OLA-Uber-Rapido Strike Reason: 7 फरवरी को क्यों ठप ओला-उबर-रैपिडो की सेवाएं? यात्रियों के पास क्या हैं विकल्प?
OLA-Uber-Rapido Strike Today, 7 February 2026: देशभर में आज (7 फरवरी 2026) ऐप-बेस्ड कैब सेवाओं में बड़ी रुकावट आ सकती है। ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े लाखों ड्राइवरों ने 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' नाम से राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान ड्राइवर कम से कम 6 घंटे के लिए ऐप बंद रखेंगे, जिससे कैब-ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाएं प्रभावित होंगी। यह विरोध तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और अन्य राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों की अगुवाई में हो रहा है।
ड्राइवरों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन सरकार और कंपनियों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। यूनियन ने X पर पोस्ट कर कहा, 'भारत में ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स 7 फरवरी को ऑल इंडिया ब्रेकडाउन मनाएंगे। कोई मिनिमम फेयर नहीं, कोई रेगुलेशन नहीं, सिर्फ लगातार शोषण।' आइए विस्तार से जानें हड़ताल क्यों?

'All India Breakdown' क्या है?
ड्राइवर संगठनों ने इस हड़ताल को 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' नाम दिया है। इसका मतलब है कि 7 फरवरी को ड्राइवर एक साथ अपने ऐप बंद रखेंगे और काम नहीं करेंगे। अगर बड़ी संख्या में ड्राइवर इस हड़ताल में शामिल होते हैं, तो कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से ठप हो सकती हैं। इसका सीधा असर ऑफिस जाने वाले लोगों, छात्रों, बुजुर्गों और रोजमर्रा की यात्रा करने वालों पर पड़ेगा।
OLA-Uber-Rapido Strike Reason: हड़ताल की वजह क्या है?
ड्राइवरों का कहना है कि कंपनियां मनमाने तरीके से किराया तय करती हैं, क्योंकि सरकार ने मिनिमम बेस फेयर नोटिफाई नहीं किया है। मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के बावजूद प्लेटफॉर्म फेयर को 50% तक कम कर सकते हैं, जो ड्राइवरों की कमाई को प्रभावित करता है। 2023 से ईंधन कीमतों में 25% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इंसेंटिव्स घट गए हैं। इससे ड्राइवरों को आय की असुरक्षा, लंबे काम के घंटे (12-14 घंटे) और शोषण का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इन मुद्दों को उठाया है।
OLA-Uber-Rapido Strike Drivers Demands List: ड्राइवरों की मुख्य मांगें
- केंद्र और राज्य सरकारों से ऐप-बेस्ड सेवाओं (कैब, ऑटो, बाइक टैक्सी) के लिए मिनिमम बेस फेयर की तुरंत नोटिफिकेशन।
- यूनियनों से सलाह लेकर फेयर फाइनल करना और मोटर व्हीकल गाइडलाइंस 2025 का सख्त पालन।
- प्राइवेट वाहनों को कमर्शियल राइड्स के लिए इस्तेमाल बंद करना या उन्हें कमर्शियल कैटेगरी में बदलना अनिवार्य।
- सोशल सिक्योरिटी जैसे हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट कवर और प्रॉविडेंट फंड की मांग।
- प्लेटफॉर्म कमीशन (30% तक) पर कंट्रोल और ट्रांसपेरेंट कमाई सिस्टम।
यात्रियों पर क्या असर?
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, कोलकाता जैसे बड़े शहरों में सुबह-शाम पीक ऑवर्स में कैब मिलना मुश्किल हो सकता है। भागीदारी के आधार पर असर अलग-अलग होगा, लेकिन लाखों यात्री प्रभावित होंगे। दिल्ली जैसे शहरों में जहां गिग वर्कर्स की संख्या ज्यादा है, ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट में दिक्कत बढ़ सकती है।
सरकार को लिखा गया पत्र क्या कहता है
ड्राइवर यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं विस्तार से बताई हैं। पत्र में कहा गया है कि लाखों ऐप-आधारित ड्राइवर सरकार द्वारा तय न्यूनतम किराए और सुरक्षा नियमों के बिना काम कर रहे हैं। यूनियन का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन ड्राइवरों को उनका हक नहीं मिल रहा।
यूनियन ने यह भी कहा है कि मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2025 में ड्राइवरों की आजीविका की सुरक्षा, पारदर्शी किराया प्रणाली और नियामक निगरानी की बात कही गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों को लागू नहीं किया गया है।
OLA-Uber-Rapido Strike Other Opptions: क्या है दूसरा विकल्प?
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट: मेट्रो, बसें (जैसे DTC दिल्ली में), BMTC बेंगलुरु में) या लोकल ट्रेनें इस्तेमाल करें। पीक टाइम में पहले से प्लान करें।
- ऑफलाइन ऑटो/टैक्सी: स्टैंड से पारंपरिक ऑटो या टैक्सी बुक करें, लेकिन फेयर ज्यादा हो सकता है।
- अन्य ऐप्स: अगर कोई छोटे प्लेटफॉर्म काम कर रहे हों, लेकिन ज्यादातर प्रभावित होंगे।
- कारपूलिंग या वॉक: छोटी दूरी के लिए शेयरिंग ऐप्स या पैदल जाना बेहतर।
- यात्रियों को पहले से अल्टरनेटिव प्लान करने की सलाह दी जा रही है।
कितना नुकसान?
आर्थिक नुकसान का सटीक अनुमान नहीं है, लेकिन देश में 80 लाख से ज्यादा गिग वर्कर्स (2030 तक 2.5 करोड़ होने की उम्मीद) हैं। एक दिन की हड़ताल से कंपनियों को करोड़ों का रेवेन्यू लॉस हो सकता है, जबकि ड्राइवरों की दैनिक कमाई (औसत 500-1000 रुपये) प्रभावित होगी। डिलीवरी सर्विसेज भी रुक सकती हैं, जिससे ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी सेक्टर को झटका लगेगा। लंबे टर्म में, अगर मांगें नहीं मानी गईं तो गिग इकोनॉमी पर बड़ा असर पड़ेगा।
यह हड़ताल गिग वर्कर्स की बढ़ती नाराजगी को दिखाती है, जहां कॉरपोरेट प्रॉफिट ड्राइवरों की जीविका पर भारी पड़ रहा है। सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अपडेट्स के लिए फॉलो करें।
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