Odisha:एक न्यूज चैनल के CFO दलितों की जमीन हड़पने के आरोप में गिरफ्तार, भाजपा नेता जय पांडा से जुड़े हैं तार
नई दिल्ली- भाजपा नेता बैजयंत पांडा दलितों की जमीन हड़पने के एक विवाद में उलझ गए हैं। दरअसल, ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने रविवार को ओडिशा इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी के एक डायरेक्टर मनोरंजन सारंगी को अनुसूचित जातियों की जमीन गैरकानूनी ढंग से हड़पने के आरोप में गिरफ्तार किया था। लेकिन, अब इस मामले में भाजपा नेता जय पांडा की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। गौरतलब है कि सारंगी एक न्यूज चैनल ओटीवी नेटवर्क (OTV Network) के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी (सीएफओ) भी हैं और यह न्यूज चैनल बीजेपी नेता बैजयंत पांडा के परिवार का है।

जब से यह खुलासा हुआ है कि ओडिशा इंफ्राटेक ने गैरकानूनी तरीके से अनुसूचित जातियों की जमीन खरीदी है, ऐसे भी आरोप लग रहे हैं कि इस गड़बड़ी के पीछे पूर्व सांसद जय पांडा का हाथ है। आरोपों के मुताबिक पांडा ने 21 गरीब दलितों से 10 एकड़ जमीन खरीदने के लिए अपने कार ड्राइवर रबी सेठी का इस्तेमाल किया, जो कि खुद एक दलित है। ये सारा विवाद इसलिए हो रहा है, क्योंकि ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने अपनी जांच में दावा किया है कि खोर्दा जिले की बेगुनिया तहसील के सौरा गांव में ओडिशा इंफ्राटेक ने अनुसूचित जातियों की जमीन खरीदने के लिए फर्जीवाड़ा किया। करीब दो हफ्ते पहले नवीन पटनायक सरकार ने अनुसूचित जाति के कुछ लोगों की शिकायत पर क्राइम ब्रांच से इस मामले की तहकीकात के आदेश दिए थे।
अपने बयान में आर्थिक अपराध शाखा ने दावा किया था कि पहली नजर में यह पता चला है कि अनुसूचित जातियों की जमीन खरीदने के लिए कंपनी ने कानून को ताक पर रखकर धोखाधड़ी की। ओडिशा की आर्थिक अपराध शाखा राज्य पुलिस की क्राइम ब्रांच के अधीन है। इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश समेत एससी और एसटी ऐक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
जबकि, अपनी सफाई में जारी बयान में ओटीवी ने कहा है कि यह राज्य सरकार की ओर से नेटवर्क के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई का नतीजा है। ओटीवी ने आरोप लगाया है कि पिछले दो महीनो से राज्य सरकार ने उसे 13 झूठे केस में फंसाने की कोशिश की है, जिनमें से कई में अदालत से उसे राहत भी मिल चुकी है। ओटीवी की ऑपरेटिंग ऑफिसर लितिशा मंगत के मुताबिक ओडिशा के लोगों को पता है कि ओटीवी पर किस तरह से हमले किए जा रहे हैं। दिलचस्प बात है कि सारंगी की गिरफ्तारी की ओडिशा में भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस भी मुखालफत कर रही है और इसे राजनीतिक दुर्भावना से की गई कार्रवाई बता रही है।
गौरतलब है कि खोर्दा जिले की बेगुनिया तहसील के सौरा गांव की जिस जमीन को लेकर विवाद है उसकी खरीद-बिक्री सिर्फ अनुसूचित जातियों के लोगों के बीच ही करने की कानूनी व्यवस्था है। लेकिन, पांडा से जुड़ी कंपनी पर आरोप है कि उसने दलितों की जमीन हड़पने के लिए अपने कर्मचारी के नाम का इस्तेमाल किया है। क्योंकि, 10-12 हजार रुपये सैलरी वाले ड्राइवर के लिए कई एकड़ जमीन खरीदना संभव नहीं था।
बता दें कि जय पांडा पहले ओडिशा की सत्ताधारी बीजेडी के बड़े नेता थे। लेकिन, दो साल पहले उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उससे निकलना पड़ा था। बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गए। उसके बाद से वह मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की पार्टी के निशाने पर रहे हैं। मौजूदा वक्त में वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वह 4 बार संसद में ओडिशा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वह पेशे से पायलट भी रह चुके हैं।












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