Nitin Nabin बने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष, तमाम कोशिशों के बावजूद राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं ढूंढ पाई BJP?
Nitin Nabin BJP Working President: भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष का चयन लोकसभा चुनाव के बाद ही होना था। हालांकि, इसमें लगातार देरी हो रही थी। अब डेढ़ साल बाद भी नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया है। बीजेपी ने रविवार (14 दिसंबर) को बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन को पार्टी का नया कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है, जब पार्टी पिछले कुछ महीनों से पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश में जुटी हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक, तमाम राजनीतिक और संगठनात्मक प्रयासों के बावजूद किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाना एक अस्थायी लेकिन रणनीतिक कदम माना जा रहा है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि संघ और पार्टी हाईकमान किसी एक नाम पर सहमत नहीं हो सका। फिलहाल यह वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

BJP President के चुनाव में क्यों हो रही है देरी?
- भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन को मजबूत करे। साथ ही, आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी की वैचारिक दिशा और चुनावी रणनीति को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके।
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- मौजूदा राजनीतिक हालात में भाजपा को ऐसा चेहरा चाहिए था, जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके। लेकिन अलग-अलग राज्यों, जातीय समीकरणों और वरिष्ठ नेताओं की दावेदारी के चलते पार्टी किसी एक नाम पर मुहर लगाने में सफल नहीं हो सकी।
- सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर उत्तर भारत और दक्षिण भारत के नेताओं के बीच संतुलन साधना भी भाजपा के लिए आसान नहीं था। एक ओर पार्टी नए चेहरे को मौका देना चाहती थी, तो दूसरी ओर अनुभवी नेताओं की अनदेखी से संगठन में असंतोष बढ़ने का खतरा भी था।
BJP Working President का फैसला क्यों लिया गया
सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि बीच का रास्ता निकालते हुए कार्यकारी अध्यक्ष की व्यवस्था को आगे बढ़ाया। नितिन नबीन का चयन भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बिहार की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़, संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है। वे युवा होने के साथ-साथ अनुशासित संगठनकर्ता की छवि रखते हैं, जो पार्टी की कार्यशैली से भली-भांति परिचित हैं। इससे पहले भी वे प्रदेश स्तर पर कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद प्रदेश के युवा और उर्जावान चेहरे को मौका दिया गया है।
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RSS और बीजेपी के पास अब नए नाम पर सहमति बनाने का समय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति से भाजपा को समय मिलेगा, ताकि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर व्यापक मंथन कर सके। साथ, ही यह कदम यह भी दर्शाता है कि पार्टी जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय संतुलित और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। इतना तय है कि संघ और पार्टी हाई कमान के बीच एक नाम को लेकर सहमति नहीं बनी है। तात्कालिक व्यवस्था के बाद बीजेपी और आरएसएस दोनों के पास नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए सहमति बनाने के लिए समय मिल जाएगा।
Nitin Nabin की नियुक्ति है एक वैकल्पिक व्यवस्था
नितिन नबीन की नियुक्ति भाजपा के लिए एक स्टॉप-गैप अरेंजमेंट है, जो संगठन को फिलहाल स्थिरता देगा। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि भाजपा पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा कब और किस रणनीति के तहत करती है। तब तक नितिन नवीन के कंधों पर पार्टी की संगठनात्मक जिम्मेदारी और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की अहम भूमिका होगी।
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