पीएम मोदी, राहुल गांधी के बीच अडानी और अंबानी ग्रुप को लेकर जंग, बयानों पर आपत्ति, याचिका दायर
लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस समेत आईएनडीआईए में शामिल दलों के नेता भारत के टॉप उद्योगपतियों के बहाने पीएम मोदी को निशाने पर ले रहे हैं। हाल के कई चुनावी रैलियों में राहुल गांधी ने अडानी ग्रुप का नाम लिया। जिसके चलते किसान, सामाजिक कार्यकर्ता और भारतीय शेयर बाजार में निवेशक सुरजीत सिंह यादव ने कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें कथित रूप से मानहानि के बयानों पर रोक लगाने की मांग की गई है।
कांग्रेस पार्टी अपने चुनाव अभियान में प्रधानमंत्री पर गौतम अडानी और मुकेश अंबानी समेत देश के शीर्ष पांच उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रही है। हाल ही में राहुल गांधी ने केंद्र पर गौतम अडानी सहित उद्योगपतियों के 15-16 लाख करोड़ रुपये के ऋण माफ करने का आरोप लगाया था। जिसको लेकर दिल्ली कोर्ट में दायर याचिका में कथित मानहानिकारक बयानों पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि गांधी और मोदी को अडानी समूह के बाजार मूल्य और निवेशक हितों को नुकसान पहुंचाने वाले बयान पर प्रतिबंध लगाने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा लागू की जाए।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में राहुल गांधी द्वारा तीन मार्च को मध्य प्रदेश में दिये गये एक भाषण का हवाला दिया। गया है। जिसमें उन्होंने किसानों का जिक्र किया और कहा, "किसानों की लिस्ट देखेंगे तो, आप देखेंगे कि 73% किसान दलित, आदिवासी और पिछड़े समूहों के हैं, जिनमें से कुछ सामान्य जाति के गरीब लोग होंगे, अब भाजपा सरकार ने पिछले 10 वर्षों में 2 के 16 लाख करोड़ रुपये माफ कर दिए हैं।"
याचिका में कोर्ट को बताया कि राहुल गांधी ने आगे कहा, "सबसे बड़े अरबपति क्या आप समझते हैं कि 16 लाख करोड़ कितने होते हैं क्योंकि यह इतनी बड़ी संख्या है कि आप कहेंगे कि यह क्या है, मैं बताऊंगा कि एक साल में मनरेगा चलाने के लिए 65000 करोड़ लगते हैं तो क्या आपको 16 लाख समझ में आया? करोड़ का मतलब है नरेगा का 20 साल का खर्च, अब नरेंद्र मोदी ने कर्ज माफ करते हुए 16 लाख करोड़ दिए हैं, इसका मतलब है कि इन उद्योगपतियों ने सरकारी बैंकों से कर्ज लिया था, वो पैसा आप लोगों की जेब से जीएसटी से आता है एक जैकेट पर आप 18% जीएसटी देते हैं, अगर अडानी वही जैकेट खरीदेगा तो उसे भी 18% जीएसटी देना होगा, तो यह पैसा किसका है? यह 73% गरीब सामान्य जाति के लोगों का है, जिसमें से 16 लाख करोड़ रुपये नरेंद्र मोदी ने उन्हें दिए हैं।'












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