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नीतीश कुमार के सामने हैं अब 4 विकल्‍प, अंतिम है सबसे रोचक और चुनौतीपूर्ण

By Yogender Kumar
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    नई दिल्‍ली। दिल्‍ली में पार्टी की अहम बैठक में नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि वह अभी तो बीजेपी के साथ हैं, लेकिन भविष्‍य इस बात पर निर्भर करेगा कि 2019 लोकसभा चुनाव में उसे कितनी सीटें मिलती हैं। मतलब अगर बीजेपी ने कम सीटें ऑफर कीं, तो नीतीश कुमार अलग जाने से हिचकने वाले नहीं हैं। ऐसे में यह जानने की जरूरत है कि आखिर नीतीश कुमार के सामने विकल्‍प क्‍या हैं? तो जवाब है तीन। हालांकि, नीतीश कुमार के सामने एक चौथा विकल्‍प भी , जो कि सबसे रोचक और चुनौतीपूर्ण है। डालते हैं नीतीश कुमार के सभी चारों विकल्‍पों पर एक नजर:

    बीजेपी ज्‍यादा सीटें दे नहीं रही, जदयू कम पर मान नहीं रही

    बीजेपी ज्‍यादा सीटें दे नहीं रही, जदयू कम पर मान नहीं रही

    2019 लोकसभा चुनाव में केंद्र की मोदी सरकार की तरह बिहार में नीतीश कुमार को भी सत्‍ता विरोधी लहर का सामना करना है। ऐसे में उनके सामने सबसे बेहतर विकल्‍प यही है कि वह एनडीए में बने रहें, लोकसभा चुनाव में कम सीटें लेकर चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अभी बीजेपी के साथ डील पक्‍की कर लें। लेकिन नीतीश के रवैये से यह विकल्‍प इतना आसान नहीं लग रहा है, क्‍योंकि बीजेपी 2019 में ज्‍यादा सीटें दे नहीं रही है और जदयू कम सीटों पर मान रही है।

    महागठबंधन में गए तो ठीक वरना महागठबंधन में तोड़फोड़ भी कर सकते हैं नीतीश

    महागठबंधन में गए तो ठीक वरना महागठबंधन में तोड़फोड़ भी कर सकते हैं नीतीश

    लालू यादव के दोनों बेटे- तेजस्‍वी और तेज प्रताप महागठबंधन तोड़कर जाने वाले नीतीश कुमार को नो एंट्री का बोर्ड दिखा चुके हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के नाम पर कांग्रेस उत्‍साहित है। ऐसे में नीतीश कुमार महागठबंधन में वापसी का विकल्‍प तलाश सकते हैं। अगर आरजेडी नहीं मानी तो कांग्रेस के साथ अन्‍य छोटे दलों को एकत्रित कर चुनाव में उतरने का एक मौका नीतीश कुमार के पास।

    अकेले मैदान में भी उतर सकते हैं नीतीश कुमार

    अकेले मैदान में भी उतर सकते हैं नीतीश कुमार

    2019 चुनाव में नीतीश कुमार कांग्रेस, आरजेडी, बीजेपी को छोड़कर अकेले मैदान में उतरें और सिर्फ बिहार तक ही ताकत को सीमित रखें। विधानसभा चुनाव से पहले ताकत अर्जित करें और जब बिहार में चुनाव आएं तो नीतीश कुमार सत्‍ता में वापसी के लिए मजबूती से दावेदारी पेश करें।

    2019 में मोदी को सीधे चुनौती भी दे सकते हैं नीतीश

    2019 में मोदी को सीधे चुनौती भी दे सकते हैं नीतीश

    नीतीश कुमार के सामने चौथा और अंतिम विकल्‍प है, तीसरा मोर्चे को कब्र से निकालकर जिंदा करने का। हालांकि, इसमें भी कई प्रकार की बाधा आएंगी, लेकिन एनडीए से अलग होने के बाद नीतीश कुमार के सामने यह सबसे बेहतर विकल्‍प होगा। ऐसा इसलिए भी है, कि पूरे देश में इस समय ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो नरेंद्र मोदी के सामने खड़े होने का माद्दा रखता हो। राष्‍ट्रीय पटल पर मोदी के सामने अगर सुशासन बाबू खड़े होते हैं और चुनौती पेश करते हैं तो शायद बिहार के लोगों का उन्‍हें कहीं ज्‍यादा समर्थन मिल सकता है।

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    English summary
    Nitish Kumar has left four options of the seat sharing.

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