकार संकेत दे चुकी है कि यह मुद्दा उसकी प्राथमिकता में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस सत्र में सरकार इसके लिए कानून का ड्राफ्ट पेश कर सकती है? हालांकि, इस बात की संभावना नहीं है कि इस सत्र में बिल का ड्राफ्ट पेश हो। वोट चोरी और एसआईआर (SIR) के मुद्दे पर विपक्ष पहले ही हमलावर है। इस कड़ी में वन नेशन वन इलेक्शन का मुद्दा भी उठाया जा सकता है।

इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएंगे। यानी हर 5 साल में पूरा देश एक ही समय पर वोट डालेगा और अलग-अलग राज्यों में बार-बार चुनाव नहीं होंगे। हालांकि, विपक्षी दल ही नहीं कई गैर-सरकारी संस्थाएं और राजनीतिक विश्लेषक भी इस प्रस्ताव का सख्त विरोध कर रहे हैं।

One Nation One Election BILL

One Nation One Election बिल पर अब तक की टाइमलाइन

केंद्र सरकार ने इस बिल पर देशव्यापी सुझावों के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है। कमेटी की अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे हैं। कमेटी राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और कानूनविदों के सुझाव ले रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट पूरी होने के बाद सरकार इसे संसद में रख सकती है। सत्र के दौरान इस रिपोर्ट पर चर्चा या विधेयक का प्रारूप आने की संभावना कम है।

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One Nation One Election के पक्ष में है सरकार

- एक देश एक चुनाव के पक्ष में सरकार का सबसे मजबूत तर्क है कि इससे खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव घटेगा। देश चुनावों के झंझट में बार-बार नहीं फंसेगा।

- बार-बार चुनाव कराने के बजाय एक साथ चुनाव होने पर सरकारी और राजनीतिक दलों दोनों का खर्च कम होगा।

- लगातार चुनावी मोड से सरकार बाहर निकल सकेगी और फैसले लेने में तेजी आएगी। अधिकारिक मशीनरी (पुलिस, प्रशासन और चुनाव आयोग) को बार-बार चुनाव प्रबंधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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एक देश एक चुनाव का विपक्षी दल कर रहे विरोध

- राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल अलग-अलग समाप्त होता है। सभी राज्यों के कार्यकाल को एक समय पर लाने के लिए बड़े संवैधानिक संशोधनों की जरूरत होगी। विपक्ष का तर्क है कि यह सत्ता को केंद्रीकृत कर देगा।

- कई विपक्षी दल इसे राज्यों की स्वायत्तता में दखल बताते हैं और उनका तर्क है कि इससे संघीय ढांचे पर असर पड़ेगा। पूरे देश में एक ही समय पर चुनाव के लिए बाध्य करना संघीय व्यवस्था के खिलाफ है।

- इतनी बड़ी मशीनरी और सुरक्षा बलों को एक साथ लगाना कई विशेषज्ञों को अव्यावहारिक लगता है। इसके लिए पूर्व तैयारी और इंतजाम जरूरी हैं।

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