कौन हैं आलोक जोशी? जिन्हें पहलगाम हमले के बाद बनाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का अध्यक्ष
NSAB New Chairman Focus: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSA Board/NSAB) का पुनर्गठन करते हुए रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व प्रमुख आलोक जोशी को इसका नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।
आलोक जोशी की नियुक्ति भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नए सिरे से गठित इस सात सदस्यीय बोर्ड में सशस्त्र बलों और सिविल सेवाओं के अनुभवी और प्रतिष्ठित पूर्व अधिकारी शामिल हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं...

एयर मार्शल पी.एम. सिन्हा - पूर्व पश्चिमी एयर कमांडर
लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. सिंह - पूर्व दक्षिणी सेना कमांडर
रियर एडमिरल मोंटी खन्ना - नौसेना से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी
राजीव रंजन वर्मा और मनमोहन सिंह - सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी
बी. वेंकटेश वर्मा - भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी
बता दें कि एनएसएबी वह उच्च स्तरीय बोर्ड है जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) को आंतरिक और बाहरी सुरक्षा, विदेश नीति, रक्षा, विज्ञान एवं तकनीक और आर्थिक मामलों पर विशेषज्ञ परामर्श देता है। इसके सदस्य आम तौर पर प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, रिटायर्ड सिविल व मिलिट्री अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों में से चुने जाते हैं।
आलोक जोशी की नियुक्ति किस लिए है अहम?
खबर के मुताबिक, आलोक जोशी का राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। उन्होंने 2012 से 2014 तक RAW के प्रमुख के रूप में कार्य किया और 2015 से 2018 तक NTRO के चेरयमैन रहे। बता दें कि जोशी ने विशेष रूप से नेपाल और पाकिस्तान में खुफिया ऑपरेशनों में अहम भूमिका भी निभाई है।
पहलगाम हमला और सरकार की प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान गई, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल थे। इस हमले में कई लोग घायल हुए। सूत्रों के अनुसार, इस हमले के पीछे सीमा पार से आ रहे आतंकी नेटवर्क का हाथ माना जा रहा है। इसके मद्देनज़र केंद्र सरकार ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया।
हमले के बाद पीएम मोदी ने अपने आवास पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की दो बैठकों की अध्यक्षता की, जिनमें रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, तीनों सेनाओं के प्रमुख और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे। पीएम ने सशस्त्र बलों की क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि वे भारत की प्रतिक्रिया की रणनीति, समय और स्वरूप तय करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं।












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