Winter Session 2025: सरकार ‘वंदे मातरम’ पर संसद में दिनभर की बहस क्यों चाहती है? असली वजहें अब आईं सामने!
Parliament Winter Session 2025 (Vande Mataram): शीतकालीन सत्र आज सोमवार 1 दिसंबर से शुरू होने वाला है और उससे पहले ही संसद के गलियारों में गर्मी बढ़ गई है। एक तरफ विपक्ष विशेष मतदाता सूची संशोधन यानी SIR को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं केंद्र सरकार पूरे सत्र की शुरुआत ही एक खास बहस से करना चाहती है-वंदे मातरम पर पूरे दिन की चर्चा। सवाल ये है कि आखिर सरकार इस मुद्दे को इतनी प्राथमिकता क्यों दे रही है और इसके पीछे राजनीतिक संकेत क्या हैं।
सत्र की शुरुआत 'वंदे मातरम' से क्यों?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सरकारी सूत्र बताते हैं कि सदन के पहले ही दिन वंदे मातरम पर दिनभर की चर्चा कराने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके लिए रविवार (30 नवंबर 2025) को होने वाली सर्वदलीय बैठक में विपक्ष से बातचीत भी की जाएगी।

दरअसल सरकार इस साल से वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का वर्षभर का अभियान चला रही है। राजधानी दिल्ली में 7 नवंबर को शुरू हुए कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगाया था कि 1937 में पार्टी ने राष्ट्रीय गीत के महत्वपूर्ण हिस्से हटा दिए थे और "वहीं से विभाजन की मानसिकता के बीज बोए गए"।
पीएम मोदी के आरोपों के बाद मामला और राजनीतिक हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जवाब दिया कि कांग्रेस ही वंदे मातरम की "असली ध्वजवाहक" रही है और ये गीत स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा था। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि "RSS और BJP ही वह संगठन थे जिन्होंने राष्ट्रीय गीत से दूरी बनाई थी।" अब सरकार इस बहस को संसद के भीतर ले जाना चाहती है, जो कि सत्र का माहौल तय कर देगा।
🟡 विपक्ष भी तैयार, लेकिन प्राथमिकता कुछ और
विपक्षी INDIA गठबंधन सरकार की इस पहल को मुद्दा बदलने की कोशिश बता रहा है। विपक्ष का कहना है कि वे वंदे मातरम पर चर्चा से नहीं भाग रहे, लेकिन सरकार को SIR यानी Special Intensive Revision पर भी जवाब देना होगा। SIR को लेकर बिहार से शुरू हुआ विवाद अब कई राज्यों तक पहुंच चुका है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं।
पिछले मानसून सत्र में भी इसी मुद्दे को लेकर भारी हंगामा हुआ था और कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी। सरकार तब भी अपनी स्थिति साफ कर चुकी थी कि "जो मामले अदालत में लंबित हैं या चुनाव आयोग से जुड़े हैं, उन पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती।"
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इसी लाइन को दोहराया है। उन्होंने कहा कि "EC एक संवैधानिक स्वायत्त संस्था है, सरकार उसकी ओर से नहीं बोल सकती। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि SIR पर चर्चा को "सुधारों" के संदर्भ में विस्तृत किया जाए तो सरकार विचार कर सकती है।
🟡 सरकार का एजेंडा: सुधारों की बड़ी लिस्ट
शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार बेहद आक्रामक मोड में है। बिहार में मिली जीत के बाद NDA कई बड़े सुधार विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इनमें शामिल हैं-
🔹हायर एजुकेशन कमीशनल बिल 2025 (Higher Education Commission of India Bill 2025)
जिसके जरिए उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक केंद्रीकृत आयोग बनेगा जो मानकों और शोध को नियंत्रित करेगा।
🔹इंश्योरेंस लॉ (अमेंडमेंट) बिल 2025 (Insurance Laws (Amendment) Bill)
जिसका मकसद बीमा क्षेत्र में गहराई बढ़ाना और उद्योग को ज्यादा खुला और सरल बनाना है।
🔹नेशनल हाईवे अमेंडमेंट बिल (National Highways Amendment Bill)
जिसमें तेज और पारदर्शी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया का प्रस्ताव है।
🔹एटॉमिक एनर्जी बिल (Atomic Energy Bill) में बदलाव
जिसके बाद निजी संस्थाओं को भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र चलाने की अनुमति मिल सकती है।
🔹हालांकि एक बड़ा विवादित प्रस्ताव 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2025 (Constitution (131st Amendment) Bill 2025), जो चंडीगढ़ को Article 240 के तहत सीधे केंद्र के नियंत्रण में लाने की दिशा में था-सरकार ने विरोध के बाद वापस लेने का फैसला कर लिया है।
🟡 विपक्ष की एजेंडा: प्रदूषण, राहत, बेरोजगारी और SIR
कांग्रेस की ओर से चीफ व्हिप मणिकम टैगोर ने कहा है कि विपक्ष चाहता है कि सरकार उन मुद्दों पर भी चर्चा कराए जिन्हें वे उठाना चाहते हैं। टैगोर का कहना है, "संसद केवल सरकार की नहीं, बल्कि विपक्ष की भी होती है। चर्चा दोनों तरफ की होनी चाहिए।"
विपक्ष की प्राथमिक सूची में शामिल हैं
🔹SIR प्रक्रिया और EC की भूमिका
🔹दिल्ली और NCR में बढ़ता प्रदूषण
🔹बाढ़ से प्रभावित राज्यों के लिए राहत
🔹बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दे
🟡 क्या सत्र की दिशा बदल देगा वंदे मातरम?
सरकार जहां शीतकालीन सत्र की शुरुआत "भावनात्मक और ऐतिहासिक" मुद्दे से करना चाहती है, वहीं विपक्ष इसे "मुख्य मुद्दों से ध्यान हटाने" की कोशिश बता रहा है।
एक तरफ राष्ट्रगीत के 150 साल को बड़े पैमाने पर मनाने की योजना है, दूसरी तरफ SIR जैसे संवेदनशील मुद्दे सत्र में उबाल ला सकते हैं। ऐसे में यह सत्र न केवल राजनीतिक रूप से अहम होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि क्या संसद वंदे मातरम की बहस से आगे बढ़ पाएगी या SIR का विवाद फिर से सत्र को ठप कर देगा।
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