पहाड़ों की ठंडी हवा या ट्रैफिक का सिरदर्द? शिमला-मनाली समेत इन 5 हिल स्टेशनों का जाम से हाल बेहाल
5 Classic Hill Stations in India: पहाड़ों की ठंडी हवा, हरियाली से भरे रास्ते और शहरों की भागदौड़ से दूर सुकून देने वाला माहौल... यही वजह थी कि भारत के कई हिल स्टेशनों को कभी आराम और शांति की जगह माना जाता था। ब्रिटिश दौर में बसाए गए ये पहाड़ी शहर उस समय के हिसाब से बनाए गए थे, जब वहां गाड़ियों की संख्या बेहद कम थी और पर्यटन इतना बड़ा कारोबार नहीं बना था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
वीकेंड ट्रिप, बाइक राइड, लंबी रोड यात्राएं और सोशल मीडिया पर ट्रैवल ट्रेंड बढ़ने के बाद इन जगहों पर हर साल लाखों लोग पहुंच रहे हैं। नतीजा यह है कि कई मशहूर हिल स्टेशन अब ट्रैफिक जाम की बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं। छुट्टियों के मौसम में यहां घंटों तक गाड़ियां रेंगती नजर आती हैं और सुकून की तलाश में आए पर्यटक खुद जाम में फंस जाते हैं।

शिमला: पहाड़ों की रानी, लेकिन सड़कों पर भारी दबाव
भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में शामिल शिमला आज ट्रैफिक की समस्या से सबसे ज्यादा परेशान शहरों में गिना जाता है। ब्रिटिश काल की इमारतें, टॉय ट्रेन और ठंडा मौसम हर साल लाखों पर्यटकों को यहां खींच लाता है। दिल्ली और चंडीगढ़ से अच्छी कनेक्टिविटी होने के कारण भी यहां भीड़ लगातार बढ़ रही है। समस्या यह है कि शिमला बहुत खड़ी पहाड़ियों पर बसा है, जहां नई सड़कें बनाने की गुंजाइश बेहद कम है। क्रिसमस, न्यू ईयर और बर्फबारी के समय यहां कई किलोमीटर लंबा जाम आम बात बन चुका है।
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मनाली: एडवेंचर टूरिज्म ने बढ़ाई मुश्किल
एक समय शांत पहाड़ी कस्बा माना जाने वाला मनाली अब देश के सबसे व्यस्त पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है। हर मौसम में यहां हनीमून कपल, बाइकर्स, बैकपैकर्स और बर्फ देखने वाले पर्यटक पहुंचते हैं। लंबे वीकेंड और सर्दियों में यहां ट्रैफिक की स्थिति और खराब हो जाती है। सोलंग वैली, रोहतांग पास और अटल टनल की ओर जाने वाले रास्तों पर घंटों जाम देखने को मिलता है। कई बार पर्यटकों को कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में ही लंबा समय लग जाता है।
मसूरी: खूबसूरती बरकरार, लेकिन जाम से परेशान लोग
"क्वीन ऑफ द हिल्स" कही जाने वाली मसूरी आज भी उत्तर भारत के सबसे पसंदीदा हिल स्टेशनों में शामिल है। देहरादून के पास होने और दिल्ली से आसान पहुंच के कारण यहां सालभर पर्यटकों की भीड़ रहती है। लेकिन मसूरी की सड़कें इतने बड़े ट्रैफिक के लिए तैयार नहीं थीं। लाइब्रेरी चौक, पिक्चर पैलेस, माल रोड और केम्पटी फॉल्स के आसपास अक्सर भारी जाम देखने को मिलता है। ज्यादातर लोग अपनी निजी गाड़ियों से पहुंचते हैं, जबकि पार्किंग की जगह बेहद सीमित है। इसी वजह से पूरे शहर पर लगातार दबाव बना रहता है।
नैनीताल: झील के किनारे बसा शहर, लेकिन रास्ते बेहद छोटे
नैनीताल की पहचान उसकी खूबसूरत नैनी झील से है। यही झील इस शहर को खास बनाती है, लेकिन ट्रैफिक समस्या की सबसे बड़ी वजह भी यही बन चुकी है। शहर के चारों तरफ पहाड़ और झील होने के कारण सड़कें चौड़ी करना आसान नहीं है।
अधिकतर ट्रैफिक झील के आसपास की छोटी सड़कों पर ही आकर जमा हो जाता है। छुट्टियों के दौरान पर्यटकों की गाड़ियां शहर में प्रवेश करने से पहले ही लंबी कतारों में फंस जाती हैं। टैक्सी, बसें, निजी वाहन और स्थानीय लोग सभी एक ही रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे हालात और मुश्किल हो जाते हैं।
दार्जिलिंग: चाय बागानों के बीच ट्रैफिक की चुनौती
दार्जिलिंग अपनी चाय बागानों, टॉय ट्रेन और कंचनजंगा के शानदार नजारों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन यहां की संकरी और खड़ी सड़कें बढ़ती गाड़ियों के दबाव को संभाल नहीं पा रही हैं। दार्जिलिंग के अंदर की सड़कें काफी तंग हैं और वहां लगातार टैक्सी, टूरिस्ट गाड़ियां और लोकल ट्रैफिक चलता रहता है। चौक बाजार, टाइगर हिल और बतासिया लूप जैसे लोकप्रिय इलाकों में पीक सीजन के दौरान भारी जाम लगना आम हो चुका है। कई बार पर्यटकों को होटल तक पहुंचने में भी काफी देर लग जाती है।
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