जलमग्न हुई 'बाबा की नगरी', उत्तर भारत में बारिश का कहर, वाराणसी के 44 गांव बाढ़ की चपेट में
North India Rains: उत्तर भारत में बारिश ने इस समय तबाही मचा रखी है। आसमान से लगातार बरसते पानी ने नदियों को उफान पर ला दिया है और गांव पानी में डूब गए हैं। सड़कों पर नावें चल रही हैं, लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं, और प्रशासन दिन-रात राहत कार्य में जुटा है।
उत्तर प्रदेश में 402 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, वाराणसी जलमग्न है, बिहार में गंगा नदी खतरे के निशान पर बह रही है और उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों से आफत टूट रही है। इस बीच मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है। स्कूलों को बंद करना पड़ा है और प्रशासन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटा हुआ है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में अलर्ट जारी कर दिया है, वहीं लोगों में दहशत और चिंता का माहौल है।

उत्तर प्रदेश में 402 गांव जलमग्न
उत्तर प्रदेश में बारिश का सबसे भयावह असर दिखाई दे रहा है। प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ समेत 21 जिलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश ने हालात को और बिगाड़ दिया है। अब तक 343 घर ढह चुके हैं।
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हापुड़ में जर्जर सरकारी स्कूल की इमारत ढह गई, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। बिजनौर में एक परिवार गहरी नींद में था, तभी अचानक उनका मकान ढह गया। तीन घंटे तक चली रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर सभी सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
वाराणसी के 44 गांव बाढ़ की चपेट में
वाराणसी में लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। जिले के 44 गांव बाढ़ के पानी में डूब गए हैं, जिससे सैकड़ों लोग प्रभावित हुए हैं। कई गांवों में घरों में पानी घुस गया है और लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है, वहीं नावों की मदद से ग्रामीणों को बाहर निकाला जा रहा है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में खाने-पीने का सामान और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने के लिए भी टीमें तैनात की गई हैं।
बिहार में गंगा खतरे के निशान के पास
बिहार में भी बारिश का कहर जारी है। गंगा नदी बक्सर और पटना में खतरे के निशान के पास बह रही है। फतुहा और बक्सर के श्मशान घाट पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं, जिसके कारण लोगों को मजबूरी में सड़कों पर अंतिम संस्कार करना पड़ा। भोजपुर जिले में हालात इतने खराब हो गए हैं कि प्रशासन ने 71 स्कूलों को 9 अगस्त तक बंद करने का आदेश दे दिया है। वहीं बेतिया में गंडक नदी का पानी शहर की सड़कों तक पहुंच चुका है। कई इलाकों में चार फीट तक पानी भर जाने से लोगों की आवाजाही ठप हो गई है।
उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, कई लोग लापता
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में धराली के पास खीर गंगा नदी के ऊपर बादल फटने से भारी तबाही मच गई। इस घटना में 20 से 25 होटल और होम स्टे बह गए, जबकि करीब 50 लोगों के लापता होने की खबर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि राहत और बचाव के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और जिला प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक, अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, भूस्खलन में सेना के कुछ जवानों के लापता होने की भी आशंका है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से तबाही
हिमाचल प्रदेश में पहाड़ों से आफत बरस रही है। मंडी जिले में मंगलवार को बादल फटने से तबाही मच गई। कटवानी ड्रेन इलाके में एक घर पानी के दबाव में आकर ढह गया, लेकिन गनीमत यह रही कि परिवार समय रहते घर से बाहर निकल आया। वहीं लोट गांव में भी लगातार बारिश के कारण दो और मकान गिर गए। पहाड़ों से मलबा और पानी नीचे आने से ग्रामीण इलाकों में डर का माहौल है।
देशभर में अलर्ट, राहत कार्य जारी
भारतीय मौसम विभाग ने उत्तर भारत के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। राहत-बचाव टीमें दिन-रात काम कर रही हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। मौसम विभाग ने केरल के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तराखंड, बिहार और अन्य 20 राज्यों में येलो अलर्ट लागू है।
पूरे देश में बारिश का असर
मंगलवार को हुई बारिश के आंकड़े और प्रभावित इलाकों का नक्शा जारी किया गया है। इसमें साफ दिख रहा है कि न केवल उत्तर भारत बल्कि दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी बारिश ने तबाही मचा रखी है। नदियां खतरे के निशान पर बह रही हैं, पुल और सड़कें डूब गई हैं और कई जगहों पर बिजली और संचार व्यवस्था भी ठप हो गई है। लोगों को सरकार की ओर से लगातार चेतावनियां जारी की जा रही हैं कि वे नदी किनारे न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें। वहीं प्रशासन बाढ़ प्रभावित इलाकों में खाने-पीने का सामान और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
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