'अंकल सैम' की परवाह किए बिना रूस के लिए अपना प्‍यार जताएगा भारत, चीन और पाकिस्‍तान भी होंगे परेशान!

नई दिल्‍ली। रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमिर पुतिन आज भारत पहुंचेंगे। पुतिन यहां पर 19वें भारत-रूस सालाना शिखर सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए आ रहे हैं। शुक्रवार को पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात होगी और इसके बाद दोनों नेता एक ज्‍वॉइन्‍ट स्‍टेटमेंट भी जारी करेंगे। पुतिन का यह दौरा न सिर्फ अमेरिका बल्कि चीन और पाकिस्‍तान को भी परेशान करने वाला होगा। पुतिन के इस दौरे पर भी भारत और रूस के बीच एडवांस्‍ड एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील साइन होगी और क्रे‍मलिन की ओर से भी इस बात की पुष्टि कर दी गई है। विशेषज्ञों की मानें तो अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह किए बिना भारत इस डील को साइन करेगा और बिना हिचक इस बार रूस के लिए अपने प्‍यार का इजहार भी दुनिया के सामने करेगा। ये भी पढ़ें-पुतिन के भारत पहुंचने से पहले मिसाइल डील पर अमेरिका की तरफ से आई प्रतिबंधों की धमकी

भारत कड़ा संदेश देने को तैयार

भारत कड़ा संदेश देने को तैयार

रणनीतिक मसलों के जानकार आरआर सुब्रहमण्‍यम ने कहा है, 'रूस हमारा बहुत अच्‍छा दोस्‍त रहा है और समय-समय पर हम उसे परख चुके हैं। मैं बहुत खुश हूं कि अब भारत की तरफ से थोड़ी हिम्‍मत दिखाई जा रही है।' उन्‍होंने कहा कि भारत इस बार साफ कर देगा कि वह किसी भी दबाव में नहीं आएगा। अमेरिका ने पहले ही कहा दिया है कि रूस के साथ किसी भी तरह की मिलिट्री साझेदारी किसी देश या व्‍यक्ति पर प्रतिबंध लगाने के लिए काफी है। भारत की ओर से अमेरिका से अनुरोध किया गया था कि उसे एस-400 डील के बाद खास छूट दी जाए लेकिन अमेरिका ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया था। वहीं अमेरिका इस समय बहुत ही मुश्किल स्थिति में है। चीन पर अमेरिका ने काटसा नियम के तहत प्रतिबंध लगा दिए हैं क्‍योंकि उसने रूस से कुछ मिलिट्री हार्डवेयर खरीदे थे। अब भारत भी उसी स्थिति में है और अमेरिका, जो चीन को भारत की मदद से साधने की कोशिश में लगा हुआ है, उसे समझ नहीं आ रहा है कि इस समय वह क्‍या करे।

चीन और पाकिस्‍तान को टेंशन

चीन और पाकिस्‍तान को टेंशन

भारत और अमेरिका दोनों ने पिछले माह ही साल 2019 में ज्‍वॉइन्‍ट मिलिट्री ड्रिल का ऐलान किया है। दोनों देश संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी राजी हुए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो चीन और पाकिस्‍तान की ओर से बढ़ते खतरे को देखकर एस-400 की डील काफी अहम है। रक्षा क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में जो कमियां आ गई हैं यह डील उसकी भरपाई करेगी और साथ ही क्षमताओं में दोगुना इजाफा करेगी। रूस अभी तक भारत के लिए हथियार सप्‍लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है। एस-400 डील रूस के लिए एक बड़ी जीत होगी तो अमेरिका के लिए बड़ा झटका होगी। मोदी और पुतिन दोनों के ही व्‍यक्तिगत संबंध काफी अच्‍छे हैं। पुतिन के इस दौरे पर भारत और रूस के बीच किरवाक क्‍लास की फ्रिगेट की डील जो दो बिलियन डॉलर की और 200 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्‍टर का-226 की डील भी होगी, यह डील करीब एक बिलियन डॉलर की होगी। भारत और रूस के बीच पहले ही एक अंतर-सरकारी समझौता हेलीकॉप्‍टर के लिए हुआ है। इसमें से 60 हेलीकॉप्‍टर्स को रूस में बनाया जाएगा जबकि बाकी भारत में बनाए जाएंगे। ये भी पढ़ें-क्‍यों अहम है रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमिर पुतिन का भारत दौरा

परमाणु संयंत्र पर भी होगी चर्चा

परमाणु संयंत्र पर भी होगी चर्चा

65 वर्ष के पुतिन और 68 वर्ष के मोदी के बीच भारत में रूस की मदद से तैयार होने वाले संभावित दूसरे परमाणु संयंत्र पर भी चर्चा हो सकती है। रूस इस समय तमिलनाडु में कुडानकुलम में परमाणु संयंत्र के विस्‍तार में लगा है। इसके अलावा रूस की ओर से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देने के मसले पर भी चर्चा होगी। भारत साल 2022 में अपना पहला मानव अंतरिक्ष मिशन लॉन्‍च करेगा। साल 1984 में राकेश शर्मा सोवियत संघ के अंतरिक्ष यात्र में सवार होकर अंतरिक्ष की सैर पर गए थे। लेकिन मिलिट्री डील पर ज्‍यादा फोकस होगा। भारत अभी 100 बिलियन डॉलर की लागत से पुराने पड़ चुके हार्डवेयर को अपग्रेड करने में लगा है। साल 1953 में जब स्‍टालिन की मृत्‍यु हुई थी उसके बाद से ही रूस, भारत के लिए हथियारों का सबसे बड़ा आयातक देश है। ये भी पढ़ें-भारत और रूस के रिश्‍तों में नई जान डालेगी एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम की डील

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