Odisha: महिलाओं के खिलाफ अपराध नहीं करेंगे बर्दाश्त, सीएम मोहन माझी ने खींच दी लकीर
Odisha: दो दशकों से ज्यादा तक ओडिशा महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में प्रदेश के शासन-प्रशासन की निष्क्रियता का खामियाजा भुगत चुका है। लेकिन, मुख्यमंत्री मोहन माझी महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर इतने संवेदनशील हैं कि अब पूरी सरकार एक्शन मोड में आ चुकी है। सीएम माझी के रुख को देखने से लगता है कि अब ओडिशा में महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों का बचना नाममुकिन है।
ओडिशा ने यूं ही कुशासन नहीं झेला है। सुप्रीम कोर्ट के कहने के बाद भी आजतक यहां के थानों में सीसीटीवी नहीं लग पाए हैं। लेकिन, अब प्रदेश के सीएम खुद इतने सजग और सक्रिय हैं कि आने वालों में ही बदलाव नजर आना तय है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध अब ओडिशा में नहीं बर्दाश्त
हाल ही में सीएम माझी ने ओडिशा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों से कहा है कि वह यह सुनिश्चित करें कि महिलाएं जब भी कोई शिकायत लेकर पुलिस के पास आएं तो उन्हें पूरा सम्मान मिले और उनका ख्याल रखा जाए।
चाहे कोई महिला तड़के दो बजे भी किसी बात को लेकर थाने पहुंचती है तो उनकी बातों को बहुत गौर से सुना जाए। आने वाले समय में ओडिशा में ऐसी व्यवस्था हो रही है कि पुलिस हेडक्वार्टर से ही सभी थानों की निगरानी भी होनी शुरू हो जाएगी।
महिलाओं के खिलाफ अपराध पर जीरो-टॉलरेंस
मुख्यमंत्री का साफ निर्देश है कि रात को किसी वजह से शिकायत लेकर आने वाली महिला के साथ किस तरह की संवेदनशीलता के साथ पेश आना है, यह फील्ड-स्तर के पुलिस वालों को मालूम होना चाहिए और इसके लिए उन्हें लगातार प्रशिक्षित करना होगा।
मोहन माझी की सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में जीरो-टॉलरेंस की नीति पर चलने के प्रति प्रतिबद्ध है, ताकि ऐसे मामलों में जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित हो। अपराधी चाहे कोई भी हो, अब ओडिशा में उसका बच पाना आसान नहीं है।
असल में सीएम महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध को लेकर इतने गंभीर इस वजह से हैं, क्योंकि ओडिशा वह भी समय देख चुका है,जब महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में अपराधियों पर दोष साबित होने की दर मात्र 9.73% (वर्ष 2000-2022) थी।
जाहिर है कि यह पुलिस और उसकी क्षमता पर सवाल उठाने के लिए काफी है। लेकिन, सीएम यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि प्रदेश की पुलिस का मनोबल बढ़ा रहे है, ताकि वे पूरी लगन के साथ काम करे और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा सके।
महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर सीएम ने तलब की रिपोर्ट
फिलहाल के लिए तो सीएम ने डीजीपी से महिलाओं के खिलाफ अपराध की स्थिति, उसमें सजा मिलने की दर और लंबित जांचों को लेकर जिला-स्तर पर एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट मांगी है। इसपर कानून विभाग से सलाह लेकर सरकार आगे की कार्रवाई भी निर्धारित करेगी। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि ओडिशा में लड़कियां और महिलाएं बेझिझक घरों से बाहर निकल सकें और यह माहौल बनाने का जिम्मा पुलिस के बड़े अधिकारियों को दिया है।
ओडिशा के सीएम की वजह से सरकार की बदल रही तस्वीर
ओडिशा की राजनीति और राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब मुख्यमंत्री खुद ऐसे मामले के समाधान में जुटे हुए हैं और जब भी जरूरत पड़ती है तो अपने मंत्रियों को भी उसके लिए सक्रिय करने में देर नहीं करते।
सरकार को विपक्ष की भी मिल रही सराहना
हाल में राजधानी भुवनेश्वर के एक थाने में विवाद हुआ था, जिसे पुलिस बनाम सेना बनाने की कोशिश हुई। सीएम बिना देर किए खुद पीड़ितों से मिले भी; और उनके लिए न्याय सुनिश्चित करके लिए न्यायिक जांच का आदेश देने में भी देर नहीं की।
उन्होंने इससे पहले अपने उपमुख्यमंत्री केवी सिंह देव और पार्वती परिदा के अलावा राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी, कानून मंत्री पृथ्वी विराज हरिचंदन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इसपर चर्चा भी की थी।
संयोग से विवाद के समय सीएम मुख्यालय से बाहर थे। जिस रात उनकी राजधानी भुवनेश्वर लौटना हुआ, उन्होंने उसी रात विवाद को बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया।
क्योंकि सीएम फौरन ही वरिष्ठ मंत्रियों को काम पर लगा चुके थे। सुबह के 2 बजे तक बैठकें हुईं। गौर करने वाली बात ये है कि प्रत्येक घटनाक्र पर खुद मुख्यमंत्री नजर रख रहे थे।
यही वजह है कि ओडिशा में आज सरकार की ओर से हो रही कार्रवाई की सराहना जनता के साथ-साथ विपक्ष भी करने लगा है।
माझी जमीन से जुड़े नेता हैं और उनके व्यक्तित्व को यही मजबूत बनाता है
बालासोर जिले में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ कथित मारपीट की घटना भी सामने आई थी। जैसे ही सीएम को इसके बारे में पता चला उन्होंने उपमुख्यमंत्री पार्वती पारिदा से पीड़िता से सीधे संपर्क करने को कह दिया। उस महिला को उसकी ड्यूटी निभाने से रोका गया था।
उपमुख्यमंत्री ने भी मुख्यमंत्री से मिले निर्देशों के मुताबिक पीड़िता से फोन पर बात की और मुख्य जिला चिकित्सा पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी इस मामले में सभी जरूरी कदम उठाने को कहा। आखिरकार इसकी वजह से तीन आरोपी महिलाएं गिरफ्त में आ गईं।
करीब ढाई दशकों तक कैसा था ओडिशा?
2024 में मीडिया में एक रिपोर्ट आई आई थी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि तबकी ओडिशा सरकार ने अपने ही वन विभाग के सुझावों को कथित तौर पर ठुकरा कर सुंदरगढ़ में ग्रीनफिल्ड इंडस्ट्रियल यूनिट के लिए एक निजी कंपनी को पेड़ काटने की इजाजत दे दी। जबकि, सरकार को पता था कि जैव विविधता के लिए वह भूमि बहुत ही महत्वपूर्ण थी।
उदाहरण के तौर पर एक और घटना का जिक्र किया जा सकता है। साल 2023 में संबलपुर में एक हिंसक वारदात हुई थी। उस घटना को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप थे कि अगर प्रदेश की इंटेलिजेंस के कहे पर गौर की होती तो हिंसा को टाला जा सकता था। लेकिन, निष्क्रियता का ऐसा आलम था कि इंटेलिजेंस पर नहीं ध्यान दिया और खून-खराब हो गया।
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