Delhi Fire: CA विवेक अग्रवाल के परिवार का दर्दनाक अंत! 8 की मौत, गुरुग्राम से दिल्ली क्यों आए थे होटल में?

Delhi Malviya Nagar Disaster: एक हंसता-खेलता परिवार, जिसने कुछ ही घंटों पहले साथ में तस्वीरें खिंचवाई थीं और कुछ देर बाद वो सिर्फ यादों में सिमट कर रह गया है। दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में लगी भीषण आग ने एक झटके में 3 पीढ़ियों को खत्म कर दिया।

गुरुग्राम के रहने वाले सीए (CA) विवेक अग्रवाल का पूरा परिवार इस हादसे की भेंट चढ़ गया। एक ही परिवार के 8 लोगों की दर्दनाक मौत की कहानी किसी को भी भावुक कर सकता है। यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं है, बल्कि उस बदकिस्मत वक्त की है जो एक परिवार को मौत के मुंह में खींच लाया।

Delhi Malviya Nagar Disaster

बीमार पिता की लंबी उम्र मांगने आए थे, खुद मौत के आगोश में सो गए

इस दर्दनाक कहानी की शुरुआत होती है दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स हॉस्पिटल (Max Hospital) से। विवेक अग्रवाल के 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता राधेश्याम फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (Lung Infection) से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों ने परिवार को साफ कह दिया था कि राधेश्याम जी के पास अब बहुत कम वक्त बचा है। बस अपने पिता के आखिरी दिनों में उनके साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए पूरा परिवार एकजुट हुआ था।

अस्पताल के चक्कर काटने में दिक्कत न हो, इसलिए विवेक ने हॉस्पिटल के पास मालवीय नगर के एक होटल में दो कमरे बुक किए थे। राजस्थान के किशनगढ़, बेंगलुरु और गुरुग्राम से रिश्तेदार सिर्फ इसलिए आए थे ताकि दादा जी का हाथ थाम सकें। किसे पता था कि जिस पिता की जान बचाने के लिए सब दुआएं मांग रहे थे, उन्हें छोड़कर पूरा परिवार ही दुनिया से चला जाएगा।

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45 मिनट की वो देरी और... दम घुटने से बुझ गए घर के चिराग

चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल (47) एक प्राइवेट इन्शुरटेक कंपनी में सीएफओ (CFO) थे। उनके साथ उनकी पत्नी तर्जनी (42), जो एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में थीं, उनकी मां प्रेमलता (70) और दो बेटियां थीं। बड़ी बेटी जीविशा (20) बेंगलुरु से बीटेक की पढ़ाई कर रही थी और हादसे से कुछ घंटे पहले ही आई थी। छोटी बेटी वार्या (16) ने अभी हाल ही में 10वीं में 97% मार्क्स हासिल किए थे। इसके अलावा विवेक की मौसी कमला (52) और मौसा अशोक (56) भी उनके साथ थे।

03 जून की सुबह करीब 8:45 बजे होटल में अचानक आग लग गई। विवेक ने घबराहट में अपने कजिन को फोन किया और कहा कि होटल में आग लग गई है। रिश्तेदारों का आरोप है कि संकरी गली होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां करीब 45 मिनट की देरी से पहुंचीं। जब तक विवेक की साली स्वाती ने उन्हें बाहर निकाला, तब तक विवेक के फेफड़ों में बहुत ज्यादा धुआं भर चुका था। सीपीआर (CPR) देने के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

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गहनों से हुई पत्नी की पहचान, अधूरा रह गया मां का आखिरी मैसेज

यह हादसा कितना खौफनाक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विवेक की पत्नी तर्जनी का शव कमरे में इस कदर झुलस चुका था कि उन्हें पहचानना नामुमकिन था। बाद में उनके शरीर पर मौजूद जेवर (Jewellery) को देखकर उनकी पहचान की गई।

रिश्तेदार लता अग्रवाल ने रोते हुए अपने फोन का वो मैसेज दिखाया, जो उन्होंने सुबह तर्जनी को भेजा था। उसमें लिखा था कि वो उनके लिए नाश्ता भेज रही हैं, लेकिन तर्जनी उस मैसेज को पढ़ने के लिए जिंदा ही नहीं बचीं। तर्जनी के सोशल मीडिया पर अपनी बेटी जीविशा के लिए लिखा एक पुराना पोस्ट अब सबको रुला रहा है, जिसमें उन्होंने लिखा था- "हमेशा याद रखना कि तुम्हारी मम्मा तुमसे बहुत प्यार करती है।" आज वो मां और बेटी दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं।

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गुरुग्राम के सेक्टर-46 में पसरा सन्नाटा, पड़ोसियों की आंखें नम

  • सपनों का आशियाना हुआ सूना: विवेक अग्रवाल कुछ साल पहले दिल्ली के कोटला मुबारकपुर से गुरुग्राम के सेक्टर-46 में शिफ्ट हुए थे। पड़ोसियों के मुताबिक, विवेक बेहद मिलनसार इंसान थे और सोसायटी के हर काम में आगे रहते थे। पत्नी तर्जनी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपना काम तक छोड़ दिया था।
  • एक रिश्तेदार अब भी लापता: इस अग्निकांड में विवेक, उनकी पत्नी, दोनों बेटियां, मां प्रेमलता, मौसी कमला और मौसा अशोक की मौत हो चुकी है। वहीं, राजस्थान से आए मौसा झवेरी अभी भी लापता (Missing) हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
  • अस्पताल में अकेला बुजुर्ग: सबसे ज्यादा दर्दनाक बात यह है कि मैक्स हॉस्पिटल के आईसीयू (ICU) में भर्ती राधेश्याम जी को अब तक इस तबाही की खबर नहीं दी गई है। वो आज भी उस बिस्तर पर अपने बेटे और पोतियों का इंतजार कर रहे हैं, जो अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।

होटल मालिक पर पुलिस का शिकंजा, क्या टाला जा सकता था यह हादसा?

इस लापरवाही के बाद दिल्ली पुलिस ने सख्त एक्शन लिया है। होटल मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में ले लिया गया है। जांच में सामने आया कि जिस बिल्डिंग में पहले खादी की दुकान चलती थी, उसे 3 साल पहले लेकर होटल और गेस्ट हाउस में बदल दिया गया था।

लुक आउट सर्कुलर जारी: पुलिस ने आरोपी मालिक और उसकी पत्नी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया है ताकि वो देश छोड़कर भाग न सकें।

लापरवाही की एफआईआर: मालवीय नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गैर-इरादतन हत्या और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने का मुकदमा दर्ज किया गया है।

अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि क्या होटल के पास फायर एनओसी (Fire NOC) थी? क्या संकरी गली में कमर्शियल एक्टिविटी की इजाजत थी? सवाल कई हैं, लेकिन इन सवालों के जवाब विवेक अग्रवाल के हंसते-खेलते परिवार को कभी वापस नहीं ला पाएंगे।

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