आर्टिकल 370 पर पीएम मोदी से बात करने को लेकर उमर अब्दुल्ला ने दिया ये जवाब
उमर अब्दुल्ला बोले- आर्टिकल 370 पर पीएम मोदी से बात करने का कोई फायदा नहीं
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नहीं कहेंगे, क्योंकि वो जानते हैं कि इसका कोई फायदा नहीं होगा। ऐसे में वो इस तरह की मांग करके लोगों को भ्रम में नहीं डालेंगे, क्योंकि इसका कोई मतलब नही हैं। अब्दुल्ला ने किताब 'इंडिया टुमॉरो: कनवर्सेशंस विद द नेक्स्ट जेनरेशन ऑफ पॉलिटिकल लीडर्स' के लेखकों को दिए साक्षात्कार में ये बातें कही हैं।
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मोदी से बात करने से कुछ हल नहीं निकलेगा: उमर
उमर अब्दुल्ला ने कहा, अनुच्छेद 370 और 35ए के को लेकर या नवगठित केंद्र शासित प्रदेश को राज्य में वापस बदलने के लिए मैं पीएम मोदी से नहीं कहूंगा क्योंकि इसका कोई मतलब नहीं है। यह राजनीति का सबसे खराब रूप है। जब मैं जानता हूं कि मैं जो कुछ भी कर रहा हूं वह मतदाताओं को खुश करने की कोशिश कर रहा है और इससे कुछ भी नहीं निकलेगा। मैं ऐसा नहीं करना चाहता। मुझे लगता है कि इस तरह से तुष्टिकरण की राजनीति सबसे खराब चीज है।

कोई कश्मीरी नहीं मानता, कोई भारतीय
नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अपने आप से सच्चा रहना जरूरी है। उन्होंने कहा, दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी नेताओं के लिए ना तो वह भारतीय हैं और जो भारत के साथ कश्मीर का भविष्य नहीं देखत ना उनके लिए वो कश्मीरी ही हैं। इसलिए सबसे अच्छा है कि सच्चा बनें, भले ही आप भारतीय या कश्मीरी ना बनें।

कश्मीर भारत का हिस्सा, इस पर मेरा रुख नहीं बदला
अब्दुल्ला ने कहा कि 5 अगस्त को कश्मीर के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, पूरा राज्य बंद कर दिया गया। उनको 232 दिन नजरबंदी में रखा गया। इस अवधि ने उनको गुस्सैल जरूर बना दिया है, लेकिन वह जम्मू-कश्मीर के भारत का अभिन्न हिस्सा आज भी मानते हैं। इस पर उनका रुख नहीं बदला है।
बता दें कि केंद्र सरकार ने बीते साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। राज्य के ज्यादातर नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे। अभी तक भी कई नेता हिरासत में हैं। इसके बाद से कश्मीर के राजनीतिक दलों में गुस्सा है। इस साल 22 अगस्त को कशअमीर की छह पार्टियों ने पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए फिर से इसकी बहाली के लिए मिलकर संघर्ष करने का ऐलान किया है और इस संबंध में एक घोषणापत्र जारी किया है।












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