Suhas LY: जीत के साथ सुहास एलवाई ने किया टोक्यो पैरालिंपिक में आगाज, पढ़िए IAS अधिकारी के संघर्ष की पूरी कहानी
Suhas LY: जीत के साथ सुहास एलवाई ने किया टोक्यो पैरालिंपिक में आगाज, पढ़िए IAS अधिकारी के संघर्ष की पूरी कहानी
नई दिल्ली, 2 सितंबर। गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी और पैरालिंपिक बैंडमिंटन खिलाड़ी सुहास एलवाई ने आज टोक्यो ओलंपिक 2020( Tokyo Paralympic 2020) में जीत के साथ अपना आगाज किया है। टोक्यों पैरालिंपिक में डीएम सुहास एलवाई ने बैडमिंटन में पुरुष सिंगल्स के एसएल-4 मुकाबले में शानदार मैच खेला है। गुरुवार की सुबह उनका मुकाबले जर्मनी के खिलाड़ी निकलास जे पॉट के साथ हुआ। सुहास ने इस मुकालने को 21-9, 21-3 से जीत लिया और टोक्यो पैरालिंपिक में अपनी शुरुआत जीत के साथ की। कल उनका मुकाबला इंडोनेशिया के खिलाड़ी हैरी सुसंतो के साथ होगा। आइए जानते हैं नोएडा के डीएम सुहास एलवाई के संघर्ष की कहानी......

Suhas LY Biography: कौन हैं नोएडा के डीएम सुहास एलवाई
दाहिने पैर से विकलांग सुहास को कोरोना के मुश्किल हालात के दौरान गौतमबुद्ध नगर की जिम्मेदारी मिली थी। उन्होंने उस जिम्मदारी को बखूबी निभाया और कोरोना मैंनेटमेंट में केंद्र सरकार की तारीफ क पात्र बनें। शारीरिक रूप से दिव्यांग सुहास एलवाई दाहिने पैर से विकलांग हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी इस कमजोरी का रोना नहीं रोया। सुहास का जन्म कर्नाटक के छोटे से शहर शिगोमा में हुआ। वो जन्म से ही पैर से विकलांग थे। सुहास शुरुआत से IAS नहीं बनना चाहते थे। बचपन से ही को खेल को लेकर बेहद दिलचस्पी रखने थे। उनकी दिलचस्पी को पिता और परिवार का भरपूर साथ मिला। पैर पूरी तरह फिट नहीं था तो समाज के ताने उन्हें सुनने को मिलते रहे, लेकिन पिता और परिवार चट्टान की तरह उन तानों के सामने खड़े रहे और कभी भी सुहास का हौंसला नहीं टूटने दिया। पिता की नौकरी ट्रांसफर वाली थी, जो सुहास की पढ़ाई शहर-शहर घूमकर होती रही। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से कम्प्यूटर साइंस में इंजिनियरिंग पूरी की।
UPSC में हासिल की सफलता
लेकिन इस नौकरी में मन नहीं लगा। साल 2005 में पिता के देहांत के बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। सुहास ने बताया कि उनके जीवन में पिता का महत्वपूर्ण स्थान था। पिता की कमी खलती रही, उनका जाना सुहास के लिए बड़ा झटका था। इसी कमोकश के बीच सुहास ने ठान लिया कि अब सिविल सर्विस ज्वाइंन करनी है। फिर क्या था सब छोड़छाड़ कर उन्होंने UPSC की तैयारी की। उनकी मेहनत और तकदीर ने उनका साथ दिया। वनइंडिया के साथ बातचीत के दौरान सुहास ने इस बात का जिक्र भी किया कि हमें अपना कर्म करना चाहिए बाकी मुक्कदर पर छोड़ देना चाहिए। अगर आप किसी चीज को दिल से चाहेंगे और उसके लिए कोशिश करेंगे तो फिर पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने की कोशिश करेगी। ऐसा ही हुआ, पहले पीटी, फिर मेन्स और फिर इंटरव्यू में सफलता हासिल कर सुहास साल 2007 में यूपी कैडर से IAS अधिकारी बन गए।
खेल के प्रति झुकाव
सरकारी आलाधिकारी बनने के बाद खेल के प्रति उनका लगाव उसे उस तरफ खींचता रहा और फिर उन्होंने बैंडमिंटन की प्रोफेशनल प्रैक्टिस शुरू की। शुरुआत में काम के साथ खेल को मैनज करने मे परेशानी हुई, लेकिन उनके भीतर जो जुनून था उसने उन्हें पीछे नहीं हटने दिया। एक के बाद एक प्रतियोगिता जीतने क साथ ही आत्मविश्वास भी बढ़ा और आज ये सरकारी अधिकारी टोक्यो पैरालिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।












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