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OI Exclusive: 1 घंटे में कितनी बारिश होने को बादल फटना कहते हैं, उत्तराखंड में ही क्यों बरपता ऐसा कुदरती कहर?

Cloudburst Uttarkashi 2025: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद के धराली गांव में 5 अगस्त 2025 को बादल फटने के वायरल वीडियो में तबाही का जो दृश्य सामने आया है, वह बेहद भयावह है और लोगों को झकझोर देने वाला है। यह खौफनाक मंजर देखकर हर किसी के मन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर बादल फटना होता है क्या और ऐसे हादसे में उत्तराखंड या अन्य पहाड़ी इलाकों से ही क्यों सामने आते हैं?

वनइंडिया हिंदी से बातचीत में राजस्थान के मौसम विशेषज्ञ राधेश्याम शर्मा कहते हैं कि बादल फटने को समझने के लिए इसके तकनीकी और जमीनी पहलुओं को आसान भाषा में जानना जरूरी है। वैसे राजस्थान जैसे मैदानी इलाकों में बादल फटने की घटनाएं आमतौर पर नहीं होती हैं। बादल फटने का सबसे अधिक जोखिम उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी इलाकों में है।

Cloudburst Uttarkashi 2025

एक घंटे में 100 एमएम बारिश को बादल फटना कहते हैं

शर्मा ने बताया क‍ि "बादल फटना (Cloudburst) एक ऐसी स्थिति होती है जब बहुत कम समय में एक छोटे इलाके में 100 मिमी या उससे अधिक बारिश दर्ज होती है।" भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यदि एक घंटे में 100 मिमी या उससे अधिक बारिश दर्ज होती है, तो उसे 'क्लाउडबर्स्ट' यानी बादल फटना माना जाता है।

बादल फटने (Cloudburst) की घटना के बाद भारी बारिश होती है। पहाड़ी जमीन उसे सोख नहीं पाती, जिससे बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं हो सकती हैं। पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटना अधिक खौफनाक इसलिए भी हो जाती है, क्योंकि वहां पानी जमीन में सोखने की बजाय ढलान की ओर तेजी से आता है और उस तेज बहाव वाले पानी के रास्ते में जो कुछ आता है वह उसे तबाह कर देता है।

पहाड़ों में ही क्यों फटते हैं बादल?

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश या पूर्वोत्तर भारत में असम और मेघालय से मानसून में अक्सर बादल फटने की घटनाएं सामने आती हैं। सवाल है कि आखिर पहाड़ी इलाकों में ही बादल क्यों फटते हैं? इस पर राधेश्याम शर्मा कहते हैं कि मानसूनी बादलों की हाइट कम होती है। मैदानी इलाकों में तो कोई दिक्कत नहीं होती, मगर पहाड़ों में पानी से भरे बादल ट्रेप हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि मानसूनी बादल पहाड़ों से टकराकर एक ही जगह रुक जाते हैं और आगे नहीं बढ़ पाते। इसलिए अचानक से बादल फटने की घटनाएं हो जाती हैं।

उत्तरकाशी के धराली गांव में कैसे फटा बादल?

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद के धराली गांव में बादल फटने से आई भयंकर बाढ़ आई और बड़ी तबाही दिखी। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पहाड़ों में अचानक बादल फट गया और ढलान की ओर पानी का सैलाब इतनी तेजी से आया कि घरों व होटलों में मौजूद लोगों को बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका ही नहीं मिला। इस तबाही में न केवल दर्जनों घर पलभर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए बल्कि बड़ी संख्या में लोग भी मारे जाने की आशंका है।

उत्तरकाशी में बादल फटना: चार की मौत, 50 लापता

मीडिया से बातचीत में उत्तरकाशी के डीएम प्रशांत आर्य ने बताया कि बादल फटने की घटना में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। 50 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश की जा रही है। बचाव व राहत कार्य शुरू करवा दिए गए हैं। उधर, उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि 'धराली (उत्तरकाशी) क्षेत्र में बादल फटने से हुए भारी नुकसान का समाचार अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए SDRF, NDRF, जिला प्रशासन तथा अन्य संबंधित टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं।'

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