ननों की गिरफ्तारी से बिगड़े समीकरण, केरल में ईसाई समुदाय पर BJP का खास फोकस
Kerala Nuns Arrest Controversy: पिछले महीने छत्तीसगढ़ में केरल की दो ननों की गिरफ्तारी के बाद खड़ा हुआ विवाद भाजपा और ईसाई समुदाय के रिश्तों में तनाव ले आया था। पार्टी केरल में चर्च नेतृत्व से संपर्क बढ़ाने के लिए अब बहुस्तरीय रणनीति अपना रही है। एक भाजपा नेता ने माना कि इस घटना से चर्च के साथ संवाद धीमा पड़ा, लेकिन इसे "अस्थायी झटका" बताया। उन्होंने कहा कि कई बिशप मानते हैं कि ननों की जमानत के लिए भाजपा ने ही गंभीर कोशिश की थी।
राज्य के भाजपा नेताओं ने हाल के दिनों में ईसाई धर्मगुरुओं से मुलाकात कर समझाने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सकारात्मक हस्तक्षेप से ही ननों को जमानत मिली। ये नन 25 जुलाई को जबरन धर्म परिवर्तन और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार होकर नौ दिन न्यायिक हिरासत में रहीं।

चर्च में अलग-अलग राय
ET की रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद पर सभी चर्च एक मत नहीं हैं। कैथोलिक चर्च के अहम नेता आर्चबिशप जोसेफ पाम्पलानी ने ननों को राहत दिलाने में भाजपा नेतृत्व की भूमिका स्वीकार की, जबकि बिशप पाउली कन्नूक्कडान ने पत्र में आरोप लगाया कि केंद्र और छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकारों ने रिहाई के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
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कुछ नेताओं का समर्थन, भाजपा को राहत
ननों की रिहाई के बाद कई गैर-कैथोलिक पादरी और बिशप भाजपा कार्यालय पहुंचे और आभार जताया। इससे पार्टी को भरोसा है कि पूरा ईसाई नेतृत्व नाराज नहीं है। इसी बीच, स्थानीय निकाय चुनाव और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा "विकसित केरल" अभियान के जरिए युवा ईसाई मतदाताओं तक पहुंच बना रही है।
मोदी की अगुवाई में बढ़ा संपर्क
केरल में भाजपा की ईसाई पहुंच रणनीति का नेतृत्व खुद प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं। अप्रैल 2023 में उन्होंने विभिन्न संप्रदायों के आठ बिशप से मुलाकात की थी। दिसंबर में "स्नेह यात्रा" शुरू की गई, जिसके बाद भाजपा का वोट शेयर 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 16.68% हुआ और त्रिशूर सीट पर पहली बार जीत मिली।
चिंता का कारण
छत्तीसगढ़ घटना से भाजपा को डर है कि इससे ईसाई और मुस्लिम समुदाय एकजुट हो सकते हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि एसडीपीआई और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन ईसाई आंदोलनों में शामिल हो रहे हैं और चर्चों को राजनीतिक इस्लाम से खतरा है।
संगठन में बदलाव
विवाद के बाद भाजपा ने अपने राज्य संगठन में बदलाव किया। पहली बार कोर कमेटी में समुदाय से जुड़े चार चेहरे-केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन, राष्ट्रीय सचिव अनिल के एंटनी, राज्य महासचिव अनूप एंटनी जोसेफ और शोने जॉर्ज को जगह मिली।
आलोचना से बेपरवाह
संगठन के कुछ सहयोगियों ने प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के उस बयान की आलोचना की थी जिसमें उन्होंने ननों पर लगे धर्म परिवर्तन के आरोपों को गलत बताया था। लेकिन राज्य नेतृत्व अपनी ईसाई संपर्क रणनीति पर कायम है।
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