ओडिशा: पत्रकार को पुलिस ने पीट-पीटकर किया बेहोश, फिर चेन से टांग बांधकर अस्पताल में कराया भर्ती
भुबनेश्वर, 8 अप्रैल। मध्य प्रदेश में पत्रकार के साथ पुलिस की बर्बरता के बाद अब ओडिशा में भी ऐसी ही घटना सामने आई है। यहां एक पत्रकार को चेन से बांधकर अस्पताल में रखने की भयावह तस्वीर सामने आई है। पत्रकार का ये हाल किसी और ने नहीं बल्कि पुलिस ने किया है।

बालासोर में पत्रकार के साथ बदसलूकी
मामला ओडिशा के बालासोर का है जहां पर पत्रकार लोकनाथ दलेई की तस्वीर सामने आई है जिसमें वे एक अस्पताल के बेड पर लेटे हुए हैं और उनकी टांग को बांध दिया गया है। दलेई नीलगिर पुलिस के करप्शन के खिलाफ लगातार रिपोर्ट कर रहे थे जिससे पुलिस उनके ऊपर नाराज चल रही थी। तस्वीर सामने आने के बाद ओडिशा के डीजीपी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
दलाई ने दावा किया है कि उन्हें पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा गया जहां उनका मोबाइल छीन लिया गया और प्रभारी निरीक्षक द्रौपदी दास ने उन्हें बुरी तरह से पीटा। उन्होंने आगे बताया कि पुलिस की बेरहमी से पिटाई के चलते जब वे बेहोश हो गए तो पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जहां एक पुलिसकर्मी ने उनके पैर को अस्पताल के बेड में बांध दिया।

मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट
घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ओडिशा मानवाधिकार आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। ओएचआरसी ने आईजी पूर्वी रेंज, बालासोर को 15 दिनों के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
बता दें इसके पहले मध्य प्रदेश में भी पत्रकार के साथ बदसलूकी की घटना सामने आई थी। मध्य प्रदेश के सीधी थाने में पुलिस ने पत्रकार को रंगकर्मियो को कपड़े उतरवाकर लॉक अप में रख दिया था। लॉक अप से जो तस्वीर निकलकर आई वह पुलिस का शर्मनाक चेहरा दिखा रही थी। देखते ही देखते यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और पुलिस की बदनामी होने लगी। रही सही कसर संबंधित थाने के इंचार्ज की सफाई ने कर दी

थाना प्रभारी ने दिया अजीब तर्क
थाना प्रभारी मनोज सोनी ने कहा कि उन्होंने पत्रकारों को नंगा नहीं किया था बल्कि उन्हें अंडरवियर में रखा था। बाकी कपड़े इसलिए उतारे थे ताकि वे कपड़ों की मदद से लॉक अप में फांसी न लगा लें। पुलिस के इस वाहियात तर्क की भी लोगों ने सोशल मीडिया पर निंदा की। मध्य प्रदेश में पत्रकारों के साथ बर्बरता की राजनीतिक दलों ने भी आलोचना की थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे चौथे खंबे का चीरहरण कहा था। चारों तरफ से आलोचना होने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने थाना प्रभारी को बर्खास्त कर दिया था।












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